Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण होने की खबर इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। कई पोस्ट में ग्रहण की तारीख बताते हुए लोगों को रक्षाबंधन के दिन सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
कुछ पोस्ट में तो यह तक दावा किया जा रहा है कि ग्रहण के कारण राखी नहीं बांधनी चाहिए या पूरे दिन को अशुभ माना जाएगा। हालांकि, ऐसी जानकारी को समझने के लिए केवल ग्रहण की तारीख जानना पर्याप्त नहीं है।
किसी भी खगोलीय घटना की तारीख भले ही दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में एक ही हो, लेकिन वह घटना हर जगह दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।
किसी स्थान पर ग्रहण दिखाई दे सकता है, जबकि दूसरे क्षेत्र में लोग उसे देख भी नहीं पाएंगे। इसी तरह ग्रहण का स्थानीय समय भी जगह के हिसाब से अलग हो सकता है।
ग्रहण और रक्षाबंधन को लेकर क्या है भ्रम?
सोशल मीडिया पर चल रहे कई संदेशों में सिर्फ 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण होने की बात कही जा रही है। इनमें यह जानकारी नहीं दी जा रही कि ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं।
इसी अधूरी जानकारी के आधार पर “ग्रहण वाली राखी न बांधें”, “सूतक में राखी बांधना अशुभ है” और “रक्षाबंधन का पूरा दिन खराब रहेगा” जैसे दावे किए जा रहे हैं।
दरअसल, धार्मिक मान्यताओं में सूतक जैसी परंपराओं को ग्रहण की दृश्यता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए किसी स्थान पर ग्रहण दिखाई न देने की स्थिति में वहां के त्योहार और धार्मिक कार्यक्रमों पर उसका प्रभाव अलग तरीके से देखा जाता है।
यही कारण है कि सोशल मीडिया की एक सामान्य जानकारी को हर शहर और हर देश पर लागू करना सही नहीं माना जा सकता।
भारत में रक्षाबंधन कैसे मनाएं?
भारत में रहने वाले लोगों को 28 अगस्त की सुबह अपने स्थानीय पंचांग में दी गई जानकारी देखनी चाहिए।
अगर उनके क्षेत्र में चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देता है, तो केवल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट के आधार पर राखी बांधने का समय बदलने या पूरे दिन को अशुभ मानने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, इस बार पूर्णिमा तिथि सुबह ही समाप्त होने की बात कही जा रही है। ऐसे में रक्षाबंधन की रस्म को बहुत देर तक टालने के बजाय सुबह के समय ही राखी बांधना बेहतर रहेगा।
परिवार अपने स्थानीय पंचांग में बताए गए शुभ समय को देखकर भाई-बहन के इस त्योहार को सामान्य तरीके से मना सकते हैं।
क्या सूतक को लेकर डरने की जरूरत है?
सूतक को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं में अलग विचार मिलते हैं।
इसलिए इंटरनेट पर मौजूद किसी एक पोस्ट को अंतिम सत्य मानने के बजाय अपने क्षेत्र के विश्वसनीय पंचांग या जानकार से जानकारी लेना ज्यादा उचित है।
खासकर त्योहार के समय सोशल मीडिया पर पुराने संदेश भी नए दावे के साथ वायरल होने लगते हैं।
ऐसे में पोस्ट की तारीख, स्रोत और उसमें दी गई पूरी जानकारी की जांच करना जरूरी है।
वायरल जानकारी पर तुरंत भरोसा न करें
चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है और इसकी दृश्यता स्थान के अनुसार बदलती है। इसलिए केवल “28 अगस्त को ग्रहण है” पढ़कर रक्षाबंधन के नियम तय करना सही तरीका नहीं है।
भारत में लोगों को घबराने के बजाय अपने क्षेत्र की पंचांग जानकारी को प्राथमिकता देनी चाहिए। राखी कब बांधनी है, इसका फैसला स्थानीय तिथि और शुभ समय देखकर किया जा सकता है।

