हर 100 रुपये में केवल 1 रुपये की रिकवरी
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आर्थिक अपराधों की वैश्विक चुनौती पर कहा कि हर 100 रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में जांच और कानून प्रवर्तन एजेंसियां करीब 1 रुपया ही वापस ला पाती हैं। बाकी रकम की वास्तविक रिकवरी बेहद कमजोर बनी हुई है।
कैम्ब्रिज में आयोजित 43वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन इकोनॉमिक क्राइम में बताया गया कि दुनिया भर में एक वर्ष में जितना धन मनी लॉन्ड्रिंग से गुजरता है, वह इतना अधिक है कि उससे पृथ्वी के प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक सामान्य लैपटॉप खरीदा जा सकता है।
अपराधियों की बदलती रणनीतियां बड़ी चुनौती
आर्थिक अपराधों में बेहद कम रिकवरी का बड़ा कारण अपराधियों की बदलती रणनीतियां और देशों के बीच अपर्याप्त सहयोग है। भगोड़ों के प्रत्यर्पण, संपत्तियों की पहचान, धन के प्रवाह की निगरानी और विदेशी क्षेत्राधिकार में कार्रवाई की प्रक्रिया अक्सर अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ती।
स्थिति समझाने के लिए कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उदाहरण रखा गया, जिसमें कहा गया था कि राजस्व संभालने वाला अधिकारी उससे कुछ लिए बिना रहे, यह कठिन है। समाधान के लिए लेखा परीक्षण, परस्पर सत्यापन और कमाई की जब्ती जैसी व्यवस्थाएं बताई गई थीं।
कानून मौजूद लेकिन संपत्ति वापसी बेहद कम
भारत में आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए कई स्तरों पर कानून मौजूद हैं और न्यायिक हस्तक्षेपों ने उनके इस्तेमाल में संतुलन बनाया है। विदेशी क्षेत्राधिकारों के साथ प्रत्यर्पण और पारस्परिक कानूनी सहायता संधियों के बावजूद हासिल होने वाली संपत्ति की मात्रा बेहद कम है।
अवैध धन और आर्थिक अपराधों की रफ्तार अंतरराष्ट्रीय संधियों की पुष्टि और क्रियान्वयन से कहीं तेज है। इसी कारण कोई भी देश, चाहे उसके पास पर्याप्त संसाधन हों, अकेले ऐसे अपराधों का पीछा करके प्रभावी कार्रवाई और पूरी रिकवरी सुनिश्चित नहीं कर सकता।
कानूनी औजारों के संयुक्त इस्तेमाल की जरूरत
कई देशों में दोषसिद्धि के बिना संपत्ति जब्ती, अस्पष्ट संपत्ति संबंधी आदेश, वास्तविक लाभकारी मालिकों के रजिस्टर और वित्तीय खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्थाएं मौजूद हैं। कमी इन औजारों की नहीं, बल्कि अलग अलग देशों द्वारा उनका संयुक्त समयबद्ध उपयोग नहीं करने की है।
जरूरत है कि एक देश में जारी संपत्ति जब्ती आदेश पर दूसरे देश की रजिस्ट्री तुरंत कार्रवाई करे। वित्तीय खुफिया सूचना मिलने के बाद रकम तत्काल फ्रीज की जाए। सूचना केवल फाइलों में पड़ी रहे तो अंतरराष्ट्रीय तंत्र से अपेक्षित रिकवरी संभव नहीं हो सकती।
99 हिस्से भाषण और रिपोर्टों तक सीमित
अवैध संपत्ति के हर 100 हिस्सों में लगभग 99 हिस्से भाषणों और रिपोर्टों तक सीमित रह जाते हैं, जबकि केवल एक हिस्सा वास्तव में वापस हासिल होता है। यह अंतर वैश्विक आर्थिक अपराध नियंत्रण व्यवस्था की सबसे गंभीर कमजोरियों में एक को सामने लाता है।
विजय माल्या और नीरव मोदी के मामले
भारत ने विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन के अधिकारियों के साथ 2017 में प्रक्रिया शुरू की, जबकि नीरव मोदी के मामले में अमेरिका के साथ 2018 में प्रक्रिया आरंभ हुई। दोनों पर रकम के दुरुपयोग के बाद देश छोड़कर जाने का आरोप है।
कई वर्षों की कानूनी कवायद के बावजूद विजय माल्या और नीरव मोदी का प्रत्यर्पण अभी तक पूरा नहीं हो सका है। ये मामले दिखाते हैं कि केवल संधियां पर्याप्त नहीं हैं। वास्तविक कार्रवाई, संपत्ति जब्ती, खुफिया सूचनाओं पर त्वरित कदम और सक्रिय समन्वय जरूरी है।

