Alcohol वाली दवाओं पर सरकार सख्त: भारत सरकार ने अल्कोहल वाली दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है।
अब 12 प्रतिशत से ज्यादा इथाइल अल्कोहल वाली ओरल लिक्विड दवाएं, जिनकी बोतल 30 मिलीलीटर से बड़ी होगी, बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं खरीदी जा सकेंगी।
सरकार ने इन दवाओं को Schedule H1 श्रेणी में शामिल करने का फैसला किया है।
इस बदलाव का असर कई कफ सिरप, टॉनिक और दूसरी लिक्विड दवाओं पर पड़ेगा, जो अब तक आसानी से मेडिकल स्टोर से मिल जाती थीं।
अब डॉक्टर की पर्ची होगी जरूरी
नए नियम लागू होने के बाद ऐसी दवाएं खरीदने के लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन दिखाना जरूरी होगा। मेडिकल स्टोर संचालकों को भी हर बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।
रिकॉर्ड में यह जानकारी होगी कि दवा किस मरीज को, किस डॉक्टर की पर्ची पर और कब बेची गई। इससे सरकार जरूरत पड़ने पर इन दवाओं की बिक्री की जांच कर सकेगी।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अल्कोहल और कोडीन वाली कफ सिरप का नशे के लिए गलत इस्तेमाल किया गया।
कई जगह इन दवाओं की अवैध बिक्री और तस्करी भी पकड़ी गई। कुछ लोग बिना किसी बीमारी के केवल नशा करने के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे।
राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में कफ सिरप से जुड़े गंभीर मामले सामने आने के बाद सरकार पर नियम सख्त करने का दबाव बढ़ा।
इसके बाद केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव करने का फैसला लिया, ताकि ऐसी दवाओं का गलत इस्तेमाल रोका जा सके।
किन दवाओं पर लागू होगा नया नियम?
सरकार के नए नियम के अनुसार सिर्फ वही ओरल लिक्विड दवाएं Schedule H1 में आएंगी,
जिनमें 12 प्रतिशत से ज्यादा इथाइल अल्कोहल होगा और जिनकी पैकिंग 30 मिलीलीटर से बड़ी होगी।
अगर किसी दवा में अल्कोहल की मात्रा इससे कम है या उसकी पैकिंग 30 मिलीलीटर या उससे छोटी है, तो उस पर यह नियम लागू नहीं होगा।
यानी सभी कफ सिरप इस श्रेणी में नहीं आएंगे, बल्कि केवल तय मानकों वाली दवाओं पर ही यह नियम लागू होगा।
Schedule H1 क्या है?
Schedule H1 ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत बनाई गई दवाओं की एक खास श्रेणी है।
इसमें ऐसी दवाएं रखी जाती हैं जिनका गलत इस्तेमाल होने का खतरा ज्यादा होता है। इन दवाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं खरीदा जा सकता।
मेडिकल स्टोर को इन दवाओं की बिक्री का रिकॉर्ड भी तय समय तक सुरक्षित रखना होता है।
इससे जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियां यह पता लगा सकती हैं कि दवा किसे और कब बेची गई थी।
मेडिकल स्टोर और कंपनियों पर भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
नए नियम लागू होने के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों को दवा बेचते समय डॉक्टर की पर्ची देखनी होगी।
बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा बेचने पर कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा कंपनियों को भी दवा की बोतल पर जरूरी चेतावनी लिखनी होगी, ताकि लोग इसके गलत इस्तेमाल से बच सकें।
सरकार ने Schedule K के तहत मिलने वाली कुछ छूट भी खत्म कर दी है। इससे इन दवाओं की सप्लाई और बिक्री पर पहले से ज्यादा निगरानी रखी जाएगी।
नए नियम कब से लागू होंगे?
सरकार ने इस नियम का मसौदा अक्टूबर 2025 में जारी किया था। इसके बाद लोगों और संबंधित संस्थाओं से सुझाव और आपत्तियां मांगी गईं।
तय समय में कोई बड़ी आपत्ति नहीं मिलने पर दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड की सहमति से नियम को अंतिम मंजूरी दे दी गई।
सरकारी गजट में अधिसूचना प्रकाशित होने के छह महीने बाद यह नियम पूरे देश में लागू होगा।
माना जा रहा है कि जनवरी 2027 से नई व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी।
इस दौरान दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोरों को नए नियमों के अनुसार अपनी तैयारी पूरी करने का समय मिलेगा।
क्या होगा इसका फायदा?
सरकार का मानना है कि इस फैसले से अल्कोहल वाली दवाओं का गलत इस्तेमाल कम होगा।
बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवाएं खरीदना आसान नहीं रहेगा। साथ ही बिक्री का रिकॉर्ड रखने से अवैध कारोबार और तस्करी पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
इससे जरूरतमंद मरीजों को सही तरीके से दवा मिलेगी और दवाओं के दुरुपयोग पर नियंत्रण किया जा सकेगा।

