Sunday, May 24, 2026

Mental Health Pandemic: दुनिया में बढ़ रहा मानसिक तनाव, हर 43 सेकंड में जा रही एक जान

Mental Health Pandemic: मेंटल हेल्थ अब सिर्फ एक व्यक्तिगत समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरी दुनिया के सामने खड़ा एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी World Health Organization की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में हर 8 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार का सामना कर रहा है।

यह आंकड़ा बताता है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं कितनी तेजी से बढ़ रही हैं और खासतौर पर युवाओं पर इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में एक अरब से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद अधिकांश देशों में मानसिक स्वास्थ्य को अब भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

वैश्विक स्तर पर सरकारें अपने कुल हेल्थ बजट का औसतन सिर्फ दो प्रतिशत हिस्सा ही मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करती हैं।

यही कारण है कि समय पर इलाज और जागरूकता की कमी इस संकट को और गहरा बना रही है।

आखिर क्या होता है मेंटल डिसऑर्डर?

Mental Health Pandemic: मेंटल डिसऑर्डर ऐसी स्थिति होती है, जो इंसान की सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने की क्षमता को प्रभावित करती है।

यह समस्या हल्की चिंता से लेकर गंभीर मानसिक बीमारियों तक हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार डिप्रेशन, एंग्जायटी, बाइपोलर डिसऑर्डर, पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर यानी PTSD, स्किजोफ्रेनिया और ईटिंग डिसऑर्डर जैसी बीमारियां आज तेजी से बढ़ रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक तनाव, अकेलापन, सोशल प्रेशर, पारिवारिक समस्याएं और डिजिटल लाइफस्टाइल भी मानसिक बीमारियों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। कोविड महामारी के बाद यह स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है।

कोविड के बाद तेजी से बढ़े मामले

Mental Health Pandemic: WHO और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्ट बताती है कि कोविड-19 महामारी के बाद डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामलों में अचानक बड़ा उछाल आया।

लॉकडाउन, बेरोजगारी, सामाजिक दूरी और भविष्य को लेकर डर ने लोगों की मानसिक स्थिति को गहराई से प्रभावित किया।

अमेरिका क्षेत्र में मानसिक विकारों की दर सबसे ज्यादा 15.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि यूरोप में यह 14.2 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व एशिया में 13.2 प्रतिशत तक पहुंच गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह आंकड़े और बढ़ सकते हैं अगर समय रहते इस दिशा में गंभीर कदम नहीं उठाए गए।

युवाओं में सबसे बड़ा खतरा बनती आत्महत्या

मेंटल हेल्थ संकट का सबसे चिंताजनक पहलू आत्महत्या के बढ़ते मामले हैं।

Mental Health Pandemic: मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित विश्लेषण के अनुसार हर साल लगभग 7.4 लाख लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवा देते हैं।

इसका मतलब है कि दुनिया में लगभग हर 43 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत आत्महत्या की वजह से हो रही है।

रिपोर्ट के अनुसार 15 से 29 साल के युवाओं में आत्महत्या मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।

महिलाओं में डिप्रेशन और एंग्जायटी की समस्या ज्यादा देखी जा रही है, जबकि पुरुषों में नशे की लत, गुस्सा और आक्रामक व्यवहार के मामले अधिक सामने आ रहे हैं।

कौन से देशों में सबसे ज्यादा असर?

रिपोर्ट में बताया गया कि एंग्जायटी के सबसे ज्यादा मामले Portugal में दर्ज किए गए, जबकि डिप्रेशन के मामलों में Syria सबसे ऊपर रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध, आर्थिक संकट, सामाजिक अस्थिरता और बेरोजगारी जैसी परिस्थितियां मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के आसान तरीके

मेंटल हेल्थ को मजबूत बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है संतुलित जीवनशैली अपनाना।

रोजाना पर्याप्त नींद लेना, नियमित व्यायाम करना और योग या मेडिटेशन जैसी गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करना तनाव कम करने में मदद करता है।

इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति लगातार उदासी, घबराहट या अकेलापन महसूस कर रहा है, तो उसे अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय परिवार, दोस्तों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से खुलकर बात करनी चाहिए।

मानसिक समस्याओं को कमजोरी समझकर छिपाना स्थिति को और खराब कर सकता है।

विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि अगर डिप्रेशन, एंग्जायटी या तनाव के लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो बिना देर किए किसी प्रोफेशनल काउंसलर या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

समय पर मदद मिलना कई गंभीर परिस्थितियों को रोक सकता है।

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Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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