देश में मानसून की दस्तक: एक लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार केरल में दस्तक दे दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस वर्ष मानसून सामान्य तिथि से कुछ दिन की देरी से केरल पहुंचा है।
मानसून के सक्रिय होते ही देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। IMD Weather Alert के अनुसार अगले कुछ दिनों में दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर भारत और उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
Monsoon Update 2026 के तहत 19 राज्यों में आंधी, बारिश और तूफान को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
किन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट | Heavy Rain Alert
मौसम विभाग के अनुसार केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में अगले 5 से 7 दिनों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
विशेष रूप से केरल और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में कुछ स्थानों पर 7 से 20 सेंटीमीटर तक वर्षा दर्ज की जा सकती है।
केरल के कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, नदियों के जलस्तर में वृद्धि और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है।
उत्तर भारत में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी | Rain Alert in India
उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
हिमाचल प्रदेश में कुछ स्थानों पर ओले गिरने की चेतावनी जारी की गई है। वहीं उत्तराखंड में तेज हवाओं के साथ वर्षा होने की संभावना है।
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में भी तेज हवाओं, धूल भरी आंधी और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है।
दिल्ली-एनसीआर में गर्मी से राहत के आसार
देश में मानसून की दस्तक: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम करवट ले सकता है। Delhi NCR Weather Update के अनुसार दिन के समय आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।
सुबह से दोपहर के बीच हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना है, जबकि शाम और रात के समय 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
कुछ इलाकों में धूल भरी आंधी भी देखने को मिल सकती है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।
राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी बदलेगा मौसम
राजस्थान के कई जिलों में धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना व्यक्त की गई है।
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ वर्षा होने की उम्मीद है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसूनी गतिविधियों और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से इन राज्यों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे गर्मी का असर कम होगा।
बिहार में अभी जारी रहेगी उमस और लू
देश में मानसून की दस्तक: जहां देश के कई हिस्सों में बारिश राहत लेकर आएगी, वहीं बिहार के लोगों को फिलहाल उमस भरी गर्मी और लू का सामना करना पड़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार राज्य में 6 जून से फिर से लू जैसी स्थिति बनने की संभावना है। हालांकि मानसून की प्रगति के साथ जून के तीसरे सप्ताह में मौसम बदल सकता है।
फिलहाल तापमान में बढ़ोतरी और गर्म हवाओं के कारण लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
बिहार में कब पहुंचेगा मानसून?
सामान्य तौर पर बिहार में मानसून 15 जून के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार इसके 4 से 5 दिन देरी से आने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून 18 से 20 जून के बीच पश्चिम बंगाल के रास्ते पूर्णिया और किशनगंज जिलों में प्रवेश कर सकता है।
इसके बाद यह धीरे-धीरे राज्य के अन्य हिस्सों में फैल जाएगा। राजधानी पटना और गया में मानसून के 22 जून तक पहुंचने की संभावना है, जबकि उत्तर-पश्चिम बिहार के जिलों में 24 जून के आसपास मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हो सकती हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है मानसून?
भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। धान, गन्ना, कपास और कई अन्य प्रमुख फसलों की अच्छी पैदावार के लिए समय पर और पर्याप्त बारिश आवश्यक होती है।
मानसून के आगमन से जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर में सुधार होता है, जिससे खेती और पेयजल आपूर्ति को लाभ मिलता है।
यही कारण है कि देशभर में मानसून का इंतजार केवल मौसम परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और कृषि उत्पादन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस बार सामान्य से कम बारिश की आशंका
देश में मानसून की दस्तक: आईएमडी ने अपने मौसमी पूर्वानुमान में संकेत दिया है कि इस वर्ष देश में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है।
विभाग के अनुसार पूरे मानसून सीजन में वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रही एल नीनो परिस्थितियां मानसून को प्रभावित कर सकती हैं।
हालांकि जून और जुलाई में इसका प्रभाव सीमित रह सकता है, लेकिन अगस्त और सितंबर में इसका असर अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकता है।
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