Friday, August 21, 2026

कनाडा में मोहन भागवत के दौरे के समर्थन में 100 से अधिक संगठन, प्रधानमंत्री कार्नी से मांगी प्रवेश की अनुमति

कनाडा में मोहन भागवत

कनाडा सरकार से भागवत को प्रवेश देने की अपील

कनाडा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच 100 से अधिक हिंदू और नागरिक अधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार से उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति देने की अपील की है।

इन संगठनों ने भागवत को कनाडा में प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि आव्रजन या सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा कोई भी फैसला राजनीतिक दबाव के बजाय विश्वसनीय प्रमाणों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

कार्नी के साथ तीन वरिष्ठ मंत्रियों को भेजा पत्र

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ यह संयुक्त पत्र सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसांगरी, आव्रजन मंत्री लीना मेटलेज डियाब और विदेश मंत्री अनीता आनंद को भेजा गया है। पत्र में न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद जेनी क्वान और हीथर मैकफर्सन की मांगों का भी उल्लेख है।

पत्र में कहा गया है कि जेनी क्वान, हीथर मैकफर्सन और कुछ अन्य संगठनों ने कनाडा सरकार से मोहन भागवत को देश में प्रवेश से रोकने की मांग की थी। जवाब में हस्ताक्षरकर्ता संगठनों ने ऐसी किसी कार्रवाई के औचित्य पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

दस लाख से अधिक हिंदुओं के लिए दौरे को बताया महत्वपूर्ण

समर्थन करने वाले संगठनों ने भागवत के प्रस्तावित दौरे को दस लाख से अधिक आबादी वाले कनाडाई हिंदू समुदाय के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को सामुदायिक सेवा, सामाजिक पहल, सांस्कृतिक गतिविधियों और सार्वजनिक चर्चाओं में सक्रिय प्रमुख भारतीय संगठन बताया है।

प्रतिबंध लगाने पर उठेंगे कानूनी और संवैधानिक सवाल

पत्र में स्पष्ट किया गया कि मोहन भागवत पर प्रवेश प्रतिबंध लगाने जैसा कदम प्रमाण, उचित कानूनी प्रक्रिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और कनाडाई कानून के तहत समान व्यवहार से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है। इसलिए फैसला निष्पक्ष मानकों पर होना चाहिए।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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