Friday, August 7, 2026

Forest Man of India: जानें कैसे एक अकेले इंसान ने 1,300 एकड़ बंजर जमीन को बना दिया घना जंगल?

Forest Man of India: जब पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation) की बात होती है, तो अक्सर सरकारों, बड़ी संस्थाओं और करोड़ों रुपये की योजनाओं का जिक्र होता है।

लेकिन भारत में एक ऐसा व्यक्ति भी है जिसने यह साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो तो अकेला इंसान भी प्रकृति का भविष्य बदल सकता है।

असम के रहने वाले जादव “मोलाई” पायेंग (Jadav “Molai” Payeng) को आज पूरी दुनिया “Forest Man of India” के नाम से जानती है।

उन्होंने लगभग चार दशकों तक बिना किसी बड़े सरकारी अभियान के लगातार पेड़ लगाए और एक ऐसी बंजर भूमि को घने जंगल में बदल दिया, जहां कभी सिर्फ रेत और वीरानी थी।

आज यह जंगल न केवल हजारों पेड़ों से भरा हुआ है, बल्कि हाथी, गैंडा, हिरण, बाघ, पक्षियों और कई दुर्लभ जीवों का सुरक्षित आशियाना भी बन चुका है।

यही वजह है कि उनकी कहानी Afforestation, Climate Change, Biodiversity Conservation, Sustainable Environment और Eco Restoration जैसे विषयों में दुनिया भर में मिसाल मानी जाती है।

कौन हैं जादव पायेंग? | Who is Jadav Payeng

who is known as the forest man of india जादव पायेंग का जन्म वर्ष 1963 में असम के माजुली (Majuli) क्षेत्र में एक मिसिंग (Mishing) जनजातीय परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनका जीवन प्रकृति के बेहद करीब रहा।

ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे रहने के कारण उन्होंने बाढ़, कटाव और पर्यावरण में होने वाले बदलावों को बहुत करीब से देखा। यही अनुभव आगे चलकर उन्हें दुनिया के सबसे प्रेरणादायक पर्यावरण योद्धाओं में शामिल करने वाला बना।

1979 की घटना ने बदली जिंदगी

kise forest man of india kaha jata hai साल 1979 में असम में भीषण बाढ़ आई थी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बड़ी संख्या में सांप और दूसरे छोटे जीव धूप और गर्म रेत में मरते हुए दिखाई दिए। वहां एक भी पेड़ नहीं था, जो उन्हें छाया दे सके।

यह दृश्य जादव पायेंग के मन को अंदर तक झकझोर गया। उन्होंने वन विभाग से इस समस्या का समाधान पूछा। बताया जाता है कि उन्हें उत्तर मिला कि यदि यहां जंगल चाहिए तो स्वयं पेड़ लगाइए।

यहीं से शुरू हुआ वह सफर जिसने इतिहास रच दिया। एक बांस के पौधे से शुरू हुई करोड़ों उम्मीदों की कहानी। 1979 में जादव पायेंग ने सबसे पहले बांस के पौधे लगाने शुरू किए।

इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अलग-अलग प्रजातियों के हजारों पेड़ लगाए। वे रोज सुबह पौधों को पानी देते, उनकी सुरक्षा करते और नए पौधे लगाते।

उन्होंने किसी अभियान या प्रचार के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्य के रूप में यह काम जारी रखा। उनकी यह दिनचर्या वर्षों तक बिना रुके चलती रही।

कैसे बना 1,300 एकड़ से अधिक का विशाल जंगल?

who is the forest man of india लगातार मेहनत के बाद ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे विकसित हुआ यह जंगल आज लगभग 550 हेक्टेयर (करीब 1,300–1,360 एकड़) क्षेत्र में फैला हुआ है। इस जंगल को स्थानीय लोग “मोलाई फॉरेस्ट (Molai Forest)” के नाम से जानते हैं।

यह जंगल प्राकृतिक रूप से विकसित हुआ, जहां पेड़ों ने मिट्टी को मजबूत किया, वर्षा के पानी को रोका और धीरे-धीरे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem Restoration) विकसित हो गया।

इस जंगल में कौन-कौन से जानवर रहते हैं?

who is called the forest man of india आज मोलाई फॉरेस्ट पूर्वोत्तर भारत के महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों में गिना जाता है।

यहां समय-समय पर कई वन्यजीव देखे जाते हैं, जिनमें शामिल हैं—

एशियाई हाथी (Asian Elephant)
बंगाल टाइगर (Bengal Tiger)
भारतीय गैंडा (Indian Rhinoceros) – कुछ अवसरों पर
हिरण
जंगली सूअर
बंदर
गिद्ध
मोर
सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी
सरीसृप और छोटे वन्यजीव

