मृदुलकांत शास्त्री
वृंदावन के भागवत प्रवक्ता मृदुल कांत शास्त्री के साथ हाल ही में एक घटना घटी, जिसके बाद उन्होंने मीडिया पर वृंदावनवासियों के लिए कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जिसने पूरे ब्रज क्षेत्र में आक्रोश की लहर पैदा कर दी। समस्त बृजवासियों को नपुंसक कहे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।
वृंदावन की बांकेबिहारी व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष और तीर्थ पुरोहित शिवा प्रधान ने इस विवाद पर सीधे और मुखर तरीके से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उस घटना को लेकर वृंदावन के हर नागरिक की संवेदना शास्त्री जी के साथ थी, लेकिन जो शब्द उन्होंने मीडिया के सामने बोले, वे किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं हैं।
नपुंसक शब्द पर तीखी आपत्ति
शिवा प्रधान ने अपनी बात में स्पष्ट किया कि यदि किसी एक व्यक्ति को नपुंसक कहना हो तो वह अलग बात है, लेकिन समस्त बृजवासियों को नपुंसक कहना पूरी तरह अनुचित है। श्रीधाम वृंदावन में एक से एक सामर्थ्यवान और धुरंधर व्यक्तित्व निवास करते हैं।

उन्होंने यह भी पूछा कि जब घटना के बाद वृंदावन के सम्मानित व्यक्ति और समस्त ब्राह्मण सभा शास्त्री के साथ खड़े थे, तो उन्हीं लोगों को नपुंसक कहना कहाँ तक उचित है। यह कृतघ्नता और अहंकार का प्रदर्शन है जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
गाड़ी की चाबी खींचने और थप्पड़ मारने का मामला
विवाद की जड़ में एक वाहन संबंधी घटना है। न्यूज चैनलों द्वारा प्रसारित वीडियो में यह देखा जा सकता है कि गाड़ी का गेट खोलने के बाद सबसे पहले थप्पड़ मारने की शुरुआत स्वयं शास्त्री जी की ओर से हुई।
निम्न वीडियो में देखें मृदुलकांत शास्त्री का बयान, वृंदावन वासियों को कहा नपुंसक और दुष्ट
शिवा प्रधान ने यह भी बताया कि जब पुलिस प्रशासन चेकिंग के दौरान किसी बाइक या गाड़ी की चाबी निकालता है तो उस पर खूब विवाद होता है। उसी तर्ज पर शास्त्री जी ने भी चाबी खींचने का कदम उठाया, जबकि एक प्रतिष्ठित धर्मप्रचारक से अपेक्षा थी कि वे ऐसे मामलों को सरलता और सहजता से सुलझाते।
वृंदावन के लिए काम न करने की धमकी पर सवाल
शास्त्री जी ने मीडिया पर यह भी कहा कि वे अब वृंदावन के लिए कोई काम नहीं करेंगे। इस पर शिवा प्रधान ने तीखा जवाब दिया कि श्रीधाम वृंदावन किसी एक व्यक्ति का मोहताज नहीं है। यहाँ सक्षम और समर्पित लोगों की कमी नहीं है।
उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर शास्त्री जी ने वृंदावन के लिए ऐसा क्या कर दिया जिसके एवज में वे इतने एहसान का बोझ लाद रहे हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को इस प्रकार अपमानित करना धर्मप्रचारक की छवि के अनुकूल नहीं है।
माफी की मांग और वीडियो हटाने की शर्त
शिवा प्रधान ने साफ कहा कि वे शास्त्री जी के शब्दों का पुरजोर विरोध करते हैं और यदि वे बृजवासियों से सार्वजनिक माफी नहीं मांगते तो यह विरोध जारी रहेगा। उन्होंने एक शर्त भी रखी कि यदि शास्त्री जी अपने शब्द वापस लेते हैं तो वे यह वीडियो हटा लेंगे।
महिलाओं द्वारा गाली गलौच की शिकायत का मामला भी इस विवाद से जुड़ा है। शिवा प्रधान ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन ने दबाव में आकर जो कार्रवाई की है, वे उसका भी विरोध करते हैं। एसएसपी मथुरा और डीएम मथुरा तक यह बात पहुँचनी चाहिए।
मृदुलकांत शास्त्री से बिना शर्त माफी की मांग
शिवा प्रधान ने कहा कि उन्हें इस बात का पूरा अहसास है कि खुलकर बोलने पर लोग विरोधी बन जाते हैं। लेकिन उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं। जितने अधिक विरोधी होंगे, उतना ही उन्हें संघर्ष के लिए बल और प्रेरणा मिलेगी।
उन्होंने अंत में दोहराया कि वृंदावन का कोई भी बृजवासी नपुंसक नहीं है। जो श्रद्धालु आना चाहें वे आएंगे, किसी के कहने से श्रद्धा न बढ़ती है न घटती है। शास्त्री जैसे वरिष्ठ प्रवक्ता से ऐसे शब्दों की अपेक्षा नहीं थी और यह पूरे ब्रज समाज के लिए शर्म का विषय है। और इसके लिए मृदुलकांत शास्त्री को माफी मांगनी होगी।

