Thursday, April 16, 2026

JNU कुलपति ने UGC विनियमों का किया विरोध, कहा संघी होने पर गर्व, विरोध में उतरा छात्रसंघ

JNU कुलपति ने UGC विनियमों का किया विरोध

नई दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के एक पॉडकास्ट बयान को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है। छात्रसंघ ने इसे कथित जातिसूचक टिप्पणी करार देते हुए इस्तीफे की मांग की है, जबकि कुलपति ने आरोपों को गलत व्याख्या बताया है।

यह बयान 16 फरवरी को प्रकाशित एक पॉडकास्ट के दौरान सामने आया, जिसमें कुलपति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की 2026 इक्विटी एंटी डिस्क्रिमिनेशन नियमावली पर चर्चा कर रही थीं। यह नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव से निपटने के उद्देश्य से लाया गया था।

यूजीसी नियमों पर कुलपति की आपत्ति

पॉडकास्ट में कुलपति ने कहा कि यूजीसी की नई नियमावली अनावश्यक और अव्यवहारिक है। उनके शब्दों में यूजीसी रेगुलेशन अविवेकपूर्ण है और स्थायी रूप से पीड़ित मानसिकता बनाए रखने से प्रगति संभव नहीं होती। उन्होंने इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय विमर्श का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि आप हमेशा पीड़ित बने नहीं रह सकते और पीड़ित होने का कार्ड खेलकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। यह अवधारणा पहले अश्वेत समुदायों के संदर्भ में लाई गई थी और वही मॉडल यहां दलितों के लिए लागू करने का प्रयास किया गया। इसे उन्होंने वोक विचारधारा से जोड़ा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक का संदर्भ

यूजीसी ने यह नियम 13 जनवरी 2026 को लागू किया था। बाद में 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए कहा कि ऐसे प्रावधान समाज में गहरी दरार उत्पन्न कर सकते हैं। कुलपति ने अपने वक्तव्य में इसी पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए नियमों की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया।

उन्होंने कहा कि जब इन नियमों की आलोचना हुई तो उन्हें लगा कि पूरा विवाद अनावश्यक रूप से बढ़ाया गया। उनके अनुसार उचित जांच और विचार प्रक्रिया का अभाव रहा, जिससे संदेह की स्थिति बनी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका निजी आकलन था।

स्वयं की सामाजिक पृष्ठभूमि का उल्लेख

विवाद के बाद कुलपति ने कहा कि वे स्वयं बहुजन पृष्ठभूमि से आती हैं। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय का प्रश्न उनके लिए सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा विषय है। ऐसे में उन पर जातिसूचक दृष्टिकोण का आरोप तथ्यात्मक रूप से असंगत है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके वक्तव्य को गलत समझा गया। उनका कहना था कि उन्होंने वोक विचारधारा के समर्थकों और विरोधियों के तर्कों का उल्लेख किया था, न कि स्वयं किसी समुदाय के विरुद्ध टिप्पणी की थी।

आरएसएस से जुड़ाव पर प्रतिक्रिया

पॉडकास्ट में कुलपति ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपने वैचारिक जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने संबंधों पर गर्व है और इस संगठन ने उन्हें विविधता की सराहना तथा व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया है।

छात्रसंघ ने उनके इस वक्तव्य पर भी आपत्ति जताई, जबकि कुलपति का कहना है कि विचारधारात्मक पृष्ठभूमि का उल्लेख किसी के प्रति पूर्वाग्रह का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार विविध विचारों की स्वीकृति ही विश्वविद्यालयी वातावरण की पहचान है।

छात्रसंघ की प्रतिक्रिया और विरोध की घोषणा

जेएनयू छात्रसंघ ने शुक्रवार को जारी बयान में कुलपति के वक्तव्य को जातिसूचक करार दिया और इसे विश्वविद्यालयों में कथित अन्याय की निरंतरता से जोड़ा। संघ ने देशभर के छात्र संगठनों से विरोध में शामिल होने और बयान की निंदा करने की अपील की है।

छात्रसंघ ने 21 फरवरी को राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस मनाने की घोषणा की है। परिसर में इस मुद्दे पर बहस जारी है। दूसरी ओर कुलपति ने दोहराया है कि उनका उद्देश्य संस्थागत नीतियों पर विमर्श करना था, न कि किसी समुदाय को लक्षित करना।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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