Saturday, November 7, 2026

दीपावली 2026: धनतेरस से भाईदूज तक पाँचों पर्वों के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, करें राशि अनुसार खरीदारी

दीपावली के पंच पर्वों, लक्ष्मी पूजा, मुहूर्त्त और विधि की सभी जानकारी जानें यहाँ पर

इस साल दीपावली पर्व को लेकर देश में मतभेद नहीं है। इसे लेकर रिपोर्ट भारत ने सर्वेश्वर जयादित्य पंचांग के संपादक पं. अमित शर्मा और मुदित मित्तल से बात की ताकि दीपावली के पाँचों पर्वों को लेकर कोई भ्रम न रहे। इस लेख में हम बात करेंगे कि पाँचों त्यौहार और किस दिन हैं, मुहूर्त्त कब है और उस दिन क्या क्या करना चाहिए।

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धनतेरस – 6 नवंबर 2026
रूप चतुर्दशी – 7 नवंबर 2026
दीपावली – 8 नवंबर 2026
गोवर्धन – 9 नवंबर 2026
भाईदूज – 10 नवंबर 2026

6 नवंबर: धनतेरस को ये रहेंगे शुभ मुहूर्त्त, राशि के अनुसार करें खरीदारी

पाँच दिनों का महापर्व दीपावली इस बार 6 नवंबर को धनतेरस के साथ शुरू हो रहा है। बाजार सज चुके हैं, इसी के साथ त्यौहार की खरीदारी चल रही है। इस बार दीपावली पर 8 नवंबर तक राशि के अनुसार खरीदारी भी शुभ मानी जाती है।

6 नवंबर को 10:37 तक द्वादशी तिथि है, इसके बाद त्रयोदशी तिथि है जो प्रदोष काल में रहेगी, इसलिए इस साल इसी दिन धनतेरस मनाई जाएगी। धनतेरस (6 नवंबर) के दिन दीपावली की खरीदारी का सबसे बम्पर मुहूर्त्त है। इस बार धनतेरस को पूरे दिन हस्त नक्षत्र का शुभ योग बन रहा है।

धनतेरस के दिन सोने-चाँदी के जेवर और सिक्के खरीदे जाते हैं जो समृद्धि बढ़ाते हैं, बर्तन और अनाज खरीदे जाते हैं जिससे खानपान में कमी नहीं आती, जमीन, वाहन और गैजेट्स खरीदे जाते हैं जो सम्पन्नता को दर्शाते हैं, हल्दी और खड़ा धनिया भी खरीदा जाता है जिससे स्वास्थ्य बढ़ता है, इसके साथ साथ झाड़ू भी खरीदी जाती है क्योंकि इसी से सफाई और शुद्धता आती है। इसके साथ ही तमाम चीजों की खरीदारी इस दिन की जाती है क्योंकि ये बेहद शुभ होता है।

धनतेरस के दिन मांगलिक वस्तुओं को जरूर खरीदा जाता है, क्योंकि ये हमारे सौभाग्य को बढ़ाती हैं। कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्रमंथन के दौरान माता लक्ष्मी और धन्वंतरि एक साथ प्रकट हुए थे। तब से यह तिथि भारत में लक्ष्मी पूजा और चिकित्सक दिवस के रूप में मनाई जाती है। श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कंध के आठवें अध्याय में यह कथा आई है। इसलिए इस दिन प्रदोषकाल में दीपक जलाकर लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है।

धनतेरस लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त्त –
प्रदोषकाल – 17:35 – 19:59

धनतेरस खरीदारी के मुहूर्त्त –
विशेष मुहूर्त्त
अभिजीत मुहूर्त्त : 11:46 – 12:30 तक
गोधूलि मुहूर्त्त : 17:23 – 17:47 तक
इसमें सोने चाँदी, बर्तन, वाहन की सभी तरह की खरीदारी शुभ रहेगी।
लग्न मुहूर्त्त
स्थिर लग्न:
कुम्भ : 13:38 – 15:07 तक
वृष : 18:11 – 20:07 तक

अगर आपको लंबे समय तक चलने वाली सोना, चाँदी, जमीन, वाहन जैसी स्थिर वस्तुएं खरीदनी हैं तो इस लग्न में खरीद सकते हैं।

