Tuesday, January 27, 2026

जाह्नवी कपूर: बांग्लादेश में दीपु चंद्र दास की हत्या पर जाह्नवी कपूर की तीखी प्रतिक्रिया

जाह्नवी कपूर

बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने बांग्लादेश में दीपु चंद्र दास की सार्वजनिक हत्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे बर्बर और अमानवीय कृत्य बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी हिंसा किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में गहराते साम्प्रदायिक विद्वेष का संकेत है।

सोशल मीडिया पर साझा किया गया बयान

ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है वह कत्ल है और इसे सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने लोगों से तथ्यों को जानने और सच का सामना करने का आग्रह किया।

सार्वजनिक हिंसा पर चुप्पी को बताया खतरनाक

अपने बयान में अभिनेत्री ने कहा कि यदि किसी को इस तरह की सार्वजनिक लिंचिंग की जानकारी होने के बावजूद क्रोध महसूस नहीं होता, तो यही वह पाखंड है जो समाज को भीतर से नष्ट करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि नैतिक उदासीनता भविष्य में और भयावह परिणाम ला सकती है।

147035

चयनात्मक संवेदना पर सवाल

जाह्नवी कपूर ने इस बात पर भी चिंता जताई कि लोग अक्सर दुनिया के दूरदराज हिस्सों की घटनाओं पर भावनात्मक प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन अपने आसपास हो रही हिंसा पर चुप रहते हैं। उन्होंने इसे मानवीय संवेदना का दोहरा मापदंड बताया, जो समाज को कमजोर करता है।

साम्प्रदायिक भेदभाव और उग्रवाद की निंदा

अभिनेत्री ने कहा कि साम्प्रदायिक भेदभाव और उग्रवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चाहे कोई पीड़ित हो या हिंसा करने वाला, हर स्थिति में ऐसे कृत्यों को पहचानकर खुलकर निंदा करना आवश्यक है।

झूठे विभाजन और अदृश्य रेखाओं की आलोचना

अपने संदेश में उन्होंने समाज को बांटने वाली अदृश्य रेखाओं की बात करते हुए कहा कि लोग स्वयं को किसी एक पक्ष में मानकर मोहरे बन जाते हैं। उन्होंने इस मानसिकता को खतरनाक बताते हुए कहा कि वास्तविकता को पहचानना और भ्रम से बाहर निकलना जरूरी है।

जागरूकता और शिक्षा को बताया समाधान

जाह्नवी कपूर ने लोगों से खुद को ज्ञान और जानकारी से सशक्त बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक समाज सच को समझकर जागरूक नहीं होगा, तब तक निर्दोष लोगों की जान जाती रहेगी और साम्प्रदायिक हिंसा का चक्र चलता रहेगा।

दीपु चंद्र दास का परिचय और घटना का विवरण

दीपु चंद्र दास एक युवा हिंदू नागरिक थे, जिनकी उम्र पच्चीस वर्ष बताई गई। वह बांग्लादेश के एक औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत थे। आरोप है कि साम्प्रदायिक उन्माद के चलते भीड़ ने उन पर हमला किया, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

परिवार तक सूचना और आगे की स्थिति

घटना की जानकारी परिवार तक बाद में पहुंची, जिससे परिजनों में शोक और आक्रोश का माहौल बना। मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और जांच की प्रक्रिया जारी है। यह घटना क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Mudit
Mudit
लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article