इजरायल में थी तख्ता पलट की तैयारी: ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी के बीच अब एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने पश्चिम एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
एक अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद कई वर्षों से ईरान में सत्ता परिवर्तन की एक बेहद गोपनीय योजना पर काम कर रही थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित ऑपरेशन में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को संभावित नए नेतृत्व के तौर पर तैयार किया जा रहा था।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों ने भी अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
रिपोर्ट में क्या किया गया दावा?
अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, मोसाद का उद्देश्य केवल ईरान में शासन परिवर्तन कराना नहीं था,
बल्कि उसके बाद ऐसी सरकार स्थापित करना भी था जो इजरायल और पश्चिमी देशों के साथ रिश्ते सुधारने के लिए तैयार हो।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसी रणनीति के तहत महमूद अहमदीनेजाद को कथित तौर पर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विकल्प के रूप में तैयार किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना पर कई वर्षों तक गुप्त रूप से काम किया गया और इसे बेहद सीमित लोगों तक ही रखा गया।
फरवरी 2026 में सक्रिय हुआ कथित ऑपरेशन
रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल से जुड़े सैन्य तनाव के दौरान इस कथित ऑपरेशन का अंतिम चरण शुरू हुआ।
दावा किया गया कि 28 फरवरी को तेहरान स्थित अहमदीनेजाद के आवास के आसपास इजरायली हमले हुए, जिनमें उनके सुरक्षाकर्मियों की इमारत और सुरक्षा वाहन को नुकसान पहुंचा।
इसके बाद कथित तौर पर मोसाद से जुड़े एजेंट उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने पहुंचे। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक,
उसी दौरान अहमदीनेजाद पूरी योजना को लेकर असमंजस में पड़ गए और उन्होंने आगे बढ़ने से इनकार कर दिया। इसी वजह से पूरा अभियान सफल नहीं हो सका।
बुडापेस्ट में हुईं कथित गुप्त मुलाकातें
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में महमूद अहमदीनेजाद हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में आयोजित एक जलवायु सम्मेलन में शामिल हुए थे।
दावा किया गया है कि यह यात्रा केवल आधिकारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसी दौरान मोसाद अधिकारियों के साथ उनकी कई गुप्त बैठकें भी हुईं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जून 2025 में वे दोबारा बुडापेस्ट पहुंचे, जहां कथित तौर पर कई घंटे तक गोपनीय बातचीत चली। इन बैठकों में संभावित सत्ता परिवर्तन, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होने का दावा किया गया है।
आर्थिक सहायता देने का भी आरोप
अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन कथित बैठकों के दौरान अहमदीनेजाद को विदेश यात्राओं, आवास और अन्य व्यवस्थाओं के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या सार्वजनिक प्रमाण पेश नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह पश्चिम एशिया के इतिहास के सबसे चर्चित खुफिया अभियानों में से एक माना जा सकता है।
इजरायल से संबंध सुधारने की कथित तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि सत्ता परिवर्तन सफल होता तो अहमदीनेजाद कथित रूप से इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने और ऐतिहासिक अब्राहम समझौते में शामिल होने पर विचार करने के लिए तैयार थे।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मोसाद की रणनीति में ईरानी कुर्द विपक्षी समूहों को प्रशिक्षित कर तेहरान तक पहुंच बनाने की योजना भी शामिल थी,
लेकिन अहमदीनेजाद के पीछे हटने और परिस्थितियों के बदलने के कारण यह पूरा अभियान कथित तौर पर विफल हो गया।
अब कहां हैं महमूद अहमदीनेजाद?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कथित योजना के विफल होने के बाद महमूद अहमदीनेजाद को ईरान में नजरबंद कर दिया गया।
उन्हें आखिरी बार ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान कड़ी सुरक्षा के बीच देखा गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की खुफिया इकाई की निगरानी में हैं। हालांकि, ईरान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
इस पूरे मामले पर अब तक न तो मोसाद और न ही महमूद अहमदीनेजाद के प्रवक्ताओं ने कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। इसलिए रिपोर्ट में किए गए सभी दावों को फिलहाल अपुष्ट माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि खुफिया एजेंसियों से जुड़े मामलों की सच्चाई सामने आने में अक्सर लंबा समय लगता है।
ऐसे में भविष्य में यदि कोई आधिकारिक दस्तावेज या पुष्टि सामने आती है, तभी इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

