Friday, July 17, 2026

हरतालिका तीज 2026: कब है शुभ मुहूर्त, क्यों रखा जाता है निर्जला व्रत, जानें पूजा विधि, नियम और पारण का सही तरीका

हरतालिका तीज 2026: हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु,

सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से रखती हैं।

वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से इस व्रत का पालन करती हैं।

भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

वर्ष 2026 में हरतालिका तीज 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं 24 घंटे का निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता गौरी की पूजा-अर्चना करती हैं और पूरी रात जागरण कर उनका स्मरण करती हैं।

हरतालिका तीज नाम कैसे पड़ा?

स्कंद पुराण में वर्णित कथा के अनुसार पर्वतराज हिमवान अपनी पुत्री माता पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे, लेकिन माता पार्वती भगवान शिव को ही पति के रूप में प्राप्त करने का संकल्प ले चुकी थीं।

जब उनकी सखी को यह बात पता चली तो वह माता पार्वती को जंगल में ले गईं, ताकि वे किसी दबाव के बिना भगवान शिव की कठोर तपस्या कर सकें।

‘हर’ का अर्थ है हर लेना या अपहरण करना और ‘आलिका’ का अर्थ सखी होता है। सखी द्वारा माता पार्वती को जंगल ले जाने की इस घटना के कारण इस व्रत का नाम हरतालिका तीज पड़ा।

माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया और तभी से यह व्रत श्रद्धा के साथ किया जाता है।

हरतालिका तीज 2026 का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 08 मिनट से आरंभ होगी और 14 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 06 मिनट तक रहेगी।

उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा। इस दिन सुबह 5 बजकर 06 मिनट से 7 बजकर 06 मिनट तक पूजा के लिए शुभ समय रहेगा।

इसके अलावा प्रदोष काल में शाम 6 बजकर 28 मिनट से रात 9 बजे तक भी शिव-गौरी की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार रात्रि के चारों प्रहर में पूजा और जागरण करने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

सुहागिन और अविवाहित महिलाओं के लिए क्यों खास है यह व्रत?

भविष्य पुराण में हरतालिका तीज को महिलाओं के लिए श्रेष्ठ सौभाग्य प्रदान करने वाला व्रत बताया गया है।

मान्यता है कि जो महिलाएं पूरी श्रद्धा, विश्वास और नियमों के साथ इस व्रत का पालन करती हैं, उनके दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख बना रहता है।

परिवार में शांति और समृद्धि का वास होता है तथा भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

वहीं अविवाहित कन्याएं यदि सच्चे मन से यह व्रत करती हैं तो उन्हें भगवान शिव के समान गुणों वाला योग्य जीवनसाथी प्राप्त होने का आशीर्वाद मिलता है।

हरतालिका तीज व्रत कैसे किया जाता है?

हरतालिका तीज का व्रत सबसे कठिन व्रतों में माना जाता है क्योंकि इसमें महिलाएं पूरे 24 घंटे तक निर्जला उपवास रखती हैं।

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान किया जाता है और स्वच्छ या नए वस्त्र धारण किए जाते हैं।

इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए “उमा महेश्वर सायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये” मंत्र के साथ व्रत का संकल्प लिया जाता है।

यदि कोई महिला पहली बार यह व्रत रख रही है तो इसी समय निर्जला व्रत का संकल्प लेना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत का संकल्प जीवनभर निभाया जाता है।

पूजा की तैयारी और पूजन विधि

हरतालिका तीज की पूजा पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ करने की परंपरा है। इसलिए दोपहर में ही पूजा की सभी तैयारियां पूरी कर लेना उचित माना जाता है।

पूजा की थाली में बेलपत्र, पुष्प, धूप, दीप, पंचामृत, फल, नैवेद्य, सुहाग सामग्री और भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली 16 प्रकार की पत्तियां रखी जाती हैं।

शाम को स्नान करने के बाद महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक सुंदर मंडप तैयार करती हैं।

इसके बाद मिट्टी या बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाकर स्थापित की जाती हैं।

सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन किया जाता है, फिर भगवान शिव और माता गौरी का षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है।

भगवान शिव को जल, पंचामृत, बेलपत्र और पुष्प अर्पित किए जाते हैं, जबकि माता गौरी को सिंदूर, चुनरी, चूड़ियां, बिंदी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है।

पूजा के अंत में हरतालिका तीज की कथा सुनी जाती है तथा पूरी रात भजन-कीर्तन और जागरण किया जाता है।

व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?

हरतालिका तीज के दिन पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दोपहर और रात्रि में सोना वर्जित माना गया है।

व्रती महिलाओं को पूरे दिन भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करना चाहिए और मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करना चाहिए।

इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से भी दूर रहने की सलाह दी जाती है ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

व्रत का पारण कैसे करें?

हरतालिका तीज के पूजन के बाद भगवान शिव और माता पार्वती को ककड़ी और हलवे का भोग लगाया जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार ककड़ी को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

अगले दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, माता पार्वती को सिंदूर अर्पित करें और वही सिंदूर स्वयं भी लगाएं।

धार्मिक विश्वास है कि इस विधि से व्रत का पारण करने पर अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और माता गौरी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

हरतालिका तीज केवल एक धार्मिक व्रत नहीं बल्कि श्रद्धा, विश्वास, समर्पण और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना का पावन पर्व है,

जो भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और तपस्या की प्रेरणा देता है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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