बिहार विधानसभा चुनाव 2025: बिहार राज्य की 243 सीटों वाली विधानसभा चुनाव के नतीजें आ चुके हैं जिनमें एनडीए गठबंधन को 202 सीटों से प्रचंड जीत मिली है, और महागठबंधन की सरकार ने केवल 35 सीटें जीतकर करारी मात खायी है।
एनडीए की इस जीत के बाद बिहार राजनीति में हलचल सी मच गई है। बताया जा रहा है कि बिहार के सीएम कौन होंगे इस बात पर अभी तक सस्पेंस बना हुआ है।
एक इंटरव्यू में बिहार चुनाव के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि बिहार के सबसे बड़े नेता नितीश कुमार है। और मंत्रियों का फैसला नई सरकार करेगी।
बिहार चुनाव का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के मतदान 6 और 11 नवम्बर के पहले और दूसरे चरण में हुए, जिनके नतीजें 14 नवंबर को घोषित किये गए।
जानकारी के मुताबिक, बिहार में 67.13% मतदाताओं ने मतदान किया जिनमें से महिलाओं ने 71.6% मतदान किया और पुरुषों ने 62.8% मतदान किया, जो कि एक बड़ा ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताया जा रहा है।
बिहार विधानसभा मतगणना सीटों का परिणाम
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: विधानसभा सीटों की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी को 89, नितीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड को 85, चिराग पासवान की एलजेपी-आरवी पार्टी को 19, महागठबंधन को 35, राष्ट्रीय जनता दल को 25 और कांग्रेस पार्टी को 6 सीटें मिली है।
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी जिसे त्रिकोणीय मुकाबले में देखा जा रहा था वो तो, इस चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सकी।
विधानसभा चुनाव वोटों का प्रतिशत
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव में वोटों का प्रतिशत एनडीए का 46.52%, वहीं महागठबंधन का 37.64%, भारतीय जनता पार्टी का 20.08%, जेडीयू का 19.26%, एलजेपी का 4.97%, HAM का 1.18%, आरएलएम का 1.03%, आरजेडी का 23%, कांग्रेस का 8.71%, वामपंथी दल का 4.18%, वीआईपी का 1.38%, आईआईपी का 0.37% रहा।
नितीश कुमार की सरकार की जीत की पांच बड़े कारण के कारण:-
- नितीश सरकार की योजनाएं- महिलाओं को पंचायतों में आरक्षण देना, सरकारी नौकरियों में कोटा देना, लड़कियों के लिए साइकिल उपलब्ध करवाना, सरकारी विद्यालयों में पोशाकें और छात्रवृत्ति उपलब्ध करवाना।
- वृद्धजन पेंशन योजना की राशि 400 से बढ़ाकर 1100 रूपये देना और घरेलु उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देना।
- पिछले 20 वर्षों से बिहार में अपनी सरकार का दबदबा कायम रखना और वहां की जनता के लिए सडकों और पुलों का निर्माण करवाना तथा जनता में अपना विश्वास और आश्वासन बनाये रखना।
- नितीश कुमार की सरकार की जीत का एक अहम् कारण ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का उम्मीदवार उतारना भी रहा है। इसके अलावा लोगों ने तेज प्रताप यादव पर भरोसा किया लेकिन तेज प्रताप यादव और उनके भाई तेजस्वी यादव के आपसी झगड़े के कारण उनके वोट दो हिस्सों में बँट गए, और ये भी उनकी हार में एक बड़ी वजह यही रही कि महुआ में मुसलमान और यादव के वोटों का बँटवारा हो गया।
- एक कारण ये भी रहा कि तेज प्रताप यादव महुआ की सिर्फ़ नौ पंचायतों में ही चुनावी कैंपेन करने पहुंचे थे, जबकि वहां 36 पंचायतें हैं, और उनकी कैंपेनिंग सही नहीं रही। इनके हार कि वज़ह एनडीए की जीत बनती गयी।

