पार्टनर को धोखा क्यों देते हैं लोग?
रिश्ता चाहे प्रेम का हो या शादी का, उसकी सबसे मजबूत नींव भरोसे पर टिकी होती है।
दो लोग जब एक-दूसरे के साथ जिंदगी बिताने का फैसला करते हैं तो उनके बीच सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि ईमानदारी, वफादारी और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।
ऐसे में जब किसी रिश्ते में शामिल व्यक्ति किसी तीसरे इंसान के करीब जाने लगता है, तो चोट सिर्फ पार्टनर को नहीं लगती, बल्कि उस भरोसे को भी लगती है जिस पर पूरा रिश्ता खड़ा था।
अक्सर धोखा देने के बाद एक बात सुनने को मिलती है—”बस गलती हो गई”, “उस वक्त समझ नहीं आया” या “हालात ऐसे बन गए थे।” लेकिन क्या बेवफाई वाकई अचानक होने वाली गलती है?
क्या कोई व्यक्ति एक पल में अपने रिश्ते की सीमाएं पार कर देता है, या उसके पीछे कई छोटे-बड़े फैसले, भावनात्मक जरूरतें और परिस्थितियां पहले से काम कर रही होती हैं?
रिलेशनशिप साइकोलॉजी में इस सवाल का कोई एक सीधा जवाब नहीं है।
उपलब्ध शोध यह जरूर बताता है कि बेवफाई को सिर्फ रिश्ते में असंतुष्टि से जोड़कर देखना काफी नहीं है। कई दूसरे मनोवैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य कारक भी किसी व्यक्ति के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
आखिर रिश्ते में चीटिंग किसे कहा जाता है?
बेवफाई यानी इन्फिडेलिटी का मतलब केवल किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाना नहीं है।
किसी रिश्ते की तय सीमाओं के बाहर जाकर किसी तीसरे व्यक्ति के साथ छिपकर भावनात्मक या रोमांटिक जुड़ाव बनाना भी बेवफाई का हिस्सा हो सकता है।
यही वजह है कि आज के दौर में चीटिंग की परिभाषा पहले से कहीं ज्यादा व्यापक हो गई है।
किसी के साथ गुप्त रोमांटिक चैट करना, लगातार भावनात्मक नजदीकी बढ़ाना, डेटिंग ऐप पर पार्टनर से छिपकर किसी दूसरे व्यक्ति की तलाश करना या ऐसा ऑनलाइन रिश्ता बनाना जिसे पार्टनर से जानबूझकर छिपाया जा रहा हो, ये सभी परिस्थितियां रिश्ते की तय सीमाओं के आधार पर इन्फिडेलिटी के दायरे में आ सकती हैं।
यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि “क्या शारीरिक संबंध बना?” बल्कि यह भी है कि “क्या पार्टनर से कुछ ऐसा छिपाया जा रहा था, जो उनके रिश्ते की सीमाओं का उल्लंघन करता है?”
क्या चीटिंग सच में अचानक हो जाती है?
“पता ही नहीं चला कब सब हो गया”—धोखा देने के बाद ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं।
लेकिन किसी व्यक्ति का व्यवहार केवल एक क्षण से तय नहीं होता।
इंपल्सिव बिहेवियर यानी बिना संभावित परिणामों के बारे में पर्याप्त सोचे तुरंत प्रतिक्रिया देना कुछ लोगों में जोखिम भरे फैसलों की संभावना बढ़ा सकता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इंपल्सिविटी किसी व्यक्ति को धोखा देने के लिए मजबूर कर देती है।
यहीं पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी की भूमिका सामने आती है। किसी को आकर्षक लगना एक बात है, उससे बातचीत करना दूसरी, बातचीत को छिपाना तीसरी और फिर उस रिश्ते को आगे बढ़ाना चौथी। इन सभी चरणों में व्यक्ति के पास फैसले लेने के मौके होते हैं।
इसलिए “गलती हो गई” कह देना पूरी कहानी नहीं बताता।
कई बार वह गलती एक लंबे सिलसिले का आखिरी कदम होती है, जिसकी शुरुआत शायद एक छिपी हुई चैट, लगातार बढ़ती नजदीकी या रिश्ते की सीमाओं को धीरे-धीरे नजरअंदाज करने से हुई हो।
क्या खुश रिश्तों में भी लोग पार्टनर को धोखा दे सकते हैं?
