Friday, July 17, 2026

जगन्नाथ रथ यात्रा का सबसे बड़ा रहस्य, आखिर क्यों जाते हैं भगवान गुंडिचा मंदिर?

जगन्नाथ रथ यात्रा: पुरी की प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है।

हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ,

बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं।

यह मंदिर श्रीमंदिर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रथ यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह भगवान और उनके भक्तों के बीच प्रेम,

विश्वास और दिए गए वचन को निभाने का प्रतीक भी मानी जाती है।

आइए आसान भाषा में जानते हैं कि भगवान हर साल गुंडिचा मंदिर क्यों जाते हैं और इस यात्रा का क्या महत्व है।

कौन थीं रानी गुंडिचा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुरी के राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ के भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था।

उनकी पत्नी रानी गुंडिचा भगवान की बहुत बड़ी भक्त थीं। कहा जाता है कि उनकी कोई संतान नहीं थी,

इसलिए वे भगवान जगन्नाथ को अपने बेटे की तरह स्नेह करती थीं।

उनकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें वचन दिया कि वे हर वर्ष उनके घर दर्शन देने आएंगे।

इसी मान्यता के कारण रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर जाते हैं।

समय के साथ रानी गुंडिचा को भगवान की मौसी के रूप में सम्मान मिलने लगा और आज भी भक्त इस परंपरा को उसी श्रद्धा के साथ निभाते हैं।

गुंडिचा मंदिर का क्या है महत्व?

गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ का दूसरा घर भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां भगवान जगन्नाथ,

बलभद्र और सुभद्रा की दिव्य प्रतिमाओं का निर्माण किया गया था।

कथा के अनुसार, देवशिल्पी विश्वकर्मा बंद कमरे में मूर्तियां बना रहे थे और उन्होंने किसी को भी दरवाजा न खोलने के लिए कहा था,

लेकिन तय समय से पहले राजा इंद्रद्युम्न ने दरवाजा खोल दिया। इससे प्रतिमाएं अधूरी अवस्था में ही रह गईं। भगवान ने उसी रूप में विराजमान होने का निर्णय लिया।

यही कारण है कि आज भी भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाएं अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों से अलग दिखाई देती हैं।

इसी वजह से गुंडिचा मंदिर को भगवान के प्रकट होने का स्थान भी माना जाता है।

भगवान यहां नौ दिन क्यों ठहरते हैं?

रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा गुंडिचा मंदिर में पूरे नौ दिन तक निवास करते हैं।

इन दिनों मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भगवान को पारंपरिक ओड़िया व्यंजन पोडा पीठा का भोग लगाया जाता है।

यह नौ दिन का प्रवास इस बात का प्रतीक माना जाता है कि भगवान अपने भक्तों से किया हुआ वचन कभी नहीं भूलते।

यह परंपरा भक्तों को विश्वास और भक्ति का संदेश देती है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान तक जरूर पहुंचती है।

हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा

रथ यात्रा के दौरान एक खास पर्व हेरा पंचमी भी मनाया जाता है। जब भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर में रहते हैं, तब माता लक्ष्मी श्रीमंदिर में ही रहती हैं।

मान्यता है कि पांचवें दिन माता लक्ष्मी भगवान को वापस बुलाने के लिए गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं।

लोककथाओं के अनुसार, भगवान के देर से लौटने पर माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और प्रतीक के रूप में भगवान के रथ का एक छोटा हिस्सा क्षतिग्रस्त कर देती हैं।

इसके बाद वे वापस श्रीमंदिर लौट जाती हैं। इस परंपरा को आज भी बड़े उत्साह और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ निभाया जाता है।

बहुड़ा यात्रा का महत्व

गुंडिचा मंदिर में नौ दिन बिताने के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा वापस श्रीमंदिर लौटते हैं।

इस वापसी यात्रा को बहुड़ा यात्रा या उल्टा रथ यात्रा कहा जाता है।

इस दिन भी लाखों श्रद्धालु भगवान के रथ को खींचने और उनके दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि रथ यात्रा और बहुड़ा यात्रा दोनों के दर्शन करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

आड़प दर्शन क्यों है खास?

जब भगवान गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहते हैं, तब उनके दर्शन को आड़प दर्शन कहा जाता है।

मान्यता है कि इस समय भगवान के दर्शन करने से सौ अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है।

यही वजह है कि भारत ही नहीं, विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु इस अवसर पर पुरी पहुंचते हैं।

भगवान की रथ यात्रा क्या संदेश देती है?

जगन्नाथ रथ यात्रा हमें यह सिखाती है कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम, विश्वास और भक्ति का हमेशा सम्मान करते हैं।

यह यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा, समानता और वचन निभाने की प्रेरणा भी देती है।

हर साल होने वाली यह परंपरा करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और भारतीय संस्कृति की अनमोल विरासत मानी जाती है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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