Ajmer Cyber Fraud: राजस्थान के अजमेर जिले के रामगंज थाना क्षेत्र से साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार केवल देश के अलग-अलग राज्यों तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि इनका नेटवर्क कंबोडिया और थाईलैंड जैसे विदेशी देशों से भी जुड़ा हुआ मिला है।
पुलिस अब इस पूरे रैकेट की परतें खोलने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।
फर्जी खातों से करोड़ों का लेन-देन
Ajmer Cyber Fraud: पुलिस जांच के अनुसार गिरफ्तार आरोपी भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद उन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
जांच में सामने आया है कि बीते एक वर्ष के दौरान इन खातों के माध्यम से लगभग 70 से अधिक बड़े साइबर अपराधों में करोड़ों रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया।
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर उसके स्रोत को छिपाने की कोशिश करता था।
रामगंज थाना पुलिस की कार्रवाई में 7 आरोपी गिरफ्तार
Ajmer Cyber Fraud: रामगंज थाना पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर इस गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए हैं।
बरामद सामान में शामिल हैं:
8 एटीएम कार्ड
8 चेकबुक
7 मोबाइल फोन
2 बैंक पासबुक
2 खाली चेकबुक
पैन कार्ड
आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज
पुलिस का मानना है कि ये सभी सामान साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित करने में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
दो बार कंबोडिया और दो बार थाईलैंड जा चुका है मुख्य आरोपी
Ajmer Cyber Fraud: पूछताछ के दौरान पुलिस को सबसे चौंकाने वाली जानकारी मुख्य आरोपी शेरशाह आलम को लेकर मिली। जांच में सामने आया कि वह दो बार कंबोडिया और दो बार थाईलैंड की यात्रा कर चुका है।
पुलिस को संदेह है कि विदेश यात्राओं के दौरान उसका संपर्क अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोहों से हुआ और वहीं से उसे इस नेटवर्क को संचालित करने का तरीका मिला।
यही वजह है कि अब पुलिस इस पूरे मामले में विदेशी कनेक्शन की भी गहराई से जांच कर रही है। संबंधित एजेंसियों को भी मामले की जानकारी साझा की जा रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े लोगों तक पहुंचा जा सके।
शेरशाह आलम पहले भी साइबर मामलों में रहा सक्रिय
Ajmer Cyber Fraud: जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी शेरशाह आलम पिछले दो से तीन वर्षों से साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क में सक्रिय था। पुलिस के अनुसार उसके माध्यम से करीब 70 से 80 लोगों के बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन किया गया।
इन खातों में करोड़ों रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ, जिसके बाद रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसका पता छिपाने की कोशिश की जाती थी।
फिलहाल पुलिस यह पता लगा रही है कि इन खातों के असली लाभार्थी कौन थे और आखिर यह पैसा किन देशों या लोगों तक पहुंच रहा था।
साइबर गिरोह कैसे करता था काम?
Ajmer Cyber Fraud: शुरुआती जांच में सामने आया कि यह गिरोह सबसे पहले आर्थिक रूप से कमजोर और कम जागरूक लोगों को निशाना बनाता था।
उन्हें पैसों का प्रलोभन देकर अपने नाम पर बैंक खाते खुलवाने के लिए राजी किया जाता, जिनका बाद में अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता था।
इसके बाद उन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से आई रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में कई बैंक खाते, एटीएम कार्ड और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जाता ताकि जांच एजेंसियों के लिए असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
विदेशी कनेक्शन की जांच में जुटी पुलिस
Ajmer Cyber Fraud: कंबोडिया और थाईलैंड कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस अब मामले को केवल स्थानीय साइबर ठगी नहीं मान रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह गिरोह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा था या फिर विदेश में बैठे अपराधियों के निर्देश पर काम कर रहा था।
डिजिटल डाटा, बैंक ट्रांजेक्शन और आरोपियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। इसके आधार पर आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
साइबर अपराध के बढ़ते खतरे ने बढ़ाई चिंता
Ajmer Cyber Fraud: अजमेर का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराध अब केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं रह गया है,
बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़ने लगे हैं। अपराधी आधुनिक तकनीक, फर्जी दस्तावेज और बैंक खातों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम किसी दूसरे को नहीं देना चाहिए। थोड़े से लालच में उठाया गया ऐसा कदम व्यक्ति को गंभीर कानूनी परेशानी में डाल सकता है।
अजमेर के रामगंज थाना क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई राजस्थान पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है। सात आरोपियों की गिरफ्तारी और कंबोडिया-थाईलैंड से जुड़े नेटवर्क का खुलासा यह संकेत देता है कि साइबर अपराध अब वैश्विक स्तर पर संचालित हो रहे हैं।
पुलिस की जांच अभी जारी है और उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। ऐसे मामलों से बचने के लिए आम लोगों को सतर्क रहना और बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करना बेहद जरूरी है।
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