विदेश नीति पर राजनीति नहीं.. राष्ट्रहित सर्वोपरि: कॉन्ग्रेस सांसद और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने हाल ही में विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने वालों को कड़ा संदेश दिया है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विदेश नीति किसी एक पार्टी की नहीं होती, बल्कि वह पूरे देश की होती है।
थरूर ने कहा कि, जब कोई नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असफलता की कामना करता है या उसकी हार पर खुश होता है, तो असल में वह भारत की हार पर खुशी मना रहा होता है।
“ना BJP की विदेश नीति, ना कॉन्ग्रेस की, सिर्फ भारतीय विदेश नीति”
विदेश नीति पर राजनीति नहीं.. राष्ट्रहित सर्वोपरि: एक इंटरव्यू के दौरान थरूर ने कहा कि विदेश नीति को चुनावी हथियार बनाना खतरनाक प्रवृत्ति है।
उन्होंने कहा, “कोई भाजपा की विदेश नीति नहीं होती, कोई कॉन्ग्रेस की विदेश नीति नहीं होती, केवल भारत की विदेश नीति होती है।”
उनका मानना है कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय एकता बेहद जरूरी है, चाहे सरकार किसी भी दल की क्यों न हो।
पाकिस्तान की बदली सैन्य रणनीति, भारत के लिए चेतावनी
विदेश नीति पर राजनीति नहीं.. राष्ट्रहित सर्वोपरि: भारत–पाकिस्तान संबंधों पर बोलते हुए शशि थरूर ने आगाह किया कि पाकिस्तान की सैन्य रणनीति अब पहले जैसी नहीं रही।
उनके अनुसार, सीमित ड्रोन या रॉकेट हमलों से आगे बढ़कर पाकिस्तान अब ज्यादा उन्नत और खतरनाक तकनीकों की ओर बढ़ रहा है।
हाइपरसोनिक मिसाइल, स्टेल्थ तकनीक और अप्रत्याशित हमलों की रणनीति भविष्य में भारत के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
ऐसे में भारत को किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए।
कमजोर अर्थव्यवस्था, लेकिन जोखिम भरे फैसलों का खतरा
विदेश नीति पर राजनीति नहीं.. राष्ट्रहित सर्वोपरि: थरूर ने पाकिस्तान की आंतरिक हालत को बेहद अस्थिर बताया। उनके मुताबिक, वहां लोकतांत्रिक सरकार नाम मात्र की है और असली सत्ता सेना के हाथों में केंद्रित है।
आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान लगातार संघर्ष कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मदद पर निर्भर है।
थरूर ने चेताया कि जब कोई देश आर्थिक रूप से कमजोर होता है, तो वह ध्यान भटकाने के लिए आक्रामक और जोखिम भरे फैसले ले सकता है।
भारत के मजबूत सेक्टरों में घुसपैठ की कोशिश
विदेश नीति पर राजनीति नहीं.. राष्ट्रहित सर्वोपरि: उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान अब उन क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जहां भारत पहले से वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है।
टेक्सटाइल, कृषि और खनिज संसाधनों से जुड़ी डील्स के ज़रिए पाकिस्तान पश्चिमी देशों का समर्थन पाने की कोशिश कर रहा है।
यह रणनीति दिखाती है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए सहारे खोज रहा है।
बांग्लादेश की अस्थिरता से बढ़ सकती हैं भारत की चुनौतियाँ
विदेश नीति पर राजनीति नहीं.. राष्ट्रहित सर्वोपरि: दक्षिण एशिया की स्थिति पर चर्चा करते हुए शशि थरूर ने बांग्लादेश को लेकर भी चिंता जाहिर की।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इस समय ऊर्जा संकट, महंगाई और कमजोर निवेश माहौल से गुजर रहा है।
यदि वहां राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता बढ़ती है, तो उसका सीधा असर पूरे क्षेत्र, खासकर भारत पर पड़ेगा।
भारत–बांग्लादेश कनेक्टिविटी योजनाएँ, लेकिन शांति जरूरी
विदेश नीति पर राजनीति नहीं.. राष्ट्रहित सर्वोपरि: थरूर ने याद दिलाया कि भारत ने बांग्लादेश के लिए बंदरगाह, रेलवे और ऊर्जा ग्रिड जैसी कई कनेक्टिविटी परियोजनाएं शुरू की हैं, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हैं।
हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इन योजनाओं की सफलता बांग्लादेश में स्थिरता और शांति पर निर्भर करती है।
कट्टरपंथी ताकतों और भारत के पूर्वोत्तर को लेकर दी जा रही धमकियों को उन्होंने गंभीर चेतावनी बताया।

