Tuesday, March 24, 2026

मिडिल ईस्ट जंग जारी रही तो नतीजे होंगे गंभीर, बोले PM मोदी

मिडिल ईस्ट जंग जारी रही तो नतीजे होंगे गंभीर: दुनिया इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां पश्चिम एशिया (West Asia) में धधकती आग वैश्विक अर्थव्यवस्था को झुलसा सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में देश को संबोधित करते हुए स्पष्ट कर दिया कि Isreal-Iran War और अमेरिका की इसमें मौजूदगी के परिणाम बहुत घातक हो सकते हैं।

पीएम मोदी का यह संबोधन केवल एक भाषण नहीं, बल्कि आने वाली बड़ी परीक्षा के लिए 140 करोड़ भारतीयों और राज्य सरकारों को दी गई एक गंभीर चेतावनी है।

मिडिल ईस्ट संघर्ष बना दुनिया के लिए खतरे की घंटी

प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में अपने 21 मिनट के भाषण में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डालने वाले बिंदुओं को छुआ।

उन्होंने कहा कि यदि USA-Israel-Iran Conflict थमा नहीं, तो इसके दुष्परिणाम पूरी मानवता को भुगतने होंगे।

पीएम मोदी ने साफ किया कि यह समय युद्ध का नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति का है।

भारत ने हमेशा से शांति का पक्ष लिया है, लेकिन वर्तमान हालात अभूतपूर्व संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।

आने वाला समय देश के धैर्य और सामर्थ्य की सबसे बड़ी परीक्षा लेने वाला है।

Hormuz Strait Crisis और सप्लाई चेन पर प्रहार

भारत की सबसे बड़ी चिंता का केंद्र Hormuz Strait है। पीएम मोदी ने बताया कि इस समुद्री रास्ते में हमारे व्यापारिक जहाज और भारतीय क्रू मेंबर्स फंसे हुए हैं। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा आपूर्ति के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है।

व्यापार पर असर: कमर्शियल जहाजों पर हमले और समुद्री रास्तों में रुकावट भारत के लिए अस्वीकार्य है।

जरूरी सामान की कमी: युद्ध के कारण पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) और फर्टिलाइजर्स की रूटीन सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।

भारत सरकार लगातार कूटनीति के जरिए यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि ऊर्जा संकट का असर आम आदमी की जेब पर कम से कम पड़े।

3.75 लाख भारतीयों का किया रेस्क्यू

मिडिल ईस्ट जंग जारी रही तो नतीजे होंगे गंभीर: संकट के समय में अपने नागरिकों की सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।

पीएम मोदी ने जानकारी दी कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं।

ईरान से वापसी: अकेले ईरान से 1000 से ज्यादा भारतीय लाए गए हैं, जिनमें 700 मेडिकल छात्र हैं।

पीएम ने युद्ध में कुछ भारतीयों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया और आश्वासन दिया कि उनके परिवारों को हर संभव मदद और घायलों को समुचित इलाज मुहैया कराया जा रहा है।

सरकार गल्फ देशों में रह रहे करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा के लिए वहां के राष्ट्राध्यक्षों के साथ निरंतर संपर्क में है।

राज्यों के लिए अलर्ट

प्रधानमंत्री ने राज्यों को टीम इंडिया की भावना से काम करने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से राज्य सरकारों से दो मोर्चों पर सक्रिय होने को कहा।

गरीब कल्याण: युद्ध का सबसे पहला और बुरा असर गरीबों और श्रमिकों पर पड़ता है। इसलिए PM Garib Kalyan Anna Yojana का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित करना राज्यों की जिम्मेदारी है।

सख्त कार्रवाई: संकट के समय कुछ असामाजिक तत्व कालाबाजारी और जमाखोरी (Hoarding) में जुट जाते हैं। पीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जहां से भी ऐसी शिकायतें आएं, वहां तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि महंगाई पर नियंत्रण रहे।

27 से 41 देशों तक फैलाया नेटवर्क

पिछले 10 वर्षों में भारत ने अपनी Energy Security को मजबूत करने के लिए जो कदम उठाए, उनका जिक्र करते हुए पीएम ने बताया कि अब भारत केवल 27 नहीं, बल्कि 41 देशों से तेल और गैस का आयात कर रहा है।

रिफाइनिंग और स्टोरेज: भारत ने अपनी तेल रिफाइनिंग क्षमता और कच्चे तेल के भंडार (Strategic Oil Reserves) को बढ़ाया है।

विकल्पों की तलाश: सरकार पीएनजी (PNG) और घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से देश को बचाया जा सके।

आत्मनिर्भर भारत का दिया संदेश

युद्ध ने दुनिया को सिखाया है कि दूसरों पर निर्भरता कितनी महंगी पड़ सकती है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत अब हथियारों (Defense Infrastructure) और जीवन रक्षक दवाओं (Life-saving Drugs) में आत्मनिर्भर बन रहा है।

रेयर अर्थ मिनरल्स जैसी महत्वपूर्ण चीजों के लिए भी विदेशी निर्भरता कम करने के प्रयास युद्धस्तर पर जारी हैं।

भारत का लक्ष्य है कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी देश की Economic Growth Rate को तेज बनाए रखा जाए।

संकट से निपटने का मास्टर प्लान

मिडिल ईस्ट जंग जारी रही तो नतीजे होंगे गंभीर: कोविड-19 के समय की रणनीति को दोहराते हुए, केंद्र सरकार ने 7 Empowered Groups का गठन किया है।

ये ग्रुप्स सीधे तौर पर सप्लाई चेन, पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता, फर्टिलाइजर की सप्लाई और महंगाई जैसे संवेदनशील मुद्दों पर 24/7 नजर रखेंगे।

यह त्वरित रणनीति सुनिश्चित करेगी कि युद्ध की आंच भारत के चूल्हे और किसान के खेत तक न पहुंचे।

एकजुटता ही एकमात्र समाधान

प्रधानमंत्री का संबोधन एक स्पष्ट संदेश है कि आने वाली चुनौतियां कठिन हैं, लेकिन भारत उनसे लड़ने के लिए तैयार है।

टीम इंडिया के रूप में केंद्र और राज्यों का तालमेल ही इस वैश्विक आपदा से भारत को सुरक्षित बाहर निकाल सकता है।

पीएम मोदी ने देशवासियों से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील की है, क्योंकि भारत अपनी कूटनीति और आत्मनिर्भरता के दम पर इस अग्निपरीक्षा को पार करने का संकल्प ले चुका है।

यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट संकट: PM मोदी की हाई-लेवल बैठक, पेट्रोल-डीजल पर सरकार का बड़ा फैसला!

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