पहलगाम बरसी: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुआ आतंकी हमला आज भी देश के लिए गहरे जख्म जैसा है।
इस हमले को एक साल बीत चुका है, लेकिन उस दिन की भयावह यादें लोगों के दिलों में अब भी जिंदा हैं।
आतंकियों ने 27 निर्दोष पर्यटकों की जान ले ली थी। खास बात यह थी कि हमलावरों ने लोगों से उनका धर्म पूछकर गोलियां चलाईं, जिससे यह घटना और भी क्रूर और अमानवीय बन गई।
कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को अपनी आंखों के सामने खो दिया, जिससे पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।
मोदी ने दी श्रद्धांजलि
हमले की पहली बरसी पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भावुक संदेश साझा किया।
उन्होंने लिखा कि पहलगाम में मारे गए मासूमों को देश कभी नहीं भूलेगा और इस दुख की घड़ी में पूरा राष्ट्र पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत आतंकवाद के सामने कभी नहीं झुकेगा और आतंकियों की हर साजिश को नाकाम किया जाएगा।
उनके इस संदेश ने देश की एकजुटता और दृढ़ संकल्प को दर्शाया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ से दिया गया जवाब
इस हमले के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाया और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया।
इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि देश अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
भारतीय सुरक्षा बलों की इस जवाबी कार्रवाई को देशभर में समर्थन मिला और इसे आतंकवाद के खिलाफ मजबूत संदेश के रूप में देखा गया।
₹3000 में देश से गद्दारी का आरोप
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ, जिसने लोगों को और ज्यादा आक्रोशित कर दिया।
कश्मीर के दो स्थानीय युवक—परवेज अहमद और बशीर अहमद—पर आरोप है कि उन्होंने महज ₹3000 के लालच में आतंकियों की मदद की।
जानकारी के अनुसार, हमले से कुछ घंटे पहले उन्होंने बैसरन इलाके में तीन आतंकियों को छिपा हुआ देखा था।
इतना ही नहीं, ये आतंकी एक दिन पहले उनके घर भी गए थे, जहां उन्होंने कई घंटे बिताए और जरूरी सामान लेकर आगे बढ़े।
समय रहते सूचना मिलती तो बच सकती थीं जानें
जांच एजेंसियों का मानना है कि दोनों आरोपियों को आतंकियों की मंशा का अंदाजा था, लेकिन उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी नहीं दी।
अगर वे समय पर सूचना देते, तो संभवतः इस हमले को रोका जा सकता था और कई निर्दोष लोगों की जान बच सकती थी।
पैसों के लालच में की गई यह चूक अब एक बड़े अपराध के रूप में सामने आई है।
आरोपी जेल में, जांच जारी
फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
हमले में शामिल आतंकियों की पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और एक अन्य विदेशी आतंकी के रूप में हुई है।
सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता जरूरी
पहलगाम का यह हमला सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि देश की एकता और सुरक्षा पर सीधा हमला था।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में केवल सरकार या सेना ही नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी होती है।
जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे खतरों से निपटने का सबसे बड़ा हथियार है।

