Thursday, July 30, 2026

सलमान रुश्दी अटैक: हादी मतार आतंकवाद मामले में दोषी करार, पहले भी जा चुका है जेल

सलमान रुश्दी अटैक: अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने मशहूर लेखक सलमान रुश्दी पर हुए जानलेवा हमले के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।

अदालत की जूरी ने 28 वर्षीय हादी मतार को आतंकवाद से जुड़े कई गंभीर आरोपों में दोषी माना है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी ने पहले से योजना बनाकर हमला किया था और उसका संबंध विदेशी आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह की विचारधारा से जुड़ा पाया गया।

अब अदालत 3 नवंबर को सजा का ऐलान करेगी। इन आरोपों में उसे उम्रकैद तक की सजा मिल सकती है।

आतंकवाद से जुड़े आरोप हुए साबित

फेडरल ट्रायल के दौरान पेश किए गए सबूतों के आधार पर जूरी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि हादी मतार ने केवल हमला ही नहीं किया,

बल्कि विदेशी आतंकी संगठन को समर्थन देने से जुड़े अपराध भी किए।

अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि यह फैसला आतंकवाद और कट्टरपंथी हिंसा के खिलाफ कानून की सख्ती को दर्शाता है।

पहले भी हो चुकी है सजा

हादी मतार पहले ही न्यूयॉर्क की राज्य अदालत में सलमान रुश्दी की हत्या के प्रयास का दोषी ठहराया जा चुका है। उस मामले में उसे 25 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।

अब फेडरल कोर्ट में आतंकवाद से जुड़े अपराध साबित होने के बाद उसकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दोनों मामलों की सुनवाई अलग-अलग कानूनों के तहत हुई है।

जांच में क्या मिला?

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी के पास से ऐसे दस्तावेज और डिजिटल सामग्री मिली, जिनसे हिज्बुल्लाह समर्थक विचारधारा से उसके जुड़ाव के संकेत मिले।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि वह लंबे समय से कट्टरपंथी सोच से प्रभावित था और उसने हमले की तैयारी कई महीनों पहले शुरू कर दी थी।

1989 के फतवे का भी हुआ जिक्र

सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों ने अदालत को बताया कि हादी मतार ने 1989 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी द्वारा सलमान रुश्दी के खिलाफ जारी फतवे का अध्ययन किया था।

अभियोजन पक्ष का दावा था कि उसी विचारधारा से प्रभावित होकर उसने लेखक पर हमला करने का फैसला लिया।

कैसे हुआ था हमला?

12 अगस्त 2022 को न्यूयॉर्क के चौटाउक्वा इंस्टीट्यूशन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आयोजित एक कार्यक्रम शुरू होने वाला था। इसी दौरान हादी मतार अचानक मंच पर पहुंचा और चाकू से सलमान रुश्दी पर कई बार वार कर दिए।

इस हमले में रुश्दी गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी गर्दन और पेट पर गहरी चोटें आईं और इलाज के दौरान उनकी एक आंख की रोशनी चली गई। कार्यक्रम के सह-संचालक हेनरी रीस भी इस घटना में घायल हुए थे।

‘द सैटेनिक वर्सेज’ के बाद बढ़ा था विवाद

सलमान रुश्दी का उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’ 1988 में प्रकाशित हुआ था। किताब के प्रकाशन के बाद कई देशों में इसका विरोध हुआ और मुस्लिम समुदाय के कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताया।

इसके बाद 1989 में अयातुल्ला खुमैनी ने रुश्दी के खिलाफ फतवा जारी किया था। उसी समय से उन्हें लगातार सुरक्षा के बीच रहना पड़ा और कई वर्षों तक जान से मारने की धमकियां मिलती रहीं।

अभिव्यक्ति की आजादी पर जताई चिंता

हमले के बाद सलमान रुश्दी ने कई मंचों पर कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में विचारों को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लिया जा रहा है।

उनका मानना है कि लेखक, पत्रकार, शिक्षाविद और सांस्कृतिक संस्थान पहले से ज्यादा खतरे का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा को लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद जरूरी बताया।

3 नवंबर को होगा सजा पर अंतिम फैसला

फेडरल कोर्ट अब 3 नवंबर को हादी मतार की सजा पर अंतिम फैसला सुनाएगी। यदि अदालत आतंकवाद से जुड़े सभी आरोपों में अधिकतम सजा देती है,

तो उसे उम्रकैद का सामना करना पड़ सकता है। यह फैसला अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीति और कानून के सख्त रुख को भी दर्शाता है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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