Breast reduction surgery: पिछले कुछ वर्षों में ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी यानी स्तनों का आकार कम करने की सर्जरी को लेकर महिलाओं के बीच जागरूकता बढ़ी है।
पहले इसे केवल कॉस्मेटिक सर्जरी माना जाता था, लेकिन अब कई महिलाएं शारीरिक और मानसिक परेशानियों से राहत पाने के लिए भी इस प्रक्रिया का सहारा ले रही हैं।
मेडिकल भाषा में इसे रिडक्शन मैमोप्लास्टी कहा जाता है। इस सर्जरी में स्तनों के अतिरिक्त फैट,
टिश्यू और त्वचा को हटाकर उनका आकार शरीर के अनुपात में संतुलित किया जाता है, जिससे महिला को अधिक आरामदायक और प्राकृतिक महसूस हो सके।
जरूरत से ज्यादा बड़े ब्रेस्ट बन सकते हैं परेशानी की वजह
बड़े ब्रेस्ट कई महिलाओं के लिए सिर्फ दिखावे का विषय नहीं होते, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी में कई तरह की दिक्कतें पैदा कर सकते हैं।
लगातार गर्दन, कंधों और पीठ में दर्द रहना, त्वचा में जलन या रैशेज होना, सही फिटिंग के कपड़े न मिलना और शारीरिक गतिविधियों में असुविधा जैसी समस्याएं आम हैं।
इसके अलावा कई महिलाएं अपने शरीर को लेकर असहज महसूस करती हैं, जिससे आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है।
ऐसे मामलों में ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
कैसे की जाती है यह सर्जरी?
इस सर्जरी के दौरान डॉक्टर ब्रेस्ट के आसपास छोटा या बड़ा चीरा लगाकर अतिरिक्त टिश्यू, फैट और त्वचा को हटाते हैं।
इसके बाद बचे हुए हिस्से को नया आकार दिया जाता है, ताकि ब्रेस्ट अधिक संतुलित और प्राकृतिक दिखाई दें।
यह प्रक्रिया आमतौर पर जनरल एनेस्थीसिया के तहत की जाती है और इसमें कई घंटे लग सकते हैं। मरीज की उम्र, शरीर की बनावट और ब्रेस्ट के आकार के अनुसार सर्जरी की तकनीक तय की जाती है।
कुछ मामलों में पारंपरिक सर्जरी की जाती है, जबकि कुछ महिलाओं में लिपोसक्शन के जरिए अतिरिक्त फैट हटाया जाता है। इसके अलावा लॉलीपॉप टेक्नीक और फ्री निप्पल ग्राफ्ट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी जरूरत के अनुसार किया जा सकता है।
हर महिला के लिए नहीं होती यह सर्जरी
हालांकि ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी के कई फायदे हैं, लेकिन यह हर महिला के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती।
यदि किसी महिला को अनियंत्रित डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या कोई सक्रिय संक्रमण है, तो सर्जरी का जोखिम बढ़ सकता है।
धूम्रपान करने वाली महिलाओं में भी सर्जरी के बाद घाव भरने में अधिक समय लग सकता है।
वहीं गर्भवती महिलाओं या निकट भविष्य में प्रेग्नेंसी की योजना बना रही महिलाओं को अक्सर इस सर्जरी को कुछ समय के लिए टालने की सलाह दी जाती है।
सर्जरी से पहले और बाद में किन बातों का रखें ध्यान?
सर्जरी से पहले मरीज की पूरी मेडिकल जांच की जाती है, ताकि किसी भी संभावित जोखिम का आकलन किया जा सके।
कुछ दवाइयों को अस्थायी रूप से बंद करने की सलाह दी जा सकती है और धूम्रपान छोड़ने की भी सलाह दी जाती है।
सर्जरी के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक सूजन, हल्का दर्द और थकान महसूस होना सामान्य माना जाता है।
अधिकतर महिलाएं करीब दो हफ्तों में अपने सामान्य कामकाज शुरू कर सकती हैं, लेकिन पूरी तरह रिकवरी होने में कई महीने लग सकते हैं।
इस दौरान डॉक्टर की सलाह का पालन करना और नियमित फॉलो-अप कराना बेहद जरूरी होता है।
क्या यह पूरी तरह सुरक्षित है?
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी के कई फायदे हो सकते हैं। इससे गर्दन और पीठ के दर्द में राहत मिल सकती है,
शरीर का पोस्चर बेहतर हो सकता है और व्यायाम या अन्य शारीरिक गतिविधियां करना आसान हो जाता है।
कई महिलाओं में इस सर्जरी के बाद आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
हालांकि किसी भी दूसरी सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ जोखिम मौजूद रहते हैं। संक्रमण, ब्लीडिंग,
निशान पड़ना, ब्रेस्ट की संवेदनशीलता में बदलाव या घाव भरने में अधिक समय लगना जैसी समस्याएं कुछ मामलों में देखने को मिल सकती हैं।
इसलिए ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी करवाने का फैसला लेने से पहले किसी अनुभवी डॉक्टर से पूरी जानकारी लेना।
फायदे-नुकसान को अच्छी तरह समझना बेहद जरूरी है, ताकि यह निर्णय आपकी सेहत और जरूरतों के हिसाब से सही साबित हो सके।

