पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर इन दिनों अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को साधने में लगे हुए हैं।
हाल ही में दोनों नेताओं ने वॉशिंगटन डीसी के व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ ने ट्रंप की जमकर तारीफ की और उन्हें “शांति का पुरुष” तक कह डाला। यहां तक कि उन्होंने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की भी बात कही।
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चीन को बताया ‘सबसे भरोसेमंद सहयोगी’
ट्रंप से निकटता बढ़ाने की कोशिशों के बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चीन को “सबसे खास दोस्त” और “सबसे भरोसेमंद साथी” करार दिया।
ब्रिटिश-अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन को दिए इंटरव्यू में आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान के विमानों, पनडुब्बियों और हथियारों का बड़ा हिस्सा चीन से आता है।
उन्होंने साफ कहा कि चीन का महत्व और विश्वसनीयता पाकिस्तान के लिए अमेरिका की तुलना में कहीं अधिक है।
अमेरिका से रिश्तों पर दो टूक
ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका से पाकिस्तान के रिश्तों को “लेन-देन” और “फ्लर्टिंग” जैसा बताया। उन्होंने कहा कि चाहे पाकिस्तान अमेरिका के कितना भी करीब हो, चीन हमेशा उसका स्थायी और विश्वसनीय सहयोगी रहेगा।
चीन न सिर्फ पड़ोसी है बल्कि हथियार और रक्षा सहयोग का भी मुख्य स्रोत है।
सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता
इस इंटरव्यू में हाल ही में हुए सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते का भी जिक्र हुआ। सऊदी अरब और पाकिस्तान ने “स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट” पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते के तहत यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे दोनों पर हमला माना जाएगा। यह समझौता शहबाज शरीफ के सऊदी दौरे के दौरान क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की मौजूदगी में हुआ।
भारत की प्रतिक्रिया और कश्मीर का मुद्दा
संयुक्त राष्ट्र में शहबाज शरीफ द्वारा ट्रंप की तारीफ पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भारत का कहना है कि कश्मीर में संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की नीतियों में न तो ट्रंप और न ही शरीफ की कोई वास्तविक भूमिका रही है।
भारत के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से इस तरह के बयानों का मकसद केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहानुभूति और समर्थन हासिल करना है।

