Vitamin D: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह के विटामिन और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इन्हीं में से एक है विटामिन D, जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है।
यह मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए भी जरूरी है। जब शरीर में इसकी कमी होने लगती है, तो कुछ लोगों को थकान, कमजोरी और हड्डियों में दर्द जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।
कई बार इन लक्षणों को लोग सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, ये परेशानियां दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी हो सकती हैं। ऐसे में शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द
विटामिन D शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है। कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। जब शरीर में लंबे समय तक विटामिन D की पर्याप्त मात्रा नहीं रहती, तो हड्डियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
कुछ लोगों को कमर, पैरों और शरीर के दूसरे हिस्सों में दर्द महसूस हो सकता है। इसके अलावा, मांसपेशियों में कमजोरी और असहजता की शिकायत भी हो सकती है।
अगर इसकी गंभीर कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो वयस्कों में हड्डियां कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए लगातार दर्द होने पर इसे केवल काम की थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पर्याप्त आराम के बाद भी थकान
अगर रात में अच्छी नींद लेने और आराम करने के बाद भी दिनभर थकान महसूस होती है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें पोषण की कमी, नींद की समस्या, तनाव और कुछ बीमारियां शामिल हैं।
विटामिन D की कमी भी कुछ लोगों में थकान और मांसपेशियों की कमजोरी से जुड़ी हो सकती है। ऐसी स्थिति में रोजमर्रा के काम करने, सीढ़ियां चढ़ने या लंबे समय तक खड़े रहने में परेशानी हो सकती है।
हालांकि, केवल थकान के आधार पर विटामिन D की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती। अगर यह समस्या लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
चलने-फिरने में परेशानी
विटामिन D की गंभीर कमी मांसपेशियों के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकती है। कुछ लोगों को पैरों और कूल्हों के आसपास कमजोरी महसूस हो सकती है।
इसके कारण कुर्सी से उठने, सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य गतिविधियां करने में परेशानी हो सकती है।
बच्चों में विटामिन D की गंभीर कमी हड्डियों के विकास को प्रभावित कर सकती है, जबकि वयस्कों में हड्डियों के नरम और कमजोर होने की समस्या हो सकती है।
अगर मांसपेशियों की कमजोरी लगातार बनी रहती है या चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
कैसे पता करें विटामिन D की कमी है या नहीं?
विटामिन D की कमी का पता लगाने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन D की ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। हर व्यक्ति को यह जांच कराने की जरूरत नहीं होती।
डॉक्टर लक्षणों और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के आधार पर फैसला लेते हैं। कमी की पुष्टि होने पर खानपान में बदलाव, सुरक्षित तरीके से धूप लेना और जरूरत के अनुसार सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जा सकती है।
फैटी फिश, अंडे की जर्दी और विटामिन D से भरपूर बनाए गए दूध जैसे खाद्य पदार्थ इसके अच्छे स्रोत हैं। ध्यान रखें कि बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन D के हाई-डोज सप्लीमेंट लेना नुकसानदायक हो सकता है।
इसकी अधिक मात्रा शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ाकर किडनी समेत अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय सही जांच और विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता दें।

