मिडिल ईस्ट की जंग में नया मोड़: पिछले कुछ दिनों से मिडिल ईस्ट (खासकर अमेरिका, इजरायल और ईरान) के बीच जो कुछ चल रहा है, उसने पूरी दुनिया को उलझा दिया है।
एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि बातचीत से रास्ता निकल रहा है, वहीं ईरान का कहना है कि ऐसी कोई बात ही नहीं हुई।
यह पूरा मामला क्या है, ट्रंप की इसमें क्या चाल हो सकती है और ईरान ने कौन सी 6 शर्तें रखी हैं।
ट्रंप का अचानक आया ‘शांति’ वाला बयान
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए सबको चौंका दिया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में बहुत ही सकारात्मक बातचीत हुई है।
ट्रंप ने दावा किया कि वे मिडिल ईस्ट के इस टकराव का एक स्थायी समाधान (Permanent Solution) निकालना चाहते हैं।
इसी के साथ ट्रंप ने एक बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अमेरिकी वॉर डिपार्टमेंट (पेंटागन) को निर्देश दिया है कि ईरान के बिजली घरों (Power Plants) और ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले किसी भी सैन्य हमले को अगले 5 दिनों के लिए टाल दिया जाए।
ट्रंप का कहना है कि यह 5 दिन का समय इसलिए दिया गया है ताकि बातचीत को एक मौका मिल सके।
ईरान ने ट्रंप के दावे को क्यों नकारा?
जैसे ही ट्रंप का बयान आया, ईरान के विदेश मंत्रालय ने तुरंत इसका खंडन कर दिया। ईरान ने साफ-साफ कहा:
“अमेरिका के साथ हमारी कोई सीधी या इनडायरेक्ट बातचीत नहीं हो रही है।”
ईरान की समाचार एजेंसी ‘फ़ार्स न्यूज़’ (जो वहां की सेना IRGC से जुड़ी है) ने तो यहाँ तक कह दिया कि ट्रंप झूठ बोल रहे हैं।
ईरान का मानना है कि ट्रंप असल में डरे हुए हैं।
ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उनके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो वे पूरे पश्चिम एशिया के पावर ग्रिड को तबाह कर देंगे और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएंगे।
ईरान के मुताबिक, ट्रंप इसी जवाबी कार्रवाई से बचने के लिए ‘बातचीत’ का बहाना बना रहे हैं।
ईरान की वो 6 शर्तें: “गारंटी दो वरना जंग जारी रहेगी”
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटेगा। जानकार बताते हैं कि ईरान ने मुख्य रूप से 6 मांगें सामने रखी हैं, जिन्हें पूरा किए बिना वह युद्ध खत्म नहीं करेगा:
परमाणु ठिकानों की सुरक्षा: ईरान के परमाणु केंद्रों (Nuclear Facilities) पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर ऐसा हुआ, तो ईरान इसे ‘फुल-स्केल वॉर’ की शुरुआत मानेगा।
आर्थिक प्रतिबंधों का अंत: अमेरिका ने ईरान पर जो कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, उन्हें पूरी तरह हटाया जाए ताकि ईरान व्यापार कर सके।
लिखित और कानूनी गारंटी: ईरान अब सिर्फ बातों पर भरोसा नहीं करना चाहता। उसे अमेरिका से एक ऐसी कानूनी गारंटी चाहिए कि भविष्य में कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति किसी समझौते को अचानक नहीं तोड़ेगा।
इजरायल पर लगाम: ईरान की मांग है कि अमेरिका इजरायल को हथियारों की सप्लाई रोके और उसे ईरान के खिलाफ उकसाना बंद करे।
क्षेत्रीय प्रभाव की मान्यता: मिडिल ईस्ट के देशों में ईरान के दखल और उसके सहयोगी संगठनों (जैसे हिज्बुल्लाह और हमास) की भूमिका को स्वीकार किया जाए।
नुकसान की भरपाई (Hajrana): प्रतिबंधों की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था को जो अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की मांग भी उठ रही है।
क्या यह ट्रंप की कोई ‘सियासी चाल’ है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप का यह ‘5 दिन का विराम’ कोई दरियादिली नहीं, बल्कि एक सोची-समझी चाल हो सकती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
इजरायल को वक्त देना: इजरायल ने हाल ही में ईरान पर हमले किए हैं। हो सकता है कि इजरायल को अपने अगले बड़े हमले की तैयारी के लिए और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए कुछ समय चाहिए हो। ट्रंप ‘शांति’ का नाम देकर इजरायल को यह वक्त मुहैया करा रहे हैं।
दुनिया की नजर में ‘हीरो’ बनना: ट्रंप दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि “मैंने तो शांति की कोशिश की थी, लेकिन ईरान ही जिद्दी है।” इससे अगर बाद में बड़ा हमला होता है, तो सारा दोष ईरान पर मढ़ा जा सकेगा।
तेल की कीमतों का डर: अगर ईरान के तेल के कुओं या बिजली घरों पर हमला होता है, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे। ट्रंप अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भी इस रिस्क को फिलहाल टालना चाह रहे हैं।
परमाणु सुविधाओं पर हमला: सबसे बड़ा खतरा
दुनिया की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला कर दिया, तो क्या होगा? ईरान ने “सिर के बदले सिर” वाली नीति का ऐलान किया है। यानी अगर इजरायल ईरान का एक पावर स्टेशन उड़ाएगा, तो ईरान इजरायल का एक मुख्य शहर या सैन्य अड्डा तबाह करने की कोशिश करेगा। यह सिलसिला बढ़ते-बढ़ते परमाणु युद्ध तक भी पहुँच सकता है।
आगे क्या होगा ?
फिलहाल अगले 5 दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं। अगर ट्रंप और ईरान के बीच पर्दे के पीछे वाकई कोई बातचीत चल रही है, तो शायद तनाव कम हो। लेकिन जिस तरह से दोनों देश एक-दूसरे को धमकियाँ दे रहे हैं, उससे लगता है कि यह “तूफान से पहले की शांति” है।
ईरान ने अल्टीमेटम दे दिया है कि वह अपनी शर्तों से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा। अब गेंद अमेरिका और इजरायल के पाले में है। क्या वे ईरान की शर्तें मानेंगे, या फिर ये 5 दिन खत्म होते ही मिडिल ईस्ट में एक भीषण युद्ध शुरू होगा? पूरी दुनिया की नजरें अब इसी पर टिकी हैं।
By : Snigdha Singh

