Sunday, April 26, 2026

कोणार्क सूर्य मंदिर के गर्भगृह का 122 साल बाद मिला रास्ता, अंग्रेजों ने कर दिया था बन्द

कोणार्क सूर्य मंदिर

ड्रिलिंग के बाद गर्भगृह के मार्ग की पहली झलक

कोणार्क सूर्य मंदिर के गर्भगृह का रास्ता करीब 9 मीटर की ड्रिलिंग के बाद वैज्ञानिकों को मिल गया। इस सफलता की आधिकारिक पुष्टि एएसआई के सुपरिन्टेंडेन्ट डी बी गडनायक ने की। पश्चिमी दिशा की पहली पिंढ़ी पर 16 इंच पाइप से नो वाइब्रेशन तकनीक के साथ ड्रिलिंग की गई थी।

दीवारों की मजबूती और संरचना का वैज्ञानिक परीक्षण

मंदिर की दीवारों की स्थिति समझने के लिए 17 इंच की कोर ड्रिलिंग की प्रक्रिया चलाई जा रही थी। इस वैज्ञानिक जांच का उद्देश्य संरचना की वास्तविक हालत का आकलन करना था ताकि गर्भगृह तक आगे की खुदाई सुरक्षित ढंग से की जा सके। एएसआई टीम ने हर चरण में सूक्ष्म तकनीकी मानकों का पालन किया।

1903 में ब्रिटिश प्रशासन द्वारा सील किया गया था गर्भगृह

तेरहवीं शताब्दी में बने इस विश्वप्रसिद्ध सूर्य मंदिर के गर्भगृह को 1903 में ब्रिटिश अधिकारियों ने संरचनात्मक चिंता के कारण रेत और पत्थरों से भर दिया था।

तब से 122 वर्षों तक यह मार्ग बंद रहा। अब एएसआई ने सोमवार से पारंपरिक विधि विधान के साथ रेत हटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी।

गर्भगृह तक पहुँच के लिए सुरंग निर्माण

एएसआई की विशेषज्ञ टीम ने गर्भगृह के प्रथम मंडप के पश्चिमी हिस्से में चार फुट गुणा चार फुट की सुरंग बनाकर रेत हटाने का काम आरंभ किया।

इसके समानांतर दीवारों की मजबूती के परीक्षण के लिए 17 इंच की कोर ड्रिलिंग भी संचालित हुई। यह प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित वातावरण में और उच्च तकनीकी उपकरणों की सहायता से की गई।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में विस्तृत संरचनात्मक मूल्यांकन

खुदाई कार्य एएसआई अधीक्षक डी बी गड़नायक और क्षेत्रीय निदेशक दिलीप खमारी की प्रत्यक्ष निगरानी में हुआ। दस विशेषज्ञों की टीम ने स्थल की संरचनात्मक मजबूती, स्थिरता और आगे की खुदाई की संभावनाओं की सूक्ष्म जांच की। टीम ने गर्भगृह की दिशा में बढ़ती हर प्रगति को सावधानी से दर्ज किया।

122 साल पुराने रहस्य की परतें हटने की उम्मीद

प्रारंभिक सफलता के बाद वैज्ञानिक समुदाय और पुरातत्व विशेषज्ञों में उत्सुकता बढ़ गई है कि गर्भगृह के भीतर संरचनात्मक रहस्य, मूर्तिकला अवशेष या ऐतिहासिक प्रमाण किस रूप में मिलेंगे। रेत हटाने की मौजूदा प्रक्रिया को इस दिशा में सबसे निर्णायक कदम माना जा रहा है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Mudit
Mudit
लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article