Tuesday, April 21, 2026

क्या Gen-Z की उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे बालेन शाह?

क्या Gen-Z की उम्मीदों पर: नेपाल की राजनीति में युवा लहर के प्रतीक बनकर उभरे बालेन शाह से जिस बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही थी, वह शुरुआती दौर में ही सवालों के घेरे में आ गई है।

Gen-Z के समर्थन से सत्ता तक पहुँचे शाह को एक “एंटी-एस्टैब्लिशमेंट” चेहरे के रूप में देखा गया था, लेकिन महज कुछ ही समय में उनकी नीतियों और फैसलों के खिलाफ असंतोष सामने आने लगा है।

सीमावर्ती नीति और जनता का विरोध

भारत-नेपाल के बीच सदियों पुराना “बेटी-रोटी” का संबंध रहा है। सीमा पर लोगों की आवाजाही और छोटे व्यापार पर निर्भर बड़ी आबादी को बालेन सरकार की नई भंसार (कस्टम) नीति ने प्रभावित किया है।

100 रुपये से अधिक के सामान पर टैक्स लगाने से रोजमर्रा की खरीदारी महंगी हो गई है।

सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह फैसला सीधे उनके जीवन पर असर डाल रहा है।

नतीजतन, इन क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इससे न केवल व्यापार प्रभावित हुआ है, बल्कि नेपाल में वस्तुओं की कमी और महंगाई बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है।

भ्रष्टाचार के आरोप और सरकार की साख

Gen-Z आंदोलन की नींव ही भ्रष्टाचार विरोध पर टिकी थी, लेकिन अब उसी मुद्दे पर सरकार घिरती नजर आ रही है।

गृह मंत्री सुदन गुरुंग पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों ने सरकार की छवि को झटका दिया है।

विपक्षी दलों और सिविल सोसायटी ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही, नैतिक आधार पर इस्तीफे का दबाव भी बढ़ रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि “जीरो टॉलरेंस” की बात करने वाले प्रधानमंत्री इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

स्वास्थ्य नीति पर बढ़ता असंतोष

नेपाल की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही चुनौतियों से जूझ रही है। सरकारी अस्पतालों की खराब हालत और निजीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है।

बालेन सरकार के फैसले स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बजाय निजीकरण की दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं।

इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए इलाज और महंगा हो सकता है, जो जनता के असंतोष का बड़ा कारण बन रहा है।

छात्र राजनीति पर प्रतिबंध का असर

शिक्षण संस्थानों को राजनीति से दूर रखने के उद्देश्य से छात्र राजनीति पर प्रतिबंध लगाने का फैसला भी विवादों में है।

हालांकि सरकार ने “स्टूडेंट काउंसिल” जैसे विकल्प दिए हैं, लेकिन छात्रों का एक बड़ा वर्ग इसे अपने अधिकारों पर हमला मान रहा है।

नेपाल में छात्र राजनीति का लंबा इतिहास रहा है, इसलिए इस फैसले के खिलाफ विरोध तेज हो रहा है।

क्या अधूरा रह गया ‘जेनरेशन शिफ्ट’?

बालेन शाह के नेतृत्व में जिस “जेनरेशन शिफ्ट” की बात हो रही थी, वह फिलहाल अधूरी नजर आती है।

सरकार में युवाओं और महिलाओं की सीमित भागीदारी यह संकेत देती है कि पुरानी राजनीतिक संरचना अभी भी हावी है।

सिर्फ नेतृत्व बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती इसके लिए संस्थागत सुधार जरूरी होते हैं, जो अभी तक दिखाई नहीं दे रहे हैं।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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