Thursday, August 20, 2026

 CM Vijay: अमित शाह के सामने सीएम विजय ने की ये मांग! जानें क्या मांगा?

CM Vijay: दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा परिसीमन और लोकसभा की सीटों को लेकर रही।

बैठक में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मांग की कि अगले 25 साल तक लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या में बदलाव नहीं किया जाए।

उनका कहना था कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम करने वाले दक्षिणी राज्यों को परिसीमन की वजह से राजनीतिक नुकसान नहीं होना चाहिए।

तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना की ओर से भी दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जाहिर की गई।

राज्यों ने कहा कि जनसंख्या के आधार पर सीटों में बदलाव होने पर दक्षिणी राज्यों की संसद में मौजूदा हिस्सेदारी कम हो सकती है।

कर्नाटक ने अपनी कई मांगें सामने रखीं

डीके शिवकुमार ने बैठक में कर्नाटक से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने केंद्र से राज्य की आर्थिक हिस्सेदारी बढ़ाने, ज्यादा केंद्रीय अनुदान देने और बड़ी परियोजनाओं के लिए मदद बढ़ाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक देश की आर्थिक तरक्की में अहम भूमिका निभाता है। राज्य में देश की करीब 5.5 फीसदी आबादी रहती है, जबकि भारत की जीडीपी में कर्नाटक का योगदान करीब 9 फीसदी है।

शिवकुमार ने बताया कि भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात में कर्नाटक की हिस्सेदारी करीब 42 फीसदी है।

राज्य में करीब 1,100 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCC भी हैं।

इसके अलावा कर्नाटक एयरोस्पेस, कॉफी और प्रोसेस्ड घेरकिन के निर्यात में भी आगे है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु भी दुनिया के प्रमुख AI शहरों में अपनी जगह बना रहा है।

वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग

डीके शिवकुमार ने केंद्र के टैक्स में कर्नाटक की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि राज्य की हिस्सेदारी 3.6 फीसदी से बढ़ाकर 4.7 फीसदी की जानी चाहिए।

शिवकुमार के मुताबिक, 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य की हिस्सेदारी कम होने की वजह से कर्नाटक को छह साल में करीब 65 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

उन्होंने 15वें वित्त आयोग की ओर से सुझाए गए 5,495 करोड़ रुपये के विशेष अनुदान और 6,000 करोड़ रुपये के राज्य-विशेष अनुदान को जारी करने की मांग भी की।

इसके अलावा उन्होंने बेंगलुरु-मुंबई हाई-स्पीड रेल, STRR South, रायचूर में AIIMS और कल्याण कर्नाटक के लिए विशेष पैकेज जैसी योजनाओं में केंद्र से ज्यादा मदद देने की मांग की।

परिसीमन और महिला आरक्षण का मुद्दा भी उठा

डीके शिवकुमार ने दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए कहा कि परिसीमन में 1971 की जनसंख्या को आधार बनाने की व्यवस्था का सम्मान किया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि दक्षिणी राज्यों ने लंबे समय से जनसंख्या नियंत्रण के लिए काम किया है।

इसलिए केवल जनसंख्या के आधार पर लोकसभा की सीटों में बदलाव करने से इन राज्यों को राजनीतिक नुकसान नहीं होना चाहिए।

महिला आरक्षण को लेकर भी उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए और इसके लिए जनगणना का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।

पानी के मुद्दे पर विवाद की जगह सहयोग की बात

बैठक में कर्नाटक ने पानी से जुड़े विवादों पर भी अपनी बात रखी। डीके शिवकुमार ने कहा कि राज्यों को पानी के बंटवारे को लेकर विवाद करने के बजाय मिलकर काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन में पारदर्शिता और सहयोग जरूरी है। कावेरी, कृष्णा, तुंगभद्रा, पेन्नार और पालार नदी घाटियों में कर्नाटक के अधिकारों के साथ दूसरे राज्यों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