यह धारणा काफी आम है कि अगर कोई व्यक्ति अपने रिश्ते से खुश है तो वह कभी चीट नहीं करेगा। लेकिन रिसर्च इस तस्वीर को इतना सरल नहीं मानती।
2023 में Archives of Sexual Behavior में प्रकाशित एक अध्ययन ने ऐसे लोगों के अनुभवों को देखा जो एक्स्ट्राडायडिक यानी अपने मुख्य रिश्ते के बाहर संबंधों की तलाश कर रहे थे।
अध्ययन के निष्कर्षों ने इन्फिडेलिटी को लेकर कई आम धारणाओं को चुनौती दी।
प्रतिभागियों के अनुभवों में यह सामने आया कि अफेयर का अनुभव हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं था और कुछ लोगों ने अपने अफेयर से मिलने वाली भावनात्मक या यौन संतुष्टि के बारे में सकारात्मक अनुभव बताए।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर धोखेबाज व्यक्ति अपने रिश्ते से खुश होता है या उसे अपने किए पर पछतावा नहीं होता।
बल्कि इससे यह समझ आता है कि चीटिंग के पीछे सिर्फ एक कारण तलाशना मुश्किल है।
किसी व्यक्ति का रिश्ता बाहर से जितना अच्छा दिखाई देता है, उसके भीतर की भावनाएं उतनी ही अलग हो सकती हैं। और कभी-कभी समस्या रिश्ते में नहीं, बल्कि व्यक्ति की अपनी जरूरतों, अपेक्षाओं, आत्म-नियंत्रण या लगातार नए अनुभव की तलाश में भी हो सकती है।
फिर लोग अपने पार्टनर को धोखा क्यों देते हैं?
इस सवाल का सबसे ईमानदार जवाब है—हर व्यक्ति के लिए वजह अलग हो सकती है।
कुछ लोगों के लिए रिश्ते में भावनात्मक दूरी एक बड़ी वजह बन सकती है। कुछ लोग लगातार मिलने वाली तारीफ, आकर्षण या validation के पीछे जा सकते हैं।
कुछ मामलों में किसी तीसरे व्यक्ति के साथ अचानक बढ़ी नजदीकी भूमिका निभा सकती है, जबकि कुछ लोग केवल नएपन या रोमांच की तलाश में अपने मौजूदा रिश्ते की सीमाएं तोड़ सकते हैं।
कई बार अवसर भी महत्वपूर्ण होता है। किसी ऐसे व्यक्ति से बार-बार मिलना जिसके साथ भावनात्मक जुड़ाव बनने लगे, निजी बातें साझा करना और फिर उस नजदीकी को पार्टनर से छिपाना—ये छोटे कदम आगे चलकर बड़े विश्वासघात में बदल सकते हैं।
यानी चीटिंग का कारण हमेशा यह नहीं होता कि “रिश्ता खराब था।” कभी-कभी रिश्ता ठीक होने के बावजूद व्यक्ति अपने व्यवहार और इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाता।
क्या पुरुष और महिलाएं अलग-अलग वजहों से चीट करते हैं?
रिलेशनशिप रिसर्च में पुरुषों और महिलाओं की motivations में कुछ अंतर देखे गए हैं, लेकिन इन्हें हर व्यक्ति पर लागू करना सही नहीं होगा।
कुछ अध्ययनों में पुरुषों के बीच सेक्सुअल नॉवेल्टी या यौन जरूरतों से जुड़े कारणों का महत्व सामने आया है, जबकि महिलाओं के अनुभवों में भावनात्मक जुड़ाव और रिश्ते में असंतुष्टि जैसे कारण भी महत्वपूर्ण पाए गए हैं।
लेकिन आज के समय में “पुरुष इसलिए चीट करते हैं” या “महिलाएं इसलिए चीट करती हैं” जैसी सीधी लाइन खींचना वैज्ञानिक रूप से सही तस्वीर नहीं देता। वास्तविक जिंदगी में एक ही व्यक्ति के भीतर कई कारण एक साथ मौजूद हो सकते हैं—भावनात्मक जरूरत, आकर्षण, अवसर, असंतोष, validation की चाह या सिर्फ impulsive decision।
क्या रिश्ते में ज्यादा पावर होने से चीटिंग का खतरा बढ़ सकता है?
