केजीएमयू
करीब ढाई करोड़ रुपये की दवाओं का मामला
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में दवाओं की खरीद, वितरण और रिकॉर्ड से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। करीब ढाई करोड़ रुपये के मामले में विश्वविद्यालय स्तर पर जांच हुई और कर्मचारियों की भूमिका, सरकारी धन के संभावित नुकसान तथा दवा वितरण प्रक्रिया की पड़ताल हुई।
जांच का गंभीर हिस्सा महंगी कैंसर दवाओं के वितरण से जुड़ा रहा। आरोप सामने आए कि कुछ दवाएं फर्जी या ऐसे मरीजों के नाम पर दर्ज की गईं जिनके उपचार का स्पष्ट आधार नहीं मिला। इससे मरीज और स्टॉक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
रिकॉर्ड, इमरजेंसी और खरीद प्रक्रिया पर सवाल
मामले में रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, खरीद को सही ठहराने वाली प्रविष्टियों और कुछ प्रकरणों को इमरजेंसी बताकर सामान्य प्रक्रिया से अलग आगे बढ़ाने के आरोप भी सामने आए। खरीद, बिल, स्टॉक, वितरण और दस्तावेजों की प्रक्रियागत जांच इसी कारण महत्वपूर्ण बनी।
दवा खर्च में अचानक आई तेजी ने संदेह बढ़ाया। मासिक खर्च करीब दस लाख रुपये से बढ़कर फरवरी में चालीस लाख और मार्च में करीब पैंतालीस लाख रुपये पहुंचा। इसी बढ़ोतरी के बाद महंगी सरकारी दवाओं के वास्तविक उपयोग और वितरण की जांच तेज हुई।
दवा प्रकरण में किस पर केंद्रित रही जांच
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दवा प्रकरण की जांच कर्मचारियों और संबंधित विभाग की खरीद तथा वितरण प्रक्रिया पर केंद्रित थी। उपलब्ध सूचनाओं में इन वित्तीय अनियमितताओं को सीधे कुलपति सोनिया नित्यानंद या सैयद अब्बास द्वारा किए जाने का स्थापित निष्कर्ष सामने नहीं आया।
सैयद अब्बास पर अलग आरोप और सरकारी जांच
सैयद अब्बास का मामला अलग विवाद से जुड़ा रहा। कार्यालय में ओएसडी रहे अब्बास पर आरोपी डॉक्टर को बचाने की कोशिश, परिसर में धार्मिक आयोजनों के आरोप और उनकी नियुक्ति नियमों के अनुरूप नहीं होने के आरोप लगे। बाद में उन्हें पद से हटाया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने फरवरी 2026 में सैयद अब्बास से जुड़े आरोपों और उनकी नियुक्ति प्रक्रिया की जांच के लिए समिति गठित की। इसलिए यह कहना सही नहीं कि जांच शुरू नहीं हुई। सवाल है कि जांचों के अंतिम निष्कर्ष और जवाबदेही कितनी स्पष्ट हुई।
विवादों के बीच सोनिया नित्यानंद को दूसरा कार्यकाल
इसी पृष्ठभूमि में राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने अगस्त 2026 में सोनिया नित्यानंद को तीन वर्ष के लिए दोबारा केजीएमयू का कुलपति नियुक्त किया। यह संस्थान के इतिहास में पहला अवसर है जब किसी कुलपति को लगातार दूसरा कार्यकाल दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के 2026 के बजट में केजीएमयू के लिए करीब एक हजार नौ सौ अड़तीस करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इतने सार्वजनिक संसाधनों वाले संस्थान की कमान दोबारा सौंपे जाने के बाद पारदर्शिता, जांचों और जवाबदेही के प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

