Thursday, June 4, 2026

दिल्ली NCR में पुराने वाहन बदलने की योजना को कैबिनेट की मंजूरी, जानें 10 फायदे

दिल्ली प्रदूषण

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दिल्ली NCR क्षेत्र में पुराने ट्रकों और बसों को बदलने के लिए दो वर्षीय महत्वपूर्ण योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य वायु प्रदूषण घटाना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है।

यह योजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड के सहयोग से लागू होगी, जो आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय इसके क्रियान्वयन में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।

योजना को दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की भागीदारी से लागू किया जाएगा। इसका फोकस दिल्ली NCR में पंजीकृत उन ट्रकों और बसों पर होगा, जो BS IV या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों के अंतर्गत आते हैं।

योजना पर 9585 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान

इस योजना के लिए कुल 9585 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 5041 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, जबकि भागीदार राज्यों की ओर से लगभग 1601 करोड़ रुपये की कर रियायतों का अनुमान लगाया गया है।

योजना के तहत पुराने ट्रक और बस मालिकों को BS VI या उससे कड़े उत्सर्जन मानकों वाले वाहन अथवा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे दिल्ली NCR में स्वच्छ परिवहन तकनीकों की ओर तेज बदलाव संभव होगा।

सरकार का आकलन है कि पुराने वाहनों को हटाकर नए और स्वच्छ वाहनों को बढ़ावा देने से वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे दिल्ली NCR की वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

दिल्ली NCR में वायु प्रदूषण गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती

दिल्ली NCR में वायु प्रदूषण लंबे समय से गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, खासकर सर्दियों के महीनों में स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है। परिवहन क्षेत्र को इस प्रदूषण में एक महत्वपूर्ण स्रोत माना गया है।

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की अगस्त 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली NCR में परिवहन क्षेत्र PM 2.5 में 14 प्रतिशत, कार्बन मोनोऑक्साइड में 40 प्रतिशत और NOx उत्सर्जन में 63 प्रतिशत योगदान देता है।

इसी रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन क्षेत्र के भीतर ट्रक और बसें कुल वाहन बेड़े का केवल 3 प्रतिशत हैं, फिर भी वे PM 2.5 उत्सर्जन में 36 प्रतिशत योगदान करती हैं। यही कारण है कि योजना में इन्हीं वाहनों को प्राथमिकता दी गई है।

पुराने भारी वाहनों से अधिक प्रदूषण

अनुमान के अनुसार, एक Pre BS भारी वाहन उतना प्रदूषण करता है, जितना 14 BS VI मानक वाले वाहन मिलकर करते हैं। इसी तरह BS IV वाहन भी BS VI वाहन की तुलना में 2.7 गुना अधिक उत्सर्जन करता है।

इसी आधार पर केंद्र सरकार का मानना है कि पुराने ट्रक और बसों को चरणबद्ध रूप से हटाकर नए वाहन लाने से दिल्ली NCR में वाहनजनित प्रदूषण में बड़ी कमी लाई जा सकती है। योजना का लक्ष्य इसी बदलाव को गति देना है।

2.07 लाख वाहन मालिकों को मिलेगा लाभ

इस योजना से दिल्ली NCR क्षेत्र में लगभग 2.07 लाख वाहन मालिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें करीब 1.91 लाख ट्रक मालिक और 16329 बस मालिक शामिल होंगे, जिनके वाहन दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पंजीकृत हैं।

BS III या उससे पुराने वाहनों को पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों पर अनिवार्य रूप से स्क्रैप कराना होगा। BS IV वाहनों के मालिकों को विकल्प मिलेगा कि वे वाहन को स्क्रैप कराएँ या NCR के बाहर गैर NCAP शहरों और कस्बों में बेचें।

इसके बाद वाहन मालिक को NCR क्षेत्र में BS VI या उससे कड़े उत्सर्जन मानक वाला वाहन अथवा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदकर पंजीकृत कराना होगा। दिल्ली में इस योजना के अंतर्गत खरीदे जाने वाले हल्के मालवाहक वाहन इलेक्ट्रिक होने अनिवार्य होंगे।

दिल्ली में बसों के लिए भी विशेष शर्त रखी गई है। योजना के अंतर्गत बसें केवल BS VI CNG या इलेक्ट्रिक ही होनी चाहिए। सरकारी वाहनों को इस योजना से बाहर रखा गया है, इसलिए लाभ केवल पात्र निजी वाहन मालिकों को मिलेगा।

