पुणे रेप और मर्डर केस: महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरपुर में चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या करने वाले दोषी भीमराव कांबले को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।
सोमवार, 29 जून को सुनाए गए इस फैसले में अदालत ने अपराध की भयावहता पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह ऐसा जघन्य अपराध है, जिसके लिए आजीवन कारावास पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि कानून में मृत्युदंड से अधिक कठोर सजा का प्रावधान होता, तो इस मामले में उस पर भी विचार किया जाता।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि घटना के महज दो महीने के भीतर जांच पूरी हुई, आरोप तय हुए, सुनवाई संपन्न हुई और दोषी को सजा भी सुना दी गई।
इसे हाल के वर्षों में सबसे तेज गति से निपटाए गए गंभीर आपराधिक मामलों में से एक माना जा रहा है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाया मृत्युदंड
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश एस.आर. सालुंके ने दोषी भीमराव कांबले को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।
इससे पहले 25 जून को अदालत ने उसे दोषी करार दिया था और सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
फैसला सुनाए जाने के दौरान पीड़ित बच्ची का परिवार कोर्ट में मौजूद था। जैसे ही अदालत ने फांसी की सजा का ऐलान किया, परिवार भावुक हो उठा।
कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों ने भी फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
जज की टिप्पणी ने बढ़ाई फैसले की गंभीरता
सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि यह अपराध समाज की संवेदनाओं को झकझोर देने वाला है।
न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि दोषी ने जिस अमानवीय तरीके से मासूम बच्ची के साथ अपराध किया, वह दुर्लभ से दुर्लभतम (Rarest of Rare) श्रेणी में आता है।
इसी आधार पर अदालत ने मृत्युदंड को उचित सजा माना। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में केवल अपराधी को दंडित करना ही उद्देश्य नहीं है,
बल्कि समाज में यह संदेश देना भी जरूरी है कि मासूम बच्चों के खिलाफ इस तरह के अपराधों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अपराध के बाद भी नहीं दिखा कोई पछतावा
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोषी से उसके कृत्य के बारे में पूछा था। न्यायाधीश ने उसे अपनी हरकत पर विचार करनेयह बताने का अवसर दिया कि उसके अनुसार उसे क्या सजा मिलनी चाहिए।
बताया गया कि भीमराव कांबले ने पूरी घटना स्वीकार करते हुए यह तक कह दिया कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है।
उसने कुछ गलत नहीं किया। आरोपी का यह रवैया देखकर अदालत ने उसे बीच में ही रोक दिया।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एडवोकेट मिलिंद पवार ने भी कोर्ट को बताया कि पूरी सुनवाई के दौरान
आरोपी के चेहरे पर किसी तरह का पश्चाताप दिखाई नहीं दिया। अभियोजन पक्ष ने इसे अपराध की गंभीरता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण पहलू बताया।
कैसे हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
यह दर्दनाक घटना 1 मई को पुणे जिले के भोर तालुका स्थित नसरपुर गांव में हुई थी। चार साल की बच्ची अपने घर के सामने खेल रही थी।
इसी दौरान 65 वर्षीय भीमराव कांबले उसे बहला-फुसलाकर पास की एक गौशाला में ले गया।
अभियोजन के अनुसार, वहां आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसकी पहचान छिपाने के इरादे से उसकी हत्या कर दी।
बाद में शव को छिपाने की कोशिश भी की गई। जब काफी देर तक बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
खोजबीन के दौरान उसका शव बरामद हुआ, जिससे पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।
सीसीटीवी और सबूतों ने दिलाई सजा
जांच एजेंसियों ने घटना स्थल और आसपास के इलाकों से अहम सबूत जुटाए। इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में आरोपी बच्ची को अपने साथ ले जाता हुआ दिखाई दिया।
इसके अलावा फोरेंसिक साक्ष्यों और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों ने भी अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूत किया।
इन्हीं पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 25 जून को आरोपी को दोषी ठहराया और चार दिन बाद उसे मृत्युदंड की सजा सुना दी।
तेज सुनवाई बनी मिसाल
इस मामले में पुलिस जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया बेहद तेजी से पूरी हुई। घटना के दो महीने के भीतर दोषसिद्धि और सजा का फैसला आने को न्याय व्यवस्था की तेज कार्रवाई के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

