नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ ने कई लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी बीच मुंबई से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 61 यात्रियों के लापता होने की खबर ने उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
परिजन लगातार अपनों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई घंटों से कोई जवाब नहीं मिलने के कारण उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही है। हर परिवार को अब एक फोन कॉल या किसी नई जानकारी का इंतजार है।
23 अगस्त को मुंबई से रवाना हुआ था दल
जानकारी के मुताबिक, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाला यह दल 23 अगस्त को मुंबई से रवाना हुआ था। यात्रा के शुरुआती दिनों में यात्रियों का अपने परिवारों से संपर्क बना हुआ था।
परिजनों के मुताबिक, 25 अगस्त की शाम तक दल में शामिल कुछ लोगों से बातचीत भी हुई थी। इसके बाद अचानक संपर्क टूट गया।
दल का नेतृत्व डॉक्टर और पर्वतारोही मिलिंद चितले और उनकी पत्नी जाह्नवी कर रहे हैं।
परिवारों के अनुसार 26 अगस्त को यात्रियों के मोबाइल पर संदेश भेजे गए, लेकिन इनमें से कई मैसेज अब तक पढ़े नहीं गए हैं। इसी वजह से परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
आखिरी लोकेशन को लेकर असमंजस
परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस समय नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति बनी, उस वक्त यात्रियों का दल वास्तव में कहां था।
क्या वे चीन की सीमा पार कर चुके थे या फिर नेपाल की तरफ ही मौजूद थे? इस सवाल का स्पष्ट जवाब अभी तक परिवारों को नहीं मिल पाया है।
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि यात्रियों की आखिरी लोकेशन चीन के ग्यिरोंग पोर्ट के आसपास की थी।
बाढ़ के बाद इस इलाके से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं। हालांकि, इन वीडियो और यात्रियों की वास्तविक स्थिति के बीच सीधा संबंध अभी स्पष्ट नहीं है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से बढ़ी बेचैनी
ग्यिरोंग पोर्ट और आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं।
इन तस्वीरों और वीडियो ने उन परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है, जिनके अपने इस यात्रा दल का हिस्सा हैं।
परिजन लगातार यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यात्रियों की स्थिति क्या है और वे सुरक्षित हैं या नहीं।
संपर्क नहीं होने के कारण परिवारों के लिए हर गुजरता घंटा बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
61 यात्रियों के परिवारों को सुरक्षित वापसी की उम्मीद
फिलहाल सभी की नजरें यात्रियों की लोकेशन और उनके बारे में मिलने वाली आधिकारिक जानकारी पर टिकी हैं।
परिवार किसी भी तरह की सूचना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक यात्रा दल के लापता होने का मामला नहीं है,
बल्कि 61 परिवारों की उम्मीद और चिंता से जुड़ा सवाल है।
अब परिजनों को उम्मीद है कि जल्द ही यात्रियों की सही स्थिति सामने आएगी और उनसे संपर्क स्थापित हो सकेगा।
परिवारों की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले सभी 61 यात्री सुरक्षित हों और जल्द अपने घर लौट सकें।

