राजस्थान का टोंक जिला लंबे समय से संवेदनशील माना जाता रहा है, लेकिन हालिया कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि खतरा कितनी गहराई तक फैला हुआ था।
टोंक शहर और देवली में एक साथ हुई DST की रेड ने उस अवैध नेटवर्क को उजागर किया, जो चुपचाप हथियार और विस्फोटक तैयार कर रहा था।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में दहशत और चर्चाओं का माहौल है।
विस्फोटक सामग्री का बड़ा जखीरा सामने आया
छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में बारूद और पोटाश मिला, जो किसी सामान्य जरूरत से कहीं ज्यादा है।
करीब 53 किलो से अधिक बारूद और 32 किलो पोटाश के साथ हथियार बनाने के उपकरण और पुर्जे बरामद किए गए।
यह साफ संकेत है कि यहां हथियार सिर्फ रखे नहीं जा रहे थे, बल्कि तैयार भी किए जा रहे थे।
तीन लोग बने पुलिस की कार्रवाई का निशाना
DST ने इस पूरे ऑपरेशन में तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से इस अवैध कारोबार में शामिल थे।
शुरुआती पूछताछ में उन्होंने शिकार और खेतों की सुरक्षा का तर्क दिया है, लेकिन पुलिस इसे महज बहाना मानकर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
आबादी वाले इलाके में छुपा था विस्फोटक ठिकाना
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि टोंक शहर के बीचों-बीच एक ऐसा ठिकाना चल रहा था, जहां विस्फोटक सामग्री और हथियार जमा किए गए थे।
यहां से गन पाउडर, पोटाश, शोरा, लोहे के छर्रे, कोरडेक्स वायर, एयर गन और पी-कैप्स जैसे खतरनाक सामान मिले। इस स्थान से 65 वर्षीय मोहम्मद अतीक की गिरफ्तारी हुई।
देवली में खुला हथियारों का गोदाम
देवली क्षेत्र में की गई कार्रवाई ने तस्वीर और साफ कर दी। पुलिस को यहां एक नाली और दोनाली बंदूकें, बंदूक के ट्रिगर, छह तलवारें और 21 किलो से अधिक बारूद मिला।
मौके से 57 वर्षीय राजू लोहार को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से तीन लाख रुपये से ज्यादा नकद भी बरामद हुआ।
नकदी ने इस अवैध कारोबार के आर्थिक नेटवर्क की ओर भी इशारा किया है।
पुराने मामलों से जुड़ते नए सुराग
इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि कुछ समय पहले टोंक में भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट पकड़ा जा चुका है।
बार-बार हो रही ऐसी बरामदगियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ी और सुनियोजित साजिश तो नहीं है।
अब जांच के घेरे में पूरा नेटवर्क
DST प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी के मुताबिक, आरोपियों के दावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
हथियार और विस्फोटक किसके लिए और कहां सप्लाई किए जा रहे थे, यह जांच का अहम हिस्सा है।
पुलिस अब सिर्फ आरोपियों तक सीमित नहीं, बल्कि सप्लाई चेन, खरीदारों और संभावित कनेक्शन को खंगालने में जुटी हुई है।

