Tuesday, January 27, 2026

पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण पर प्रशासन मौन: अल्पसंख्यक हिंदू लड़कियों पर हो रहा मज़हबी अत्याचार

पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण पर प्रशासन मौन: सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ सुनियोजित उत्पीड़न की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

नाबालिग लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्मांतरण और मजबूरी में निकाह इस समुदाय के लिए एक भयावह वास्तविकता बन चुकी है।

विशेष रूप से भील, मेघवार और कोल्ही जैसे गरीब और सामाजिक रूप से हाशिए पर पड़े परिवारों की लड़कियों को निशाना बनाया जाता है।

कैसे हो रहा है हिन्दू युवतियों का उत्पीड़न

जानकारी के अनुसार, सिंध में हिंदू लड़कियों का उत्पीड़न अक्सर सीधे अपहरण से शुरू होता है या डर और आर्थिक व सामाजिक दबाव के जरिए उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर किया जाता है।

कई लड़कियों को नौकरी, शादी या सुरक्षा के झूठे वादे दिखाए जाते हैं। इसके तुरंत बाद पीड़ितों को अपने जिले से दूर ले जाया जाता है ताकि उनका परिवार, वकील या सामाजिक कार्यकर्ता उनके पास न पहुँच सके।

यह तेज़ी से किया गया स्थानांतरण न केवल परिवार से संपर्क टूटने का कारण बनता है बल्कि स्थानीय मीडिया और प्रशासन की निगरानी से भी बचाता है।

इस दौरान लड़कियों को फर्जी दस्तावेज बनाकर उनके उम्र के प्रमाणों में हेरफेर किया जाता है ताकि बाल विवाह कानूनों से बचा जा सके।

मज़हबियों का धर्मांतरण का मजबूत नेटवर्क

पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण पर प्रशासन मौन: धर्मांतरण की प्रक्रिया आमतौर पर कुछ खास मस्जिदों, दरगाहों और मदरसों से जुड़ी जगहों पर संपन्न होती है।

कट्टरपंथी संगठनों का यह नेटवर्क पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से काम करता है।

फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लड़कियों की शादी तीन-चार दिनों के भीतर करा दी जाती है। अक्सर ये निकाह बड़े उम्र के पुरुष या पहले से शादीशुदा व्यक्तियों से कराए जाते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में पीड़ितों को कानूनी रूप से कोई विकल्प नहीं दिया जाता, और मामला बाहरी दृष्टि में कानूनी दिखाने की कोशिश की जाती है।

साफ़ झलक रही सिस्टम की नाकामी

सिंध में अदालतें और पुलिस सिस्टम अक्सर पीड़ितों के पक्ष में खड़े नहीं होते। कई बार पीड़ितों के बयान दबाव में दर्ज किए जाते हैं,

लेकिन फिर भी अधिकारियों द्वारा स्वेच्छा से धर्मांतरण को मान लिया जाता है।

अदालतों द्वारा इसे मान्यता मिलने के बाद केस को पलटना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

सामाजिक और कानूनी कमजोरियों के कारण हिंदू लड़कियां एक जटिल और खतरनाक चक्र में फँस जाती हैं।

उनका संघर्ष सिर्फ अपहरण और जबरन निकाह तक ही सीमित नहीं रह जाता, बल्कि कानूनी लड़ाई लड़ना भी उनके लिए असंभव बन जाता है।

नाबालिगों के साथ शर्मनाक घटनाएँ

पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण पर प्रशासन मौन: अक्टूबर 2025 में सिंध प्रांत से एक 15 साल की मूक-बधिर हिंदू लड़की का 7 बच्चों के पिता से जबरन निकाह कराने की खबर सामने आई।

लड़की को इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया गया। पीड़ित परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इस तरह की घटनाएँ न केवल अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए व्यक्तिगत त्रासदी हैं, बल्कि पूरे समाज के मानवाधिकारों पर चोट हैं।

शिक्षा तक में धर्मांतरण का दबाव

सिंध में हिंदू लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने के लिए भी धर्म बदलने का दबाव बनाया जा रहा है।

दिसंबर 2025 में मीरपुर सकरो के एक सरकारी हाई स्कूल में छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने के लिए इस्लाम अपनाने को कहा गया।

अभिभावकों ने बताया कि लड़कियों को कलमा पढ़ने और अपने धर्म का मजाक सहने के लिए