Monday, January 26, 2026

नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप क्या होती है? जब ‘मैं’ प्यार पर भारी पड़ जाए

नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप: आज के समय में प्यार की परिभाषा और उसे निभाने का तरीका दोनों बदल चुके हैं। पहले रिश्ते समझ, त्याग और बराबरी पर टिके होते थे, लेकिन अब कई रिश्तों में “मैं” इतना हावी हो जाता है कि “हम” कहीं खो जाता है।

अक्सर कहा जाता है कि प्यार अपने आप नहीं मरता, उसे या तो अनदेखी मार देती है या फिर आत्ममुग्धता

यही आत्ममुग्धता आगे चलकर नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप की शक्ल ले लेती है, जो धीरे-धीरे रिश्ते को भीतर से खोखला कर देती है।

क्या होती है नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी?

नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी का मतलब केवल खुद से प्यार करना नहीं है, बल्कि खुद को हर हाल में दूसरों से ऊपर रखना है।

ऐसे लोग लगातार तारीफ, ध्यान और वैलिडेशन चाहते हैं। अगर उन्हें यह न मिले, तो वे चिढ़, गुस्से या दूरी के जरिए रिश्ते को अस्थिर कर देते हैं।

मेडिकल और साइकोलॉजिकल स्टडीज़ के मुताबिक, नार्सिसिज़्म सिर्फ रिश्तों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यक्ति के प्रोफेशनल लाइफ, पैसे और सोशल बिहेवियर पर भी असर डालता है।

अंदर से ऐसे लोग अक्सर असुरक्षित होते हैं, लेकिन बाहर से खुद को परफेक्ट और श्रेष्ठ दिखाने की कोशिश करते हैं।

नार्सिसिस्टिक रिश्ते कैसे प्यार को नुकसान पहुंचाते हैं

नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप: एक हेल्दी रिश्ता तब बनता है जब दोनों पार्टनर एक-दूसरे को सुनें, समझें और सम्मान दें।

लेकिन नार्सिसिस्टिक रिश्ते में संतुलन टूट जाता है। यहां एक व्यक्ति की जरूरतें, भावनाएं और इच्छाएं सबसे ऊपर होती हैं।

दूसरा पार्टनर धीरे-धीरे यह महसूस करने लगता है कि उसकी भावनाओं की कोई अहमियत नहीं है।

हर बहस में उसे ही गलत ठहराया जाता है और सामने वाला अपने व्यवहार को सही साबित करने में माहिर होता है।

समय के साथ यह रिश्ता मानसिक थकान, आत्म-संदेह और भावनात्मक असुरक्षा का कारण बन जाता है।

नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप के साफ रेड फ्लैग

नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप: एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर झगड़ा या मतभेद नार्सिसिज़्म नहीं होता, लेकिन कुछ संकेत बेहद स्पष्ट होते हैं। जैसे—

  • हर स्थिति में अपनी जरूरतों को प्राथमिकता देना
  • पार्टनर के नजरिए और भावनाओं को नजरअंदाज करना
  • रिश्ते की दिशा और नियम अकेले तय करना
  • लगातार तारीफ और ध्यान की मांग करना
  • गैसलाइटिंग करना, यानी पार्टनर को अपनी ही सच्चाई पर शक करवाना
  • भावनात्मक और व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान न करना
  • शुरुआत में बहुत आकर्षक होना और बाद में अचानक दूरी बना लेना

अगर ये संकेत लगातार दिखाई दें, तो रिश्ता धीरे-धीरे टॉक्सिक बन सकता है।

हर स्वार्थ नार्सिसिज़्म नहीं होता

नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप: साइकोलॉजिस्ट इस बात पर भी जोर देते हैं कि आजकल लोग बहुत जल्दी किसी को नार्सिसिस्ट का लेबल दे देते हैं।

हर गलती, हर स्वार्थ या हर तकरार को इस नजर से देखना भी रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है।

इंसान होने के नाते गलतियां होना स्वाभाविक है। फर्क तब पड़ता है जब कोई व्यक्ति बार-बार अपने व्यवहार की जिम्मेदारी लेने से इनकार करे और सामने वाले को ही दोषी ठहराए।

आज नार्सिसिज़्म पर इतनी चर्चा क्यों?

नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप: डेटिंग ऐप्स, सोशल मीडिया और खुद को एक “ब्रांड” की तरह पेश करने की संस्कृति ने अहंकार-केंद्रित व्यवहार को बढ़ावा दिया है।

लोग लाइक्स, फॉलोअर्स और अटेंशन को अपनी वैल्यू से जोड़ने लगे हैं। ऐसे माहौल में नार्सिसिस्टिक ट्रेट्स ज्यादा नजर आने लगे हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जागरूकता जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है संतुलन।

नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप: दूसरों में रेड फ्लैग देखने के साथ-साथ खुद का आत्ममंथन करना और जरूरत पड़ने पर प्रोफेशनल मदद लेना भी उतना ही अहम है।

स्वस्थ रिश्ते सहानुभूति, जिम्मेदारी और भावनात्मक सुरक्षा पर टिके होते हैं।

अगर किसी रिश्ते में बार-बार आपको छोटा महसूस कराया जा रहा है, आपकी भावनाओं को अनदेखा किया जा रहा है, तो उसे समझना और समय रहते सही कदम उठाना जरूरी है।

प्यार तब ही टिकता है जब “मैं” और “तुम” के बीच संतुलन बना रहे, वरना रिश्ता धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।

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Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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