मेकेदाटु परियोजना को बताया अहम

डीके शिवकुमार ने मेकेदाटु परियोजना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना कर्नाटक के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका फायदा तमिलनाडु को भी मिल सकता है।

उनके मुताबिक, परियोजना से मिलने वाला पानी तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

उन्होंने कहा कि पानी से जुड़े मामलों को विवाद की जगह बातचीत और सहयोग से हल करने की जरूरत है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और किसानों की समस्याओं पर भी चर्चा

बैठक में स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को भी उठाया गया। डीके शिवकुमार ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ज्यादा फंड देने की मांग की।

उन्होंने शिक्षा और बच्चों के पोषण से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने की जरूरत बताई।

गरीब परिवारों के लिए घर, तटीय इलाकों में समुद्र के कारण होने वाले कटाव और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को मदद देने का मुद्दा भी उठाया गया।

इसके साथ ही किसानों की मदद, कृषि से जुड़े मुद्दे और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर भी ध्यान देने की मांग की गई।

खनिज संपदा वाले राज्यों के अधिकारों की बात

डीके शिवकुमार ने खनिज संसाधनों वाले राज्यों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने Mines & Minerals (Development & Regulation) Bill, 2026 पर दोबारा विचार करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में खनिज संपदा मौजूद है, उनके आर्थिक हितों का ध्यान रखना जरूरी है।

केंद्र सरकार की ओर से खनिजों से जुड़े फैसले लेते समय राज्यों की चिंताओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।

ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए सख्त व्यवस्था की मांग

बैठक में नशीली दवाओं की तस्करी का मुद्दा भी सामने आया। डीके शिवकुमार ने कहा कि ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए कानून और कार्रवाई को और मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सिर्फ कानून बनाना ही काफी नहीं है। ड्रग्स के मामलों में

पुलिस कार्रवाई और कोर्ट में मामलों की पैरवी की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए। इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

दक्षिण भारत के योगदान के हिसाब से मिले उचित हिस्सा

डीके शिवकुमार ने कहा कि दक्षिण भारत देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है।

ऐसे में दक्षिणी राज्यों को मिलने वाले संसाधनों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी उचित संतुलन होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की आर्थिक तरक्की का फायदा पूरे देश को मिल रहा है।

इसलिए राज्यों के हितों और उनकी चिंताओं को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक केंद्र सरकार और दूसरे दक्षिणी राज्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।

उनका कहना था कि राज्यों के बीच बेहतर सहयोग से ही देश को और मजबूत बनाया जा सकता है।

तमिलनाडु की ओर से भी उठाया गया परिसीमन का मुद्दा

बैठक में तमिलनाडु की ओर से भी परिसीमन को लेकर चिंता जताई गई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख विजय ने कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है,

उन्हें संसद में उनके मौजूदा प्रतिनिधित्व में कमी का नुकसान नहीं होना चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में साफ कानूनी आश्वासन देने की मांग की। उनका कहना था कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए बेहतर काम करने वाले राज्यों को इसकी वजह से संसद में अपनी राजनीतिक ताकत कम होने का नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

कई मुद्दों पर राज्यों ने रखी अपनी बात

दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में परिसीमन के साथ-साथ वित्तीय हिस्सेदारी, पानी, महिला आरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा, किसान, खनिज संसाधन, बुनियादी ढांचा और ड्रग्स तस्करी जैसे कई मुद्दे उठे।

बैठक में दक्षिणी राज्यों ने अपनी आर्थिक और राजनीतिक चिंताओं को केंद्र के सामने रखा। खास तौर पर परिसीमन को लेकर राज्यों की चिंता यह है कि भविष्य में लोकसभा सीटों के बंटवारे में बदलाव होने पर दक्षिणी राज्यों का मौजूदा प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।

कर्नाटक की ओर से यह भी कहा गया कि दक्षिणी राज्यों ने आर्थिक विकास और जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया है। इसलिए उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक हिस्सेदारी में भी उचित संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article