Saturday, July 25, 2026

असम में हर साल क्यों आती बाढ़, सिर्फ बारिश नहीं, कई वजहें हैं जिम्मेदार

असम में हर साल क्यों आती बाढ़: असम एक बार फिर भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण राज्य के कई जिले जलमग्न हो गए हैं। लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और कई लोगों की जान जा चुकी है।

राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और वायुसेना लगातार अभियान चला रही हैं। लेकिन हर साल मानसून में एक ही सवाल सामने आता है कि आखिर असम में बाढ़ इतनी विनाशकारी क्यों होती है?

क्या इसकी वजह केवल बारिश है या इसके पीछे ब्रह्मपुत्र नदी की बनावट, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय बदलाव और सीमा पार होने वाली गतिविधियां भी भूमिका निभाती हैं?

ब्रह्मपुत्र नदी असम की जीवनरेखा भी है और सबसे बड़ी चुनौती भी

असम में हर साल क्यों आती बाढ़: असम की बाढ़ को समझने के लिए सबसे पहले ब्रह्मपुत्र नदी को समझना जरूरी है। यह नदी तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के नाम से निकलती है।

इसके बाद यह अरुणाचल प्रदेश में सियांग के नाम से प्रवेश करती है और फिर असम से होकर बांग्लादेश की ओर बहती है।

असम में पहुंचने तक इस नदी में 50 से ज्यादा बड़ी और छोटी सहायक नदियां मिल जाती हैं। इनमें सुबनसिरी, मानस, जिया भराली, धानसिरी और कोपिली जैसी नदियां शामिल हैं।

मानसून के दौरान इन सभी नदियों का पानी एक साथ ब्रह्मपुत्र में पहुंचता है, जिससे नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ जाता है।

नदी में जमा होने वाली गाद बढ़ाती है बाढ़ का खतरा

असम में हर साल क्यों आती बाढ़: ब्रह्मपुत्र की एक खास बात यह है कि यह अपने साथ बड़ी मात्रा में रेत, मिट्टी और पत्थरों का मलबा भी लेकर चलती है। हिमालय में लगातार होने वाले कटाव के कारण यह गाद नदी में आती रहती है।

समय के साथ यह गाद नदी के तल में जमा हो जाती है। इससे कई हिस्सों में नदी उथली हो जाती है और उसमें पानी संभालने की क्षमता कम हो जाती है।

जब तेज बारिश होती है तो नदी अतिरिक्त पानी को रोक नहीं पाती और किनारों से बाहर निकलकर आसपास के गांवों और शहरों में फैल जाती है।

जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और गंभीर बनाया

असम में हर साल क्यों आती बाढ़: विशेषज्ञों के अनुसार पहले भी असम में बाढ़ आती थी, लेकिन अब उसकी तीव्रता और बार-बार आने की घटनाएं बढ़ गई हैं।

इसकी सबसे बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है।

पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी हिमालय में अब कम समय के भीतर बहुत अधिक बारिश होने लगी है।

ऐसी स्थिति में नदियों और जल निकासी व्यवस्था पर अचानक बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है।

कई बार कुछ घंटों की बारिश ही बड़े इलाके को जलमग्न कर देती है।

इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते कटाव के कारण हर साल पहले से ज्यादा गाद ब्रह्मपुत्र में पहुंच रही है।

इससे नदी का रास्ता बदलता रहता है और किनारों का कटाव भी लगातार बढ़ता है।

हर साल हजारों परिवारों को छोड़ना पड़ता है अपना घर

असम में हर साल क्यों आती बाढ़: असम में नदी किनारे रहने वाले हजारों परिवार हर साल कटाव की वजह से अपनी जमीन और मकान खो देते हैं।

मजबूरी में कई लोग नदी के बीच बनने वाले छोटे-छोटे द्वीपों, जिन्हें ‘चार’ कहा जाता है, वहां जाकर बस जाते हैं।

लेकिन अगली बाढ़ आने पर सबसे पहले यही इलाके पानी में डूब जाते हैं।

इस वजह से लोगों को बार-बार विस्थापन का सामना करना पड़ता है और उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर होती जाती है।

सिर्फ प्राकृतिक कारण नहीं, इंसानी गतिविधियां भी जिम्मेदार

असम में हर साल क्यों आती बाढ़: विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ के लिए केवल प्रकृति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इंसानी गतिविधियों ने भी इस समस्या को काफी बढ़ा दिया है।

राज्य में कई आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) पर अतिक्रमण हुआ है। बड़ी संख्या में जंगलों की कटाई होने से बारिश का पानी सीधे नदियों में पहुंच जाता है।

वहीं कई पुराने तटबंध अब कमजोर हो चुके हैं और भारी दबाव पड़ने पर टूट जाते हैं।

इसके अलावा ब्रह्मपुत्र लगातार अपना रास्ता बदलती रहती है। ऐसे में केवल तटबंध बनाकर

इस नदी को पूरी तरह नियंत्रित करना आसान नहीं माना जाता।

वैज्ञानिक प्रबंधन पर बढ़ रहा है जोर

असम में हर साल क्यों आती बाढ़: विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने होंगे।

इसके लिए नदी बेसिन का बेहतर प्रबंधन, आर्द्रभूमियों का संरक्षण, बाढ़ संभावित इलाकों की सही योजना,

आधुनिक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली और गांव स्तर तक समय पर चेतावनी पहुंचाना बेहद जरूरी है। इन उपायों से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

असम ने पहले भी देखी हैं कई बड़ी बाढ़

असम में हर साल क्यों आती बाढ़: असम में बाढ़ का इतिहास काफी पुराना है। कई साल ऐसे रहे हैं जब राज्य को भारी तबाही का सामना करना पड़ा।

साल 1988 की बाढ़ सबसे भीषण आपदाओं में गिनी जाती है, जिसमें 500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। 1998 में भी बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई।

साल 2004 में करोड़ों लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। इसे राज्य की सबसे बड़ी मानवीय आपदाओं में शामिल किया जाता है।

इसके बाद 2012 की बाढ़ में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में भी कई वन्यजीवों की जान गई।

2019 में लाखों लोग बाढ़ की चपेट में आए, जबकि 2022 की बाढ़ ने राज्य के अधिकांश जिलों को प्रभावित किया। उस दौरान सिलचर शहर में भी गंभीर शहरी बाढ़ देखने को मिली थी।

अब 2026 में भी असम एक बार फिर बड़े संकट का सामना कर रहा है। राहत एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं, लेकिन कई इलाकों में हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

क्या असम में बाढ़ का स्थायी समाधान संभव है?

असम में हर साल क्यों आती बाढ़: विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल और लगातार अपना रास्ता बदलने वाली नदी को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं है।

इसी वजह से अब केवल बाढ़ रोकने के बजाय उसके प्रभाव को कम करने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

मजबूत तटबंध, बेहतर जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और समय पर चेतावनी प्रणाली ही सबसे प्रभावी उपाय माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि असम को ऐसी योजनाएं बनानी होंगी जिनसे लोग बाढ़ के साथ सुरक्षित तरीके से जीवन जी सकें। क्योंकि ब्रह्मपुत्र सदियों से इस राज्य की खेती, संस्कृति और भूगोल का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

चीन की परियोजना को लेकर क्यों बनी रहती है चिंता?

असम में हर साल क्यों आती बाढ़: असम की बाढ़ के साथ एक और मुद्दा अक्सर चर्चा में रहता है। यह है तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन का प्रस्तावित मेगा जलविद्युत परियोजना।

सूत्रों के हवाले से बताया जाता है कि भारत ने समय-समय पर इस परियोजना को लेकर चिंता जताई है।

भारत का मानना है कि नदी के ऊपरी हिस्से में बनने वाली बड़ी परियोजनाओं का असर नदी के प्राकृतिक बहाव, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन पर पड़ सकता है।

हालांकि चीन का कहना है कि यह रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है और इससे नदी के सामान्य प्रवाह में बड़ा बदलाव नहीं होगा।

इसके बावजूद भारत लगातार हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने और परियोजना में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग करता रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में नदी के ऊपरी हिस्से में पानी के प्रवाह या डिस्चार्ज के तरीके में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो उसका प्रभाव असम के जल प्रबंधन और बाढ़ की स्थिति पर पड़ सकता है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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