Sunday, May 24, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने माओवादी नेता की मौत में दोबारा जांच की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने माओवादी नेता की मौत में दोबारा जांच की याचिका खारिज की

मई के बीस को सुप्रीम कोर्ट ने माओवादी कमांडर कठा रामचंद्र रेड्डी की मौत की दोबारा शव परीक्षा और जांच के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को निरस्त कर दिया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व में इस मामले में विशेष जांच टीम द्वारा जांच के आदेश देने से इंकार कर दिया था। रेड्डी को पिछले साल सितंबर में छत्तीसगढ़ में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था।

न्यायमूर्ति दिपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्रन शर्मा की बेंच ने माओवादी नेता के पुत्र द्वारा दायर की गई विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई की। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए उनके बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दर्ज की थी। विशेष जांच टीम द्वारा जांच के आदेश को लेकर विवाद पैदा हो गया था।

शव परीक्षा की मांग और कानूनी तर्क

सीनियर एडवोकेट कोलिन गोंसाल्वेस ने दलील दी कि रेड्डी के शरीर पर कई चोटें मिली हैं। उन्होंने इसे हिरासत में मारपीट का मामला बताया और दावा किया कि यह एनकाउंटर नहीं था। गोंसाल्वेस ने कोर्ट को विभिन्न चोटों के निशान दिखाए और कहा कि ये सब कस्टडियल टॉर्चर के संकेत हैं। उन्होंने दृढ़ता से तर्क दिया कि शव परीक्षा दोबारा से आवश्यक है।

अदालत के सवाल और प्रतिप्रश्न

न्यायमूर्ति दत्ता ने सवाल उठाया कि क्या एनकाउंटर केवल गोलीबारी से होती है। उन्होंने कहा कि झड़प भी हो सकती है और झड़प के दौरान किसी को चोटें आ सकती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि यह कस्टडियल डेथ है। न्यायमूर्ति ने आगे कहा कि राइफल का बोल्ट घाव का कारण बन सकता है। उनका तर्क था कि शरीर पर चोटें एनकाउंटर में भी लग सकती हैं।

न्यायमूर्ति शर्मा ने भी सवाल उठाया और जंगल में लड़ाई की मुश्किलों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता का पिता एक कट्टर नक्सली था और ऑपरेशन में उसके पास आधुनिक हथियार भी थे। उन्होंने कहा कि आप किसी को गुलाब के फूलों से स्वागत नहीं दे सकते।

सुरक्षा बलों की कठिन परिस्थितियां

न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि नक्सल विरोधी ऑपरेशन में सुरक्षा बल बेहद खतरनाक हालात में काम करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि इन ऑपरेशन में कर्मियों की जान का खतरा बना रहता है। हालांकि न्यायमूर्ति ने यह भी कहा कि अगर यह कोई आम गांववासी होता तो कोर्ट समझदारी दिखाता। लेकिन इस मामले में परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं और सुरक्षा बलों को बहुत जोखिम था।

अदालत का अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने याचिका को निरस्त करने का फैसला लिया। न्यायमूर्ति दत्ता जिन्हें न्यायमूर्ति शर्मा की सहमति थी ने इस फैसले को सही ठहराया। याचिकाकर्ता के लिए यह एक बड़ा झटका था क्योंकि उसे उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट मामले पर गहरी जांच का आदेश देगा।

पिछली कार्यवाही और पृष्ठभूमि

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने रेड्डी के शव को मोर्चुरी में तब तक सुरक्षित रखने का आदेश दिया था जब तक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट याचिका पर फैसला न ले दे। रेड्डी के बेटे राजा चंद्र ने पूजा की छुट्टियों के बंद होने से पहले हाईकोर्ट से तत्काल सुनवाई की अपील की थी। राजा चंद्र ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताया और दोबारा जांच की मांग की।

घटना का विवरण और तारीख

घटना सितंबर बाइस को हुई जब याचिकाकर्ता के पिता और कादरी सत्यनारायण रेड्डी नाम के व्यक्ति को छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ एनकाउंटर में मारा गया। एंटी माओवादी ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने दोनों को निशाना बनाया। यह मामला काफी विवादास्पद बन गया था और कानूनी दायरे तक पहुंच गया।

हाईकोर्ट का पहला निर्णय

हाईकोर्ट ने पहले ही याचिकाकर्ता के पिता की मौत को लेकर दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया था। इस फैसले के विरुद्ध राजा चंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। वह मानते थे कि हाईकोर्ट का फैसला गलत था और पुनर्विचार की जरूरत है।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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