रिश्ते में पावर का संतुलन भी इस पूरी कहानी का एक दिलचस्प हिस्सा है।
2024 में Archives of Sexual Behavior में प्रकाशित एक रिसर्च ने देखा कि रिश्ते में खुद को अधिक शक्तिशाली महसूस करने का संबंध दूसरे संभावित पार्टनर्स में रुचि से किस तरह जुड़ सकता है।
अध्ययन में पाया गया कि ज्यादा relationship power महसूस करने वाले प्रतिभागियों में alternative partners को लेकर रुचि बढ़ सकती है। इसके पीछे एक संभावित कारण यह था कि व्यक्ति खुद को अपने पार्टनर की तुलना में अधिक desirable या “higher mate value” वाला महसूस करने लगे।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है—इस रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि ज्यादा पैसा, ज्यादा सफलता, ज्यादा लोकप्रियता या रिश्ते में ज्यादा प्रभाव रखने वाला हर व्यक्ति अपने पार्टनर को धोखा देगा।
रिसर्च ने power और alternative partners में interest के बीच संबंध को देखा है; इसे सीधे “पावरफुल लोग चीट करते हैं” के बराबर नहीं रखा जा सकता।
दरअसल, जब किसी व्यक्ति को यह लगने लगे कि उसके पास रिश्ते से बाहर भी कई विकल्प मौजूद हैं, तो कुछ परिस्थितियों में उसके भीतर मौजूदा रिश्ते के प्रति commitment कमजोर पड़ सकती है। लेकिन आखिरकार फैसला व्यक्ति का ही होता है।
चीटिंग के पीछे सिर्फ पार्टनर को दोष देना सही नहीं
धोखा मिलने के बाद अक्सर सवाल उठता है—”आखिर मुझमें क्या कमी थी?”
लेकिन हर बेवफाई का जवाब पार्टनर की कमी में तलाशना सही नहीं है।
अगर किसी रिश्ते में समस्या है, तो उसे बातचीत, काउंसलिंग या अलग होने जैसे रास्तों से सुलझाया जा सकता है। किसी तीसरे व्यक्ति के साथ छिपकर रिश्ता बनाना एक अलग फैसला है।
इसीलिए “तुम मुझे समय नहीं देते थे”, “हमारे बीच प्यार नहीं बचा था” या “मुझे वहां ज्यादा समझा जाता था” जैसी बातें किसी व्यक्ति के अनुभव को समझने में मदद कर सकती हैं, लेकिन वे अपने आप में धोखे को सही नहीं ठहरातीं।
रिश्ते में समस्या होना और उस समस्या का समाधान बेवफाई के जरिए करना—दो अलग बातें हैं।
तो क्या चीटिंग एक गलती है?
शायद इसका जवाब “हां” या “नहीं” में देना बहुत आसान होगा, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं ज्यादा जटिल है।
कभी कोई व्यक्ति एक impulsive decision ले सकता है। कभी लंबे समय तक चल रही भावनात्मक दूरी किसी को बाहर जुड़ाव तलाशने की ओर धकेल सकती है।
कभी सिर्फ अवसर और आकर्षण भूमिका निभा सकते हैं। और कभी व्यक्ति अपने रिश्ते में सब कुछ ठीक होने के बावजूद किसी दूसरे इंसान से जुड़ने का फैसला कर सकता है।
लेकिन एक बात लगभग हर स्थिति में समान रहती है—धोखा सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि भरोसे पर पड़ा असर है।
किसी रिश्ते में तीसरे व्यक्ति का आ जाना केवल दो लोगों के बीच की कहानी नहीं बदलता। इसके साथ झूठ, छिपाव, अपराधबोध, शक और भावनात्मक दूरी भी पैदा हो सकती है।
इसलिए शायद असली सवाल यह नहीं है कि “चीटिंग अचानक हुई या नहीं?”
असली सवाल यह है कि जब किसी व्यक्ति के सामने अपने रिश्ते की सीमा और उसे पार करने का विकल्प मौजूद था, तब उसने कौन सा फैसला चुना?
क्योंकि आकर्षण अचानक हो सकता है, मौका अचानक मिल सकता है, भावनाएं भी अचानक पैदा हो सकती हैं—लेकिन भरोसा तोड़ने की दिशा में उठाए गए कदम अक्सर एक के बाद एक लिए गए फैसलों का परिणाम होते हैं।