हाथियों के झुंड हर वर्ष इस जंगल का उपयोग अपने प्राकृतिक मार्ग (Elephant Corridor) के रूप में भी करते हैं।

किस तरह अकेले संभाला पूरा जंगल?

who is forest man of india जादव पायेंग ने वर्षों तक जंगल की देखभाल खुद की। उन्होंने पौधों को जानवरों से बचाया, पानी उपलब्ध कराया और स्थानीय प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार नई प्रजातियों के पेड़ लगाए।

वे कई वर्षों तक इसी जंगल के पास रहते रहे और इसे अपने परिवार की तरह संभालते रहे। उनका मानना है कि यदि पेड़ों की रक्षा नहीं की जाएगी, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा।

दुनिया को कैसे पता चली जादव पायेंग की कहानी?

Why is Jadav Payeng called the forest Man of India कई वर्षों तक उनका काम स्थानीय स्तर तक ही सीमित रहा। साल 2008 के आसपास वन अधिकारियों की नजर इस विशाल जंगल पर पड़ी, जब उन्होंने यहां हाथियों का बड़ा झुंड देखा।

इसके बाद जादव पायेंग की कहानी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंची। उन पर कई डॉक्यूमेंट्री बनीं और दुनिया भर के पर्यावरण विशेषज्ञों ने उनके कार्य को Global Reforestation Model और Community Based Conservation का बेहतरीन उदाहरण बताया।

मिले कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान

forest man of india kise kaha jata hai पर्यावरण संरक्षण में असाधारण योगदान के लिए जादव पायेंग को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं।

प्रमुख सम्मान
Padma Shri (2015) – भारत सरकार
कई राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मान
विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा सम्मान
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से विशेष सम्मान
दुनिया भर के पर्यावरण मंचों पर आमंत्रण

उनकी कहानी कई देशों के शैक्षणिक संस्थानों में Environmental Studies के उदाहरण के रूप में पढ़ाई जाती है।

मोलाई फॉरेस्ट क्यों है पूरी दुनिया के लिए मिसाल?

the forest man of india आज जब दुनिया Global Warming, Climate Change, Carbon Sequestration, Green Cover, Biodiversity और Nature Restoration जैसे मुद्दों से जूझ रही है, तब मोलाई फॉरेस्ट एक जीवंत उदाहरण बन चुका है कि प्रकृति को दोबारा जीवित किया जा सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े स्तर पर वृक्षारोपण केवल सरकारी योजनाओं से ही नहीं, बल्कि जनभागीदारी और व्यक्तिगत प्रयासों से भी संभव है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्त्रोत

forest man of india जादव पायेंग की कहानी यह सिखाती है कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े संसाधन से नहीं, बल्कि एक छोटे कदम से होती है।

उन्होंने न किसी प्रसिद्धि की इच्छा रखी और न ही किसी पुरस्कार की। उनका उद्देश्य केवल प्रकृति को बचाना था, लेकिन उसी उद्देश्य ने उन्हें पूरी दुनिया में पहचान दिलाई।

आज उनकी कहानी लाखों युवाओं को Save Environment, Tree Plantation, Go Green Mission और Climate Action के लिए प्रेरित कर रही है।

जादव पायेंग से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)

जानकारीविवरण
पूरा नामजादव “मोलाई” पायेंग
जन्म1963
राज्यअसम
प्रसिद्धिForest Man of India
जंगल का नामMolai Forest
शुरुआत1979
स्थानब्रह्मपुत्र नदी के किनारे, माजुली क्षेत्र
क्षेत्रफललगभग 550 हेक्टेयर (करीब 1,300–1,360 एकड़)
प्रमुख सम्मानPadma Shri (2015)
मुख्य कार्यAfforestation, Biodiversity Conservation, Environmental Protection

who is known as forest man of india जादव पायेंग की कहानी केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संदेश है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो एक इंसान भी धरती का भविष्य बदल सकता है।

1979 में ब्रह्मपुत्र के किनारे बंजर रेत पर लगाया गया एक छोटा-सा पौधा आज 1,300 एकड़ से अधिक फैले हरे-भरे जंगल का रूप ले चुका है। यह जंगल हजारों पेड़ों, सैकड़ों पक्षियों और अनेक वन्यजीवों का सुरक्षित घर है।

ऐसे समय में जब पूरी दुनिया Climate Change, Deforestation, Global Warming और Environmental Sustainability जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, जादव पायेंग का जीवन इस बात का प्रमाण है कि प्रकृति को बचाने के लिए किसी बड़े पद या संसाधन की नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और समर्पण की आवश्यकता होती है।

उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को यह विश्वास दिलाती है कि एक व्यक्ति का छोटा-सा कदम भी पूरी दुनिया के लिए हरियाली की नई उम्मीद बन सकता है।

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