Monday, May 18, 2026

भोजशाला में ऐतिहासिक पल: पहली बार स्थापित हुई मां सरस्वती की मूर्ति, गर्भगृह में प्रज्वलित हुई अखंड ज्योति

भोजशाला में ऐतिहासिक पल: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और सदियों पुराने भोजशाला परिसर से एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक बड़े फैसले के बाद, रविवार (17 मई 2026) को भोजशाला परिसर के गर्भगृह में पहली बार औपचारिक रूप से देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) की मूर्ति स्थापित कर दी गई है।

इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए धार और आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे।

इस दौरान पूरा परिसर ‘जय श्री राम‘ और ‘मां सरस्वती की जय‘ के जयकारों से गूंज उठा।

मूर्ति स्थापना के साथ ही गर्भगृह में एक अखंड ज्योति भी प्रज्वलित की गई है, जो अब निरंतर जलती रहेगी। आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम और भोजशाला में हुए इस बड़े बदलाव की पूरी कहानी।

गंगाजल और गौमूत्र से हुआ शुद्धीकरण, केंद्रीय मंत्री ने फहराया भगवा

भोजशाला में ऐतिहासिक पल: रविवार की सुबह धार के लिए बेहद खास और सुरक्षा व्यवस्था से घिरी रही। हाईकोर्ट के आदेश के बाद हिंदू संगठनों और भोजशाला उत्सव समिति में जबरदस्त उत्साह देखा गया।

परिसर का शुद्धीकरण: रविवार सुबह मुख्य पूजा और मूर्ति स्थापना से पहले पूरे भोजशाला परिसर को पवित्र गंगाजल और गौमूत्र से धोकर साफ और शुद्ध किया गया।

अखंड ज्योति की स्थापना: शुद्धीकरण के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना और भव्य आरती की गई। इसके बाद बाहर स्थित एक मंदिर से विशेष रूप से लाई गई अखंड ज्योति को भोजशाला के मुख्य गर्भगृह में स्थापित किया गया।

ध्वजारोहण: इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन के दौरान केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर भी वहां मौजूद रहीं। उन्होंने भोजशाला परिसर में पूरे विधि-विधान के साथ भगवा झंडा फहराया।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: बाहर लगा पोस्टर, तिलकधारियों को ही प्रवेश

इस बड़े आयोजन को देखते हुए धार प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए थे। वहीं, भोजशाला उत्सव समिति ने परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर कुछ कड़े नियम तय किए हैं।

गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का पोस्टर

भोजशाला में ऐतिहासिक पल: भोजशाला उत्सव समिति की ओर से परिसर के मुख्य द्वार के बाहर एक पोस्टर लगाया गया है।

इस पोस्टर पर साफ तौर पर लिखा गया है कि ‘परिसर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश निषेध (बंद) रहेगा।’

प्रवेश के लिए तय किए गए नियम

उत्सव समिति के प्रमुख सदस्य गोपाल शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि अब से परिसर के भीतर केवल उन्हीं श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाएगा जो सनातनी परंपरा का पालन कर रहे हैं।

नियम के मुताबिक, केवल माथे पर तिलक लगाए और गले में भगवा गमछा पहने लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है।

सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय पुलिस बल भी मुस्तैद दिखाई दिया ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।

क्या है हाईकोर्ट का फैसला जिसने बदली भोजशाला की सूरत?

इस ऐतिहासिक बदलाव की नींव हाल ही में आए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के एक फैसले से पड़ी। दरअसल, लंबे समय से भोजशाला को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच कानूनी विवाद चल रहा था।

ASI का वैज्ञानिक सर्वे: हाईकोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का आधुनिक तकनीकों से वैज्ञानिक सर्वे किया था।

ASI ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी।

अदालत का फैसला: ASI की रिपोर्ट और उसमें मिले ऐतिहासिक साक्ष्यों, सनातन प्रतीकों और कलाकृतियों के आधार पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने माना कि यह मूल रूप से एक सरस्वती मंदिर (भोजशाला) है।

बिना रोक-टोक पूजा की अनुमति: इस ऐतिहासिक फैसले के बाद कोर्ट ने हिंदू श्रद्धालुओं को बिना किसी रोक-टोक के यहां नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करने की पूर्ण अनुमति दे दी थी। इसी फैसले को अमल में लाते हुए रविवार को यह बड़ा कदम उठाया गया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा ऐलान: भव्य रूप लेगी भोजशाला

भोजशाला में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापना और अखंड ज्योति प्रज्वलित होने के बाद मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है।

राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए एक बड़ा बयान दिया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले और एएसआई के सर्वे से यह साफ हो चुका है कि यह स्थान हमारी आस्था का केंद्र और मां वाग्देवी का पावन धाम है।

उन्होंने ऐलान किया कि मध्य प्रदेश सरकार अब इस पूरे भोजशाला परिसर को फिर से उसका प्राचीन और भव्य रूप देने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी।

सरकार यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखेगी और इसे एक बड़े सांस्कृतिक व धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

धार की राजनीति और संस्कृति का नया अध्याय

धार भोजशाला का यह घटनाक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश की राजनीति और सांस्कृतिक इतिहास का एक नया अध्याय है।

जहां एक तरफ हिंदू संगठनों में इस बात को लेकर भारी खुशी है कि सदियों बाद मां सरस्वती अपने मूल स्थान पर विराजमान हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन के सामने आने वाले दिनों में यहां शांति और सौहार्द बनाए रखने की एक बड़ी चुनौती भी होगी।

फिलहाल, धार में उत्सव का माहौल है और श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।

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