Wednesday, July 15, 2026

उदयपुर में 30 साल बाद दुर्लभ सांप मिलने से सनसनी, लौडांकिया वाइन स्नेक है नाम

उदयपुर

उदयपुर के प्रसिद्ध वन्यजीव क्षेत्र उबेश्वर जी में 12 जुलाई 2026 को दुर्लभ लौडांकिया वाइन स्नेक कैमरे में दर्ज किया गया। इस प्रजाति का सफल फोटोग्राफिक दस्तावेजीकरण स्थानीय जैव विविधता के अध्ययन और संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

दुर्लभ सर्प को उदयपुर के वन्यजीव फोटोग्राफर रोहित द्विवेदी ने श्री शरद अग्रवाल और दीपाल कालरा के मार्गदर्शन में खोजा। द्विवेदी ने प्राकृतिक आवास में इसकी तस्वीरें लेकर प्रजाति की पहचान और क्षेत्रीय उपस्थिति से जुड़ा उपयोगी दृश्य प्रमाण तैयार किया।

तीन दशक पहले उदयपुर में दर्ज हुई थी मौजूदगी

इससे लगभग 30 वर्ष पहले सेवानिवृत्त राजस्थान वन सेवा अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ सतीश शर्मा ने उदयपुर में इसी दुर्लभ सर्प को देखा और दर्ज किया था। लंबे अंतराल के बाद सामने आया नया रिकॉर्ड इसकी स्थानीय मौजूदगी की पुष्टि मजबूत करता है।

भारत में ही पाई जाती है यह दुर्लभ प्रजाति

लौडांकिया वाइन स्नेक का वैज्ञानिक नाम Ahaetulla laudankia है। भारत में मिलने वाले वाइन स्नेक समूह की इस दुर्लभ प्रजाति का वैज्ञानिक विवरण वर्ष 2019 में प्रकाशित हुआ था। यह भारत की स्थानिक प्रजाति है और देश के बाहर प्राकृतिक रूप से नहीं मिलती।

इसका प्राकृतिक विस्तार पूर्वी घाट से मध्य भारत के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए पूर्वी राजस्थान तक माना जाता है। राजस्थान में इसके प्रमाणित रिकॉर्ड बहुत कम हैं, इसलिए राज्य के वन्यजीव दस्तावेजों में इसे दुर्लभ सर्प प्रजातियों की श्रेणी में रखा जाता है।

चेस्टनट ब्राउन शरीर और सफेद पैच से होती है पहचान

इस सर्प का शरीर अत्यंत पतला, लंबा और बेल जैसी आकृति वाला होता है। इसका सामान्य रंग चेस्टनट ब्राउन दिखाई देता है, जिस पर काले महीन धब्बे होते हैं। सिर के निचले हिस्से पर मौजूद हल्के सफेद पैच इसकी प्रमुख पहचान माने जाते हैं।

लंबी और नुकीली थूथन, बड़ी आंखें तथा क्षैतिज पुतलियां इसे अन्य सर्पों से अलग करती हैं। वयस्क लौडांकिया वाइन स्नेक की लंबाई सामान्यतः 80 सेंटीमीटर से डेढ़ मीटर तक हो सकती है, हालांकि आकार प्राकृतिक परिस्थितियों और आयु के अनुसार बदलता है।

पेड़ों और झाड़ियों पर बिताता है जीवन

यह दिन में सक्रिय रहने वाला और पेड़ों तथा झाड़ियों पर जीवन बिताने वाला सर्प है। इसका निवास शुष्क पर्णपाती जंगलों, झाड़ीदार भूभागों, पहाड़ी ढलानों और प्राकृतिक हरित क्षेत्रों में होता है। इसके भोजन में छिपकलियां, गेको, छोटे मेंढक और छोटे पक्षी शामिल हैं।

हल्का विष, मनुष्यों के लिए गंभीर खतरा नहीं

लौडांकिया वाइन स्नेक हल्के विष वाला पीछे की ओर विषदंत रखने वाला सर्प है। इसका विष मुख्य रूप से छोटे शिकार को निष्क्रिय करने में प्रभावी होता है और सामान्य परिस्थितियों में मनुष्यों के लिए गंभीर खतरा नहीं माना जाता। इसका स्वभाव शांत होता है।

खतरा महसूस होने पर यह हमला करने के बजाय स्वयं को पत्तियों और शाखाओं के बीच छिपाने का प्रयास करता है। इसकी पतली बेल जैसी देह और प्राकृतिक रंग इसे वनस्पति में घुलने में मदद करते हैं, जिससे प्राकृतिक वातावरण में इसे पहचानना कठिन हो जाता है।

वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण से संरक्षण को मिलेगी मजबूती

वन्यजीव फोटोग्राफी का उद्देश्य केवल दुर्लभ जीवों की तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं होता। वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार करना और जैव विविधता संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे प्राकृतिक विरासत की प्रभावी सुरक्षा में सहायता मिलती है।

उबेश्वर क्षेत्र अरावली की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां लौडांकिया वाइन स्नेक जैसी दुर्लभ प्रजाति का मिलना क्षेत्र के प्राकृतिक महत्व, स्वस्थ आवास व्यवस्था और वन्यजीव संरक्षण की संभावनाओं को स्पष्ट रूप से सामने लाता है।

ऐसे प्रामाणिक फोटोग्राफिक रिकॉर्ड स्थानीय जैव विविधता के अध्ययन, संरक्षण योजनाओं और भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए मजबूत आधार बनते हैं। आवश्यक विशेषज्ञ सत्यापन के बाद यह रिकॉर्ड उदयपुर क्षेत्र की सर्प विविधता से जुड़े दस्तावेजों में महत्वपूर्ण योगदान बन सकता है।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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