Friday, August 7, 2026

रात में लाइट जलाकर सोना पड़ सकता है भारी, जानिए वजह

रात में लाइट जलाकर सोना पड़ सकता है भारी: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अच्छी और गहरी नींद को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। कई लोगों की आदत होती है कि वे कमरे की लाइट, बेडसाइड लैंप या टीवी ऑन रखकर सो जाते हैं।

वहीं कुछ लोग सोने से ठीक पहले देर तक मोबाइल चलाते रहते हैं। देखने में ये आदतें भले ही सामान्य लगें, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनका असर सिर्फ नींद तक सीमित नहीं रहता,

बल्कि शरीर के हार्मोनल सिस्टम और रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर भी पड़ सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि रात के समय रोशनी में सोना शरीर की प्राकृतिक बॉडी क्लॉक को प्रभावित करता है।

इससे हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है और लंबे समय में कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

नींद और हार्मोन का गहरा संबंध

हमारा शरीर एक प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) के अनुसार काम करता है। यह तय करती है कि शरीर कब जागेगा और कब आराम करेगा।

जब रात में अंधेरा होता है, तब शरीर मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनाना शुरू करता है, जो अच्छी और गहरी नींद लाने में मदद करता है।

लेकिन अगर सोते समय कमरे में रोशनी रहती है या मोबाइल, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स की ब्लू लाइट आंखों तक पहुंचती है, तो मेलाटोनिन का उत्पादन कम हो सकता है।

इसका असर नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है और धीरे-धीरे हार्मोनल बैलेंस भी प्रभावित होने लगता है।

पीरियड्स और रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर भी पड़ सकता है असर

डॉ. मिताली राठौड़ के मुताबिक महिलाओं के शरीर में पीरियड्स के दौरान कई हार्मोन लगातार बदलते रहते हैं।

मेंस्ट्रुअल, फॉलिक्युलर, ओव्यूलेटरी और ल्यूटियल फेज जैसे अलग-अलग चरणों में अच्छी नींद बेहद जरूरी होती है।

यदि लगातार नींद पूरी न हो या बार-बार रोशनी के कारण नींद टूटती रहे, तो शरीर की सर्केडियन रिदम प्रभावित हो सकती है।

इसका असर हार्मोनल रेगुलेशन पर पड़ सकता है, जिससे रिप्रोडक्टिव हेल्थ भी प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है।

मेलाटोनिन कम होने पर बढ़ सकता है स्ट्रेस

विशेषज्ञों का कहना है कि जब मेलाटोनिन का स्तर कम होने लगता है, तो शरीर में कॉर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है।

अधिक कॉर्टिसोल का मतलब है कि शरीर लगातार तनाव की स्थिति में रहने लगता है।

लंबे समय तक कॉर्टिसोल बढ़ा रहने से शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इससे मानसिक तनाव बढ़ने के साथ-साथ हार्मोनल बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं।

इंसुलिन और सूजन पर भी पड़ सकता है प्रभाव

कॉर्टिसोल का स्तर अधिक होने का असर केवल तनाव तक सीमित नहीं रहता।

यह शरीर में इंसुलिन के काम करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। इसके कारण शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) बढ़ने का खतरा रहता है।

लगातार बढ़ी हुई सूजन शरीर के कई अंगों और हार्मोनल सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

यही वजह है कि विशेषज्ञ अच्छी नींद को संपूर्ण स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

मोबाइल की ब्लू लाइट भी है नुकसानदायक

सिर्फ कमरे की लाइट ही नहीं, बल्कि मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी से निकलने वाली ब्लू लाइट भी मेलाटोनिन के उत्पादन को कम कर सकती है।

अगर आप सोने से ठीक पहले लंबे समय तक स्क्रीन देखते हैं, तो दिमाग को यह संकेत मिलता रहता है कि अभी दिन का समय है।

इससे नींद आने में देरी हो सकती है और नींद की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है।

अच्छी नींद के लिए कैसा होना चाहिए कमरा?

विशेषज्ञों के अनुसार सोने का वातावरण जितना शांत, ठंडा और अंधेरा होगा, उतनी ही बेहतर नींद आएगी।

कोशिश करें कि सोते समय कमरे की मुख्य लाइट बंद रखें। यदि रात में उठने की जरूरत पड़ती है, तो बहुत हल्की और मद्धिम रोशनी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा शोर-शराबे से दूर शांत माहौल भी अच्छी नींद के लिए जरूरी माना जाता है।

कपड़े और कमरे का तापमान भी रखते हैं अहम भूमिका

बेहतर नींद के लिए हल्के, ढीले और आरामदायक कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। इससे शरीर का तापमान संतुलित बना रहता है और नींद अधिक आरामदायक होती है।

साथ ही कमरे में पर्याप्त हवादारी होनी चाहिए। बहुत अधिक गर्म या घुटन भरा कमरा नींद में बाधा डाल सकता है। इसलिए कमरे का तापमान ऐसा रखें, जहां शरीर पूरी तरह रिलैक्स महसूस करे।

बेहतर नींद के लिए अपनाएं ये आसान आदतें

  • सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाएं।
  • कमरे को जितना संभव हो अंधेरा रखें।
  • रोजाना एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें।
  • सोने से पहले कैफीन या भारी भोजन से बचें।
  • शांत और आरामदायक माहौल में सोने की आदत डालें।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञों की राय और उपलब्ध रिसर्च पर आधारित है।

इसे किसी भी प्रकार की मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। यदि आपको नींद, हार्मोन या रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी कोई समस्या है, तो किसी योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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