Wednesday, January 28, 2026

महाकाल में जारी VVIP प्रोटोकॉल: अदालत ने आस्था और सुरक्षा के मामलों में हस्तक्षेप से किया इनकार

महाकाल में जारी VVIP प्रोटोकॉल: उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में VVIP दर्शन की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (27 जनवरी 2026) को सुनवाई से स्पष्ट इनकार कर दिया।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने दो टूक कहा कि मंदिर के भीतर किसे प्रवेश देना है और किसे नहीं, यह तय करना अदालतों का दायरा नहीं है। अदालत के इस सख्त रुख के बाद याचिकाकर्त्ता ने अपनी अर्जी वापस ले ली।

आस्था वाले लोग ऐसे मुकदमे नहीं करते

याचिकाकर्त्ता दर्पण अवस्थी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी थी कि गर्भगृह में जलाभिषेक की अनुमति केवल वीआईपी व्यक्तियों तक सीमित रखना संविधान के अनुच्छेद 14, यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

उनका कहना था कि मंदिर में दर्शन की नीति सबके लिए समान होनी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, ऐसी याचिकाएँ दाखिल नहीं की जानी चाहिए, असली श्रद्धालु इस तरह की याचिकाएँ नहीं लाते है।

पीठ ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में यह भी कहा कि कल को कोई मंदिर के भीतर अनुच्छेद 19 का हवाला देकर बोलने की आज़ादी के नाम पर मंत्र-जप का अधिकार भी माँगने लगेगा।

महाकाल के अंदरूनी नियम कोर्ट तय नहीं करेगा

महाकाल में जारी VVIP प्रोटोकॉल: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया था कि किसी भी दिन VIP कौन होगा,

यह उस समय की परिस्थितियों के आधार पर जिला कलेक्टर और मंदिर प्रबंधन तय करते हैं। इसके लिए न तो कोई स्थायी सूची होती है और न ही कोई तय परिभाषा।

हाई कोर्ट का यह भी कहना था कि देश के लगभग सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों में ऐसी व्यवस्थाएँ मौजूद हैं, जो भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा जैसे व्यावहारिक कारणों से लागू की जाती हैं।

सुरक्षा के नाम पर विशेष प्रोटोकॉल को वैध ठहराया

महाकाल में जारी VVIP प्रोटोकॉल: याचिकाकर्त्ता पक्ष ने यह तर्क रखा था कि या तो सभी श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश दिया जाए या फिर किसी को भी नहीं दिया जाए।

उन्होंने आम भक्तों की कठिनाइयों का हवाला देते हुए कहा कि लोग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, जबकि प्रभावशाली लोग बिना किसी बाधा के दर्शन कर लेते हैं।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि व्यवस्थाओं को संचालित करने वालों पर भरोसा किया जाना चाहिए। अदालत हर सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था को नियंत्रित नहीं कर सकती है।

VVIP दर्शन व्यवस्था रहेगी बरकरार

महाकाल में जारी VVIP प्रोटोकॉल: अदालत के रुख के बाद याचिकाकर्त्ता के पास अब केवल यही रास्ता बचा है कि वह अपने सुझाव मंदिर प्रशासन या जिला प्रशासन के समक्ष रखें।

न्यायपालिका ने यह संकेत दे दिया है कि आस्था और प्रशासनिक विवेक से जुड़े मामलों में अदालत का हस्तक्षेप सीमित ही रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक स्थलों की आंतरिक व्यवस्थाओं पर अंतिम निर्णय अदालतों के बजाय प्रशासन और प्रबंधन का ही होगा। महाकाल मंदिर में VVIP दर्शन की परंपरा फिलहाल पहले की तरह जारी रहेगी।

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Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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