सप्ताह के पहले दिन बाजार में भारी गिरावट
31 अगस्त 2026 को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। सोमवार सुबह सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुलते ही दबाव में आ गए। अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 150 अंकों से ज्यादा फिसल गया। बीएसई लार्जकैप श्रेणी के 30 शेयरों में से 28 शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट
सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद स्तर 77,264.51 के मुकाबले 77,130 पर कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सौदों में गिरावट और तेज हुई और सूचकांक कुछ ही देर में 76,842 तक नीचे चला गया। बिकवाली बढ़ने से प्रमुख शेयरों पर दबाव साफ दिखाई दिया।
निफ्टी का पिछला बंद स्तर 24,175 था। सोमवार को यह मामूली कमजोरी के साथ 24,117 पर खुला, लेकिन इसके बाद गिरावट लगातार तेज होती गई। खबर लिखे जाने तक निफ्टी 150 अंकों से अधिक टूटकर लगभग 24,013 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
अमेरिका और ईरान का तनाव बना बड़ी वजह
भारतीय बाजार में आई इस तेज गिरावट का बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ता सैन्य तनाव रहा। होर्मुज के आसपास दोनों पक्षों से हुए हालिया हमलों ने पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंका बढ़ाई और वैश्विक निवेशकों के बीच बेचैनी गहरा दी।
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर भी पड़ा। ब्रेंट क्रूड का भाव अचानक 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। तेल महंगा होने से दुनिया के कई देशों में महंगाई फिर बढ़ने की चिंता गहराने लगी।
कच्चे तेल की तेज होती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए अतिरिक्त चिंता का कारण बनती हैं। महंगा तेल आयात बिल बढ़ा सकता है और महंगाई पर दबाव डाल सकता है। इसी आशंका ने शेयर बाजार में पहले से मौजूद कमजोरी को और बढ़ाया।
एशियाई बाजारों में भी मचा दबाव
भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक संकेत एशियाई शेयर बाजारों से भी मिले। गिफ्ट निफ्टी शुरुआत से लाल निशान में कारोबार कर रहा था और खबर लिखे जाने तक 140 अंकों से फिसल चुका था। इससे घरेलू बाजार की कमजोर शुरुआत का संकेत पहले मिला था।
जापान का निक्केई 700 अंकों से ज्यादा टूटता नजर आया, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग करीब 190 अंक नीचे था। दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी लगभग 1.50 प्रतिशत की गिरावट में कारोबार कर रहा था। एशिया के प्रमुख बाजारों में दबाव साफ नजर आया।
खुलते ही टूटे ये प्रमुख शेयर
लार्जकैप शेयरों में इंफोसिस, टाटा स्टील और इंडिगो के शेयर करीब दो प्रतिशत तक टूटकर कारोबार कर रहे थे। बजाज फाइनेंस, अडानी पोर्ट्स और एनटीपीसी के शेयरों में भी लगभग डेढ़ प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इन शेयरों की कमजोरी ने सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।
मिडकैप श्रेणी में भी बिकवाली तेज रही। पर्सिस्टेंट के शेयर में 3.54 प्रतिशत, मुथूट फाइनेंस में 3.50 प्रतिशत, फोर्टिस में 2.60 प्रतिशत और गोदरेज प्रॉपर्टीज में 2.45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों ने जोखिम कम करना बेहतर समझा।
वैश्विक तनाव से निवेशकों में बढ़ी सतर्कता
इस तरह सप्ताह की शुरुआत में ही भारतीय बाजार पर वैश्विक तनाव, महंगा कच्चा तेल और एशियाई बाजारों की कमजोरी तीनों का दबाव एक साथ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में अधिकांश बड़े शेयरों की गिरावट ने निवेशकों के बीच सतर्कता और अनिश्चितता का माहौल बनाया।
शेयर बाजार में तेज उतार चढ़ाव के बीच निवेशकों को किसी भी निर्णय से पहले अपने जोखिम का आकलन करना चाहिए। बाजार की स्थिति अमेरिका ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित है। निवेश से पहले बाजार विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

