राम मंदिर और संसद पर हमले की साजिश नाकाम: देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी खतरे को समय रहते टाल दिया है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत चार कट्टरपंथी युवकों को गिरफ्तार किया, जो देश के प्रमुख धार्मिक और संवैधानिक प्रतीकों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे।
इनके निशाने पर राम मंदिर, संसद भवन और सैन्य प्रतिष्ठान थे। समय पर की गई कार्रवाई ने एक संभावित बड़े हमले को रोक दिया।
रेकी से लेकर हमले की तैयारी तक
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने केवल योजना ही नहीं बनाई थी, बल्कि हमले की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
इनमें से एक आरोपी ने लाल किला और इंडिया गेट जैसे संवेदनशील इलाकों की रेकी की थी। दिसंबर 2025 में लाल किले की तस्वीर को एडिट कर उस पर काला झंडा दिखाना उनके इरादों और मानसिकता को साफ दर्शाता है।
यह गतिविधि न केवल प्रतीकात्मक थी बल्कि दूसरों को भड़काने का प्रयास भी थी।
IED बनाने की साजिश और बरामद सामान
गिरफ्तार आतंकियों के पास से IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने का सामान भी बरामद हुआ है।
जांच में पता चला कि बॉल बेयरिंग, कीलें, लोहे के कंटेनर और रिमोट कंट्रोल वाली खिलौना कारों का इस्तेमाल विस्फोटक तैयार करने के लिए किया जा रहा था।
एक आरोपी, जो पेशे से मैकेनिक है, इस बम को असेंबल करने में जुटा हुआ था। इससे साफ है कि साजिश केवल विचारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसे जमीन पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी थी।
ऑनलाइन नेटवर्क और कट्टरपंथ का फैलाव
राम मंदिर और संसद पर हमले की साजिश नाकाम: यह मॉड्यूल एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए संचालित हो रहा था। आरोपी अलग-अलग ग्रुप्स में सक्रिय थे, जहां जिहाद और गजवा-ए-हिंद जैसे विषयों पर चर्चा की जाती थी।
इनमें से कुछ आरोपी इन ग्रुप्स के एडमिन थे और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने का काम कर रहे थे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म का यह दुरुपयोग सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
क्राउड फंडिंग के जरिए जुटाए जा रहे थे पैसे
आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग का भी संगठित नेटवर्क तैयार किया गया था। सोशल मीडिया के माध्यम से बैंक अकाउंट और QR कोड साझा कर जिहाद के नाम पर पैसे जुटाए जा रहे थे।
इसके अलावा हथियारों और फिजिकल ट्रेनिंग के नाम पर भी अन्य सदस्यों से पैसे मांगे जा रहे थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक सुनियोजित और संगठित साजिश थी।
अलग-अलग राज्यों से जुड़े एक ही मकसद
गिरफ्तार आरोपी देश के अलग-अलग राज्यों महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से जुड़े हुए हैं और उनका उद्देश्य देश में दहशत फैलाना था।
कोई छात्र था, कोई मैकेनिक, तो कोई डिलीवरी बॉय और प्लंबर इनकी पृष्ठभूमि अलग-अलग थी, लेकिन कट्टरपंथी विचारधारा ने इन्हें एकजुट कर दिया।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती
राम मंदिर और संसद पर हमले की साजिश नाकाम: यह मामला स्पष्ट करता है कि आतंकी संगठन अब छोटे-छोटे मॉड्यूल बनाकर देश के भीतर ही सक्रिय हो रहे हैं।
धार्मिक स्थलों और संवैधानिक संस्थानों को निशाना बनाना उनकी रणनीति का हिस्सा है। साथ ही, इंटरनेट और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैल रहा कट्टरपंथ सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई और जटिल चुनौती बन गया है।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की समय पर कार्रवाई ने एक बड़े हमले को टाल दिया, लेकिन यह घटना चेतावनी भी है कि सतर्कता और तकनीकी निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है।
देश की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि ऐसे नेटवर्क्स को शुरुआती स्तर पर ही पहचानकर समाप्त किया जाए।
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