जयादित्य पंचांग के सम्पादक ज्योतिषाचार्य मुदित मित्तल के अनुसार अगर धनतेरस के दिन आप अपनी राशि के अनुसार आप खरीददारी करते हैं तो अपनी कुंडली के ग्रहों के शुभ फल भी प्राप्त कर सकते हैं।

अपनी राशि और लग्न के अनुसार करें ये खरीदारी-

मेष – मेष राशि और लग्न के जातकों को इस दिन चाँदी, सोना, माणिक्य, पुखराज, मूंगा, तांबे या मिट्टी का कलश और दीपक खरीदने चाहिए। पीली और लाल रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
वृष – वृष राशि और लग्न के जातकों को इस दिन चाँदी का सिक्का, चेन, पन्ना, हीरा, नीलम, कपड़े, चीनी, घी, बहीखाता और पेन खरीदना चाहिए। सफेद और हरे रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
मिथुन – मिथुन राशि और लग्न के जातकों को इस दिन ज्वैलरी, कॉस्मेटिक्स, पीतल के बर्तन, हीरा, पन्ना, नीलम, कपड़े, फल, हरी मूंग, गैजेट्स खरीदना चाहिए। नीले, हरे और सफेद रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
कर्क – कर्क राशि और लग्न के जातकों को इस दिन चाँदी का सिक्का, मोतियों की माला, जमीन, पौधे, दूध, किताबें, मूंगा और पुखराज खरीदना चाहिए। सफेद और पीले रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
सिंह – सिंह राशि और लग्न के जातकों को इस दिन सोने की ज्वैलरी, सिक्का, बहीखाते, धार्मिक पुस्तक, तांबे के बर्तन, वाहन, गैजेट्स, गेंहू, जौ, पुखराज या मूंगा खरीदना चाहिए। पीली और लाल रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
कन्या – कन्या राशि और लग्न के जातकों को इस दिन ज्वैलरी, कॉस्मेटिक्स, चाँदी की गाय, हीरा, फल, हरी मूंग, पन्ना, नीलम, कपड़े, गैजेट्स खरीदना चाहिए। नीले, हरे और सफेद रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
तुला – तुला राशि और लग्न के जातकों को इस दिन चाँदी का सिक्का, कड़ा, पन्ना, हीरा, नीलम, ऑफिस का सामान, चीनी, घी, बहीखाता, पेन, कपड़े, झाड़ू खरीदना चाहिए। सफेद और हरे रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
वृश्चिक – वृश्चिक राशि और लग्न के जातकों को इस दिन चाँदी, सोना, माणिक्य, पुखराज, मूंगा, चाँदी या मिट्टी का कलश, गुड़, धनिया और दीपक खरीदने चाहिए। पीली और लाल रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
धनु – धनु राशि और लग्न के जातकों को इस दिन सोने की ज्वैलरी, मूंगा, पुखराज, माणिक्य, हल्दी, चने की दाल, तांबे के बर्तन खरीदने चाहिए। पीली और लाल रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
मकर – मकर राशि और लग्न के जातकों को इस दिन चाँदी सोने के सिक्के, कॉस्मेटिक्स, अनाज, हीरा, पन्ना, नीलम, कपड़े, दूध, मिठाई खरीदनी चाहिए। सफेद, हरी और नीले रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
कुम्भ – कुम्भ राशि और लग्न के जातकों को इस दिन चाँदी सोने के गहने, कॉस्मेटिक्स, मशीन, हीरा, पन्ना, नीलम, कपड़े, मिट्टी का कलश खरीदना चाहिए। सफेद, हरी और नीले रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।
मीन – मीन राशि और लग्न के जातकों को इस दिन चाँदी की ज्वैलरी, मूंगा, मोती, माणिक्य, हल्दी, चने की दाल, चाँदी और मिट्टी के बर्तन खरीदने चाहिए। पीली, सफेद और लाल रंग की चीजें खरीदना शुभ रहेगा।

7 नवंबर: धन्वन्तरि जयन्ती

धन्वन्तरि जयन्ती 19 नवंबर को होने से इस दिन भी खरीदारी के अच्छे मुहूर्त्त रहेंगे।
धन्वन्तरि पूजा मुहूर्त्त
धनु लग्न: 09:46 – 11:50 तक
खरीदारी मुहूर्त्त–

7 नवंबर: रूप चतुर्दशी

7 नवंबर शनिवार को सायंकाल चतुर्दशी में नरक चतुर्दशी या रूप चौदस होगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के दैत्य का वध किया था। दरवाजे के बाहर सूर्यास्त के बाद चार बत्तियों वाला दीपक जलाया जाता है, जिससे नरक नहीं जाना पड़ता। रूप चौदस पर उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है।

नरक निमित्त चौमुखा दीपदान का मुहूर्त्त –
शाम 05:35 – 07:59

8 नवंबर: दीपावली लक्ष्मीपूजन के मुहूर्त्त

इस साल दीपावली 8 नवंबर 2026, रविवार को है। 8 नवंबर को प्रातः 10:21 बजे अमावस्या शुरू हो जाएगी, इसके बाद प्रदोषकाल व मध्यरात्रि में अमावस्या होने से आज ही के दिन दीपावली और लक्ष्मीपूजन किया जाएगा।

जयादित्य पंचांग के संपादक पं अमित शर्मा ने बताया कि दीपावली में लक्ष्मी पूजा के 3 काल सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं – प्रदोषकाल, वृष लग्न और सिंह लग्न। सूर्यास्त के 72 मिनट बाद तक प्रदोषकाल होता है, लगभग इसी समय में वृष लग्न आता है और ढलती रात में सिंह लग्न आता है। प्रदोषकाल और वृष लग्न में पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त्त होता है। लक्ष्मीपूजा के मुहूर्त्त निम्न हैं-

दीपावली के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त्त

शाम 06:06 से 07:58 तक
(इस समय प्रदोषकाल और वृष लग्न दोनों रहेंगे)
शाम 06:17 से 06:28 तक
(इस समय स्थिर वृष लग्न में स्थिर सिंह नवांश रहेगा)
शाम 06:53 से 07:05 तक
(इस समय स्थिर वृष लग्न में स्थिर वृष नवांश रहेगा)

रात्रि में लक्ष्मीपूजा के सारे श्रेष्ठ मुहूर्त्त

प्रदोष काल – शाम 05:34 से 07:58 तक

शाम के समय स्थिर लग्न वृष – शाम 06:06 से 08:02 तक

मध्यरात्रि के समय स्थिर लग्न सिंह – अर्धरात्रि 00:36 से 02:53 तक

निशीथ मुहूर्त्त – रात 11:42 से 00:35 तक

दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पूजा के लिए दिन के श्रेष्ठ मुहूर्त्त

विशेष मुहूर्त्त
अभिजीत मुहूर्त्त : 11:46 – 12:30 तक

दिन के लग्न मुहूर्त्त
कुम्भ लग्न : दोपहर 01:35 से 03:04 तक
मीन लग्न: दोपहर 03:04 से 04:30 तक

08 नवंबर: कार्त्तिक अमावस्या

08 नवंबर रविवार को अमावस्या तिथि दोपहर 10:21 बजे आरम्भ होगी। इस दिन पितरों का श्राद्ध एवं दान पुण्य करना चाहिए। दोपहर में अमावस्या इसी दिनी होने से श्राद्ध भी 8 नवंबर को ही होगा।

09 नवंबर: गोवर्धन अन्नकूट महोत्सव

09 नवंबर सोमवार को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन अन्नकूट गोवर्द्धन पूजा होगी। भगवान कृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाएं। 09 नवंबर को प्रातः 11:00 बजे से ही प्रतिपदा शुरू हो जाएगी, अमावस्या युक्त प्रतिपदा में ही गोवर्धन महोत्सव मनाया जाता है, अतः इसी दिन गोवर्धन पूजा होगी।

10 नवंबर: भाईदूज

10 नवंबर मंगलवार को भाई दूज या यमद्वितीया मनाई जाएगी। इस दिन बहन भाई का तिलक करती है और भाई बहन के घर भोजन करते हैं। आज यमतर्पण, चित्रगुप्त सहित यमपूजन, यमुनास्नान, का भी किया जाता है। द्वितीया दोपहर 12:07 बजे से है, इसलिए इसके बाद पूरे दिन भाईदूज मनाई जाएगी।

