जामा मस्जिद के तहखाने में मिली मूर्तियां: गुजरात के भरूच स्थित विवादित जामा मस्जिद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है,
जिसमें मस्जिद के बेसमेंट में हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी प्राचीन मूर्तियाँ दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर बहस तेज हो गई है और मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर नए सिरे से चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कई प्राचीन प्रतिमाएँ मिली
वायरल वीडियो में तहखाने के भीतर भगवान गणेश, भगवान हनुमान और जैन धर्म के तीर्थंकर मल्लिनाथजी की प्रतिमाएँ दिखाई देने का दावा किया गया है।
वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद कई हिंदू संगठनों और संतों ने इसे अपने पुराने दावों की पुष्टि बताया है।
उनका कहना है कि भरूच की जामा मस्जिद का निर्माण प्राचीन हिंदू और जैन मंदिरों के अवशेषों पर किया गया था और अब सामने आए दृश्य इस दावे को मजबूती प्रदान करते हैं।
स्वामी मुक्तानंद ने कही यह बात
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भरूच के संत स्वामी मुक्तानंद ने कहा कि सामने आया वीडियो वास्तविक है और यह उन बातों की पुष्टि करता है जिन्हें संत समाज लंबे समय से उठाता रहा है।
उनके अनुसार इतिहास को छिपाया नहीं जा सकता और समय के साथ सच्चाई सामने आ ही जाती है।
उन्होंने कहा कि मंदिरों के अस्तित्व और उनसे जुड़े अवशेषों के संबंध में वर्षों से जो बातें कही जा रही थीं, अब उनके समर्थन में दृश्य प्रमाण भी सामने आ रहे हैं।
लंबे समय से उठता रहा है मंदिर तोड़े जाने का दावा
भरूच की जामा मस्जिद को लेकर वर्षों से यह दावा किया जाता रहा है कि इसका निर्माण हिंदू और जैन मंदिरों को ध्वस्त करके किया गया था।
विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया जाता रहा है।
इस विषय पर ऐतिहासिक दस्तावेजों, स्थापत्य शैली और अन्य तथ्यों के आधार पर भी बहस होती रही है।
हालांकि इस दावे को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी राय है और मामला लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है।
ASI नियमों के पालन की उठी मांग
स्वामी मुक्तानंद ने यह भी कहा कि जामा मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है, इसलिए इसके प्रबंधन और उपयोग में निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि स्मारक परिसर में किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधियों को रोका जाए जो ASI के दिशा-निर्देशों के विपरीत हों।
उनका कहना है कि संरक्षित धरोहरों की ऐतिहासिक पहचान और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
प्रशासन ने हटाया अतिक्रमण
हाल के दिनों में स्थानीय प्रशासन ने मस्जिद परिसर के आसपास कार्रवाई भी की है। अधिकारियों ने कथित रूप से अवैध रूप से बनाए गए एक शेड को ध्वस्त कर अतिक्रमण हटाया।
इसके अलावा तहखाने की ओर जाने वाले एक प्रवेश द्वार को भी सील कर दिया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई को नियमों के पालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विवाद पर बढ़ी निगाहें
तहखाने से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद भरूच की जामा मस्जिद एक बार फिर सार्वजनिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है।
आने वाले समय में इस मामले पर प्रशासन, पुरातत्व विभाग और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
इतिहास, आस्था और विरासत से जुड़े इस विवाद ने क्षेत्र में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