योजना के फायदे

  1. केंद्र सरकार वाहन ऋण पर पांच वर्ष तक 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देगी। इससे पुराने वाहन बदलने वाले ट्रक और बस मालिकों पर वित्तीय बोझ कम होगा और वे नए, स्वच्छ तथा कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहन खरीदने के लिए प्रेरित होंगे।
  2. वाहन श्रेणी के अनुसार पात्र मालिकों को हर महीने 4800 रुपये तक के ईंधन वाउचर दिए जाएंगे। यह सुविधा संचालन लागत घटाने में मदद करेगी और पुराने वाहनों की जगह स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को अपनाने में आर्थिक सहायता देगी।
  3. इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले वाहन मालिकों को एकमुश्त लाभ मिलेगा। इसके अलावा Certificate of Deposit trading से जुड़े लाभ भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे स्क्रैपिंग और नए वाहन खरीद की प्रक्रिया को आर्थिक रूप से अधिक आकर्षक बनाया जाएगा।
  4. राज्य सरकारें नए वाहनों पर पंजीकरण शुल्क माफ करेंगी। इसके साथ नए वाहनों पर 10 वर्ष तक 100 प्रतिशत तक मोटर वाहन कर में छूट दी जाएगी, जिससे वाहन मालिकों को दीर्घकालिक आर्थिक राहत मिल सकेगी।
  5. प्रयुक्त वाहनों के मामले में राज्य सरकारें 10 वर्ष तक 50 प्रतिशत तक मोटर वाहन कर में छूट देंगी। इससे उन वाहन मालिकों को भी सहायता मिलेगी, जो योजना के तहत पात्र पुराने वाहन बदलकर उपयोग योग्य स्वच्छ वाहन खरीदना चाहते हैं।
  6. योजना में शामिल पुराने वाहनों पर लंबित देनदारियों को भी राज्य सरकारों द्वारा माफ किया जाएगा। इससे पुराने वाहन मालिकों को पिछली देनदारियों के कारण योजना में शामिल होने में आने वाली बाधा कम होगी।
  7. भाग लेने वाली ऑटो कंपनियाँ नए वाहनों के एक्स शोरूम मूल्य पर 8 प्रतिशत छूट देंगी। यह छूट वाहन खरीद की कुल लागत घटाएगी और पुराने ट्रक तथा बस मालिकों के लिए बदलाव को व्यावहारिक बनाएगी।
  8. योजना से दिल्ली NCR में पुराने, अधिक प्रदूषण फैलाने वाले ट्रक और बसों की संख्या घटेगी। इससे PM 2.5, कार्बन मोनोऑक्साइड और NOx उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
  9. नए BS VI, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। इसका लाभ विशेष रूप से सर्दियों के महीनों में दिख सकता है, जब दिल्ली NCR में वायु प्रदूषण सबसे गंभीर स्तर पर पहुँचता है।
  10. पूरी योजना डिजिटल पोर्टल के माध्यम से लागू होगी। इससे पात्रता की वास्तविक समय में जांच, ब्याज सब्सिडी के स्वचालित दावे, मासिक ईंधन वाउचर क्रेडिट और प्रदूषण में कमी की निगरानी पारदर्शी तरीके से हो सकेगी।

डिजिटल निगरानी और पांच वर्ष तक लाभ

योजना का क्रियान्वयन पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा। एकीकृत पोर्टल के माध्यम से पात्रता की जांच, ब्याज सब्सिडी के दावे, ईंधन वाउचर का वितरण और प्रदूषण घटाने के परिणामों की निगरानी की जाएगी।

केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले लाभ नए वाहन के पंजीकरण की तारीख से पांच वर्ष तक जारी रहेंगे। इसका अर्थ है कि दो वर्षीय पंजीकरण अवधि समाप्त होने के बाद भी योजना का प्रभाव और आर्थिक सहायता लंबे समय तक जारी रहेगी।

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में निगरानी समिति

योजना की निगरानी के लिए एक सशक्त समिति बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करेंगे। इस समिति में नीति आयोग के CEO, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग के सचिव शामिल होंगे।

दिल्ली NCR से जुड़े राज्यों के मुख्य सचिव भी इस समिति के सदस्य होंगे। NCRPB के सदस्य सचिव समिति के सदस्य संयोजक होंगे। जिला स्तर पर योजना को लागू करने और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी जिला कलेक्टरों तथा जिला मजिस्ट्रेटों को दी जाएगी।

स्वच्छ परिवहन की दिशा में बड़ा कदम

यह योजना दिल्ली NCR में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाणिज्यिक वाहनों को हटाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे न केवल वाहन मालिकों को आर्थिक सहायता मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता सुधारने में भी मदद मिलेगी।

केंद्र और राज्यों की संयुक्त भागीदारी, कर रियायतों, ब्याज सब्सिडी, ईंधन वाउचर, ऑटो कंपनियों की छूट और डिजिटल निगरानी व्यवस्था के कारण यह योजना दिल्ली NCR में स्वच्छ परिवहन बदलाव को तेज करने वाली व्यापक पहल के रूप में सामने आई है।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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