बंगाल में सियासी तापमान गरम: पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर मार्च 2026 में चुनाव प्रस्तावित हैं।
यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला मुकाबला माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चौथी बार सरकार बनाने की कोशिश में जुटी हैं, जबकि बीजेपी लंबे समय से बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए जमीन तैयार कर रही है
भगवा पार्टी हर उस मुद्दे को हवा दे रही है, जो उसे चुनावी फायदा दिला सकता है।
टीएमसी अकेले मैदान में, विपक्ष की नई हलचल
बंगाल में सियासी तापमान गरम: ममता बनर्जी के रुख से साफ है कि टीएमसी इस बार भी बिना किसी गठबंधन के चुनाव लड़ेगी।
दूसरी तरफ बीजेपी, लेफ्ट और कांग्रेस नए समीकरण बनाने और रणनीतियों को धार देने में लगे हुए हैं।
बीजेपी पहले ही यह संकेत दे चुकी है कि 2026 का चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जाएगा और अब उसी के अनुसार मैदान में उतर चुकी है।
‘मस्जिद बनाम गीता पाठ’: बंगाल का नया राजनीतिक नैरेटिव
बंगाल में सियासी तापमान गरम: चुनाव से पहले बंगाल का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है।
7 दिसंबर को टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में अयोध्या की बाबरी मस्जिद के मॉडल पर आधारित मस्जिद की आधारशिला रखी।
इसके ठीक अगले दिन यानी 8 दिसंबर को कोलकाता के परेड ग्राउंड में पांच लाख से अधिक लोगों ने सामूहिक गीता पाठ किया।
यह कार्यक्रम 2023 में हुए ‘एक लाख आवाज़ों की गीता’ कार्यक्रम का विस्तृत रूप था। इस बार ‘पांच लाख आवाज़ों से गीता पाठ’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी।
आयोजन का लक्ष्य बंगाल की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक एकता को सामने लाना बताया गया।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान से बढ़ी सियासी तपिश
बंगाल में सियासी तापमान गरम: आध्यात्मिक कार्यक्रम में बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री भी शामिल हुए।
उन्होंने कहा—“कोलकाता में पांच लाख लोगों द्वारा गीता पाठ ऐसा लग रहा है जैसे महाकुंभ लग गया हो।
भारत में हम सनातनी चाहते हैं, तनातनी नहीं… हम ‘भगवा-ए-हिंद’ चाहते हैं, ‘गजवा-ए-हिंद’ नहीं।”
शास्त्री के इन बयानों ने कार्यक्रम को धार्मिक-सांस्कृतिक से ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया। इस आयोजन में केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार, सुवेंदु अधिकारी, लॉकेट चटर्जी जैसे कई बड़े बीजेपी नेता मौजूद थे।
2026 चुनाव में बीजेपी का फोकस: हिंदुत्व की पुनरावृत्ति
बंगाल में सियासी तापमान गरम: बीजेपी बंगाल में 2016 में सिर्फ 6 सीटें जीत पाई थी। लेकिन 2021 के चुनाव में हिंदुत्व के मुद्दे के आधार पर 77 सीटें लेकर चौंकाने वाला प्रदर्शन किया।
यही कारण है कि बीजेपी 2026 में भी हिंदुत्व को मुख्य चुनावी थीम बनाकर माहौल अपने पक्ष में बनाने की कोशिश में है।
गीता पाठ और आध्यात्मिक कार्यक्रम इसी चुनावी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
मस्जिद शिलान्यास, टीएमसी के लिए चुनौती या बीजेपी के लिए मौका?
बंगाल में सियासी तापमान गरम: हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मस्जिद की नींव रखी। वही तारीख जब 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी।
कार्यक्रम में हजारों लोग ईंटें और दान लेकर पहुंचे। नारे लगे—“अल्लाहु अकबर” और “नारा-ए-तकबीर”।
टीएमसी ने कबीर पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया है।
हालांकि बीजेपी का निशाना कबीर नहीं, बल्कि सीधा ममता बनर्जी और टीएमसी है। बीजेपी का आरोप है कि ममता राज्य का माहौल सांप्रदायिक बना रही हैं।
इसके उलट बीजेपी मस्जिद विवाद पर ज्यादा मुखर नहीं हो रही, बल्कि गीता पाठ जैसे कार्यक्रमों को केंद्र में रखकर हिंदू वोटबैंक मजबूत करने पर फोकस कर रही है।
बीजेपी की ‘ग्राउंड स्क्रिप्ट’: हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण पर स्पष्ट दांव
बंगाल के राजनीतिक मैदान में अब यह साफ नजर आ रहा है कि बीजेपी की रणनीति पूरी तरह दो ध्रुवों पर आधारित है—
मस्जिद का मुद्दा, जिसे टीएमसी से जोड़कर पेश किया जा रहा है
गीता पाठ और आध्यात्मिक कार्यक्रम, जिनके सहारे हिंदुत्व वोट को संगठित किया जा रहा है
बीजेपी के संदेश का सार यही है कि 2026 का चुनाव ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’ नैरेटिव पर केंद्रित रहेगा।
निर्णायक लड़ाई की ओर बढ़ता बंगाल
बंगाल में सियासी तापमान गरम: बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। टीएमसी जहां सत्ता बचाने की लड़ाई लड़ रही है, वहीं बीजेपी उसे चुनौती देने के लिए धार्मिक-सांस्कृतिक अभियानों से लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक हर दांव आजमा रही है।
हुमायूं कबीर की मस्जिद और गीता पाठ का आयोजन आने वाले महीनों में बंगाल की राजनीतिक हवा को और तेज करेगा।
2026 का विधानसभा चुनाव सिर्फ सत्ता का मुकाबला नहीं—एक गहरी वैचारिक लड़ाई बनता जा रहा है, जिसमें दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्क्रिप्ट के हिसाब से जनता को साधने में जुटे हैं।