यह सामग्री और पुष्प हैं लक्ष्मी माता को विशेष प्रिय

पूजा सामग्री – धूप, घी का दीपक, नैवेद्य, ऋतुफल, वस्त्र, रोली, चन्दन, मिठाई, लाजा, पंचामृत, नारियल, गन्ना, अनार, केला, कपूर, माला, चाँदी का सिक्का
लक्ष्मी जी को प्रिय पत्र पुष्प – बेलपत्र, तुलसी, केले के पत्ते, कमल, कनेर, जाती, चम्पा, जूही, मालती, पारिजात
लक्ष्मी प्राप्ति हेतु हवन में कमल, बेलफल, त्रिमधुर (गुड़-नारियल-केला), सूखा खीर तथा तिल का प्रयोग किया जाता है।
आम, बेल, अनार की लकड़ी पर हवन करने से विशेष लाभ होता है।
अशोक की लकड़ी पर लक्ष्मी मन्त्र से हवन करने से राज्य समृद्धि मिलती है।
विष्णु मंदिर में बेलवृक्ष के नीचे बैठकर लक्ष्मी की पूजा करने से तत्काल लाभ मिलता है।
दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ, विष्णु जी, गणेश जी, सरस्वती जी, कुबेर और इन्द्र की पूजा भी करनी चाहिए।
लक्ष्मी प्रार्थना का मंत्र है –
नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये।
या गतिः त्वत् प्रपन्नानां सा मे भूयात् त्वदर्चनात्।।
लक्ष्मी जी को सागर से उत्पन्न होने के कारण सिन्धुजा, सागर सम्भवा, आर्द्रा, नमिता भी कहते हैं। लक्ष्मी जी की आराधना के लिए 27 मन्त्रों वाले श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए। यह सर्वोत्तम विधान है।
लक्ष्मी प्राप्ति के लिए विविध मंत्र
यह हैं आपके लिए विद्वानों द्वारा बताए गए महालक्ष्मी के कुछ मन्त्र जिनसे कम समय में ज्यादा लाभ उठाया जा सकता है-

  1. एकाक्षर मन्त्र – ” श्रीं ” (श्रीम् )
  2. चतुरक्षर मन्त्र – एम् श्रीम् ह्रीं क्लीम्
  3. दशाक्षर मन्त्र – नमः कमलवासिन्यै स्वाहा
  4. द्वादशाक्षर मन्त्र – एम् ह्रीं श्रीम् क्लीम् सौं जगत्प्रसूत्यै नमः
  5. 27 अक्षर मन्त्र – ॐ श्रीम् ह्रीं श्रीम् कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीम् ह्रीं श्रीम् महालक्ष्म्यै नमः
  6. लक्ष्मी जी की आरती
  7. ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
    तुम को निशदिन सेवत मैयाजी को निस दिन सेवत
    हर विष्णु विधाता । ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
    उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता । ओ मैया तुम ही जग माता ।
    सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता, ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
    दुर्गा रूप निरंजनि सुख सम्पति दाता, ओ मैया सुख सम्पति दाता ।
    जो कोई तुम को ध्यावत ऋद्धि सिद्धि धन पाता, ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
    तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता, ओ मैया तुम ही शुभ दाता ।
    कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भव निधि की दाता, ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
    जिस घर तुम रहती तहँ सब सद्गुण आता, ओ मैया सब सद्गुण आता ।
    सब संभव हो जाता मन नहीं घबराता, ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
    तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता, ओ मैया वस्त्र न कोई पाता ।
    खान पान का वैभव सब तुम से आता, ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
    शुभ गुण मंदिर सुंदर क्षीरोदधि जाता, ओ मैया क्षीरोदधि जाता ।
    रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता , ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
    महा लक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता, ओ मैया जो कोई जन गाता ।
    उर आनंद समाता पाप उतर जाता, ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
    पंचांग सम्बन्धी उपर्युक्त जानकारियाँ जयादित्य पंचांग, जयपुर से ली गई हैं।
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