भारत
सतत पर्यावरणीय बदलाव की दिशा में भारत की तेज प्रगति
भारत ने पिछले 12 वर्षों में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की नीति के साथ देश ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलित मॉडल तैयार किया है।
इस अवधि में भारत ने सुनियोजित नीतिगत कदमों और लगातार क्रियान्वयन के माध्यम से व्यापक पर्यावरणीय बदलाव हासिल किया। वन और वृक्ष आच्छादन में विस्तार, आर्द्रभूमियों का संरक्षण, मैंग्रोव और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली जैसे प्रयासों ने देश की पर्यावरणीय दिशा को मजबूत किया है।
भारत की पर्यावरणीय उपलब्धियों में नदियों के पुनर्जीवन को भी प्रमुख स्थान मिला है। गंगा और उसकी सहायक नदियों के प्रदूषण को कम करने तथा उनकी पारिस्थितिक सेहत को सुधारने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नमामि गंगे से नदी पुनर्जीवन को नई गति
गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण से मुक्त करने तथा उनके प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से नमामि गंगे कार्यक्रम वर्ष 2014 में शुरू किया गया था। यह कार्यक्रम नदी संरक्षण की दिशा में भारत की सबसे बड़ी पहल बना।
इस कार्यक्रम के तहत सीवेज उपचार, घाट विकास, नदी सतह की सफाई, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण जैसे कई स्तरों पर काम किया गया। फरवरी 2026 तक कुल 524 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें से 355 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं।
नमामि गंगे कार्यक्रम ने गंगा नदी को केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि एक जीवंत पारिस्थितिक तंत्र के रूप में देखने की नीति को आगे बढ़ाया। इसने नदी संरक्षण को शहरी प्रबंधन, स्वच्छता और जनभागीदारी से जोड़ने का काम किया।
ग्रीन इंडिया मिशन से वन और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती
वर्ष 2015 में शुरू किया गया ग्रीन इंडिया मिशन देश की प्रमुख पर्यावरणीय पहलों में शामिल है। इसका लक्ष्य वनों और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली को मजबूत करना है, ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सके और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा हो।
भारत का वन और वृक्ष आच्छादन 8.27 लाख वर्ग किलोमीटर तक पहुँच चुका है। यह देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 25 प्रतिशत से अधिक हिस्से को कवर करता है। यह उपलब्धि भारत की दीर्घकालिक वन संरक्षण नीति की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत करती है।
वैश्विक वन आँकड़ों में भी भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। कुल वन क्षेत्र के मामले में भारत दुनिया में 9वें स्थान पर पहुँच चुका है। यह स्थिति दिखाती है कि जनसंख्या, विकास और संसाधन दबाव के बावजूद भारत ने वन क्षेत्र को प्राथमिकता दी है।
एक पेड़ माँ के नाम अभियान बना जन आंदोलन
वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पेड़ माँ के नाम अभियान की शुरुआत की थी। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक, सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव से जोड़ता है। इसके माध्यम से वृक्षारोपण को जनभागीदारी का बड़ा अभियान बनाया गया।
यह अभियान दुनिया के सबसे बड़े जन पर्यावरण आंदोलनों में शामिल हो चुका है। दिसंबर 2025 तक देशभर में 262 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। इस पहल ने वृक्षारोपण को सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित किया।
एक पेड़ माँ के नाम अभियान की विशेषता यह रही कि इसमें आम नागरिकों, संस्थानों, स्थानीय निकायों, छात्रों और सामाजिक संगठनों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। इससे पर्यावरण संरक्षण केवल नीति का विषय नहीं रहा, बल्कि जनभावना से जुड़ा अभियान बन गया।
मिशन लाइफ से जीवनशैली आधारित जलवायु कार्रवाई को बल
वर्ष 2022 में शुरू किए गए मिशन लाइफ ने भारत की जलवायु नीति को नई पहचान दी है। इस पहल ने दुनिया के सामने यह विचार रखा कि जलवायु संकट का समाधान केवल औद्योगिक बदलावों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली में बदलाव से भी संभव है।
मिशन लाइफ के माध्यम से भारत ने संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, अपव्यय में कमी, ऊर्जा बचत, पर्यावरण अनुकूल व्यवहार और जिम्मेदार उपभोग को बढ़ावा दिया। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि जीवनशैली आधारित जलवायु कार्रवाई के वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में मजबूत हुई।
भारत ने उत्सर्जन तीव्रता घटाने के अपने लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर बड़ी उपलब्धि दर्ज की। वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन तीव्रता को 33 से 35 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य भारत ने निर्धारित समय से 11 वर्ष पहले हासिल कर लिया।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व को पहचान
वर्ष 2015 में शुरू किया गया अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन भारत की जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा कूटनीति की बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इस पहल ने भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का एजेंडा तय करने वाले देशों की श्रेणी में स्थापित किया।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने सौर ऊर्जा को विकासशील देशों के लिए किफायती, उपलब्ध और व्यावहारिक विकल्प के रूप में आगे बढ़ाया। भारत ने इस मंच के माध्यम से जलवायु कार्रवाई को केवल प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि तकनीक, सहयोग और नीति क्रियान्वयन से जोड़ा।
स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की भूमिका अब केवल घरेलू नीतियों तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने भारत की विश्वसनीयता को मजबूत किया और यह संकेत दिया कि भारत जलवायु संकट पर समाधान आधारित नेतृत्व देने की क्षमता रखता है।
संरक्षण और विकास का संतुलित भारतीय मॉडल
दुनिया में जलवायु परिवर्तन, संसाधनों पर दबाव और पर्यावरणीय क्षरण लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में भारत ने संरक्षण, स्थिरता और विकास को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई है। यह दृष्टिकोण देश की दीर्घकालिक पर्यावरणीय रणनीति का आधार बना है।
भारत का मॉडल इस बात पर आधारित है कि विकास को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसे प्रकृति विरोधी भी नहीं बनने दिया जा सकता। वन विस्तार, नदी पुनर्जीवन, स्वच्छ ऊर्जा, पौधारोपण और जिम्मेदार जीवनशैली इसी संतुलित दृष्टिकोण के हिस्से हैं।
पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियाँ दिखाती हैं कि भारत ने पर्यावरण संरक्षण को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा। योजनाओं, अभियानों, जनभागीदारी और अंतरराष्ट्रीय पहल के माध्यम से देश ने पर्यावरणीय परिवर्तन को ठोस परिणामों में बदलने का प्रयास किया है।

