Sunday, January 25, 2026

राहुल गांधी का सपना क्यों रहेगा अधूरा: भारत का Gen Z नहीं करने वाला सड़कों पर क्रांति

राहुल गांधी का बचकाना सपना

राहुल गांधी मानते रहे हैं कि भारत का Gen Z नेपाल या बांग्लादेश की तरह सड़क पर उतरकर अराजक क्रांति करेगा।

लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। बीते 11 सालों में मोदी सरकार ने युवाओं की आकांक्षाओं को जिस तरह दिशा दी है, उसने सड़क की राजनीति को अप्रासंगिक बना दिया है।

लोकतंत्र का वेंटिलेशन सिस्टम और विरोध की दिशा

भारत में लोकतंत्र का एक मजबूत वेंटिलेशन सिस्टम है, जो गुस्से और असहमति को चुनावों, सोशल मीडिया और जंतर-मंतर जैसे मंचों पर निकालने का अवसर देता है।

नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में यह व्यवस्था कमजोर है, इसलिए वहां युवाओं के लिए सड़क ही संघर्ष का प्रमुख मैदान बन जाती है।

आर्थिक सशक्तिकरण और नया नजरिया

भारत का युवा आज एक आकांक्षी अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। बेरोजगारी की समस्या हर देश में है, लेकिन Startup India, Skill India, Digital India, UPI, एआई और ईवी इकोसिस्टम जैसी योजनाओं ने युवाओं को भरोसा दिया है।

अब Gen Z की सोच बदलकर “ऐप बना लो, स्टार्टअप कर लो, क्रिएटर बन लो” जैसी राह पर केंद्रित है।

विचारधारा से कौशल और नवाचार की ओर झुकाव

नेपाल के कम्युनिस्ट आंदोलन और बांग्लादेश के मदरसे युवाओं को सड़क पर लड़ना सिखाते हैं।

इसके विपरीत भारत में मोदी सरकार ने National Education Policy, अटल टिंकरिंग लैब्स और डिजिटल यूनिवर्सिटी जैसी योजनाओं से ध्यान कौशल और नवाचार पर केंद्रित कर दिया है। अब सड़क की राजनीति की जगह लैब्स और लैपटॉप्स ने ले ली है।

सामाजिक दबाव और परिवार का नया आत्मविश्वास

भारतीय परिवार हमेशा कहते रहे हैं, “बेटा पुलिस केस मत करना।” लेकिन पिछले 11 सालों में जनधन योजना, मुद्रा लोन, मुफ्त डिजिटल टूल्स और सस्ता डाटा जैसे कदमों ने मिडिल क्लास और लोअर-मिडिल क्लास परिवारों में नया आत्मविश्वास पैदा किया है।

अब विद्रोह की जगह आकांक्षा ने युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।

राजनीतिक ऊर्जा का संरचित इस्तेमाल

भारत में छात्र संघ पहले से मौजूद थे, लेकिन अब भाजपा और आरएसएस से जुड़े युवा मोर्चे और डिजिटल एंगेजमेंट सेल्स ने Gen Z की ऊर्जा को संगठित राजनीति में खींच लिया है।

युवाओं का गुस्सा अब सोशल मीडिया ट्रेंड्स और चुनाव अभियानों में इस्तेमाल होकर दोबारा व्यवस्थित रूप से सामने आता है।

डिजिटल राष्ट्रवाद और नया युद्धक्षेत्र

आज का Gen Z ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर खुद को डिजिटल योद्धा मानता है। Digital India और सस्ते डाटा ने उसे वैश्विक डिजिटल युद्धक्षेत्र उपलब्ध कराया है।

नेपाल और बांग्लादेश के युवाओं के पास यह विकल्प नहीं है, इसलिए वहां उनके लिए सड़क ही मुख्य मंच बन जाती है।

क्रांति नहीं, आकांक्षा की राह

सबसे बड़ा फर्क आकांक्षा और क्रांति का है। भारत का Gen Z खुद को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का हिस्सा मानता है।

उसे विश्वास है कि मेहनत से फ्लैट, एसयूवी, स्टार्टअप फंडिंग और यूरोप ट्रिप सब हासिल किए जा सकते हैं। यह भरोसा मोदी सरकार ने लगातार अभियानों और योजनाओं से मजबूत किया है।

स्पष्ट है कि राहुल गांधी की उम्मीदों के विपरीत भारत का Gen Z सड़कों पर अराजक क्रांति नहीं करेगा।

मोदी सरकार ने ऐसा माहौल तैयार किया है, जिसमें विद्रोह की जगह सपनों और डिजिटल विकास ने युवाओं की ऊर्जा को नई दिशा दे दी है।

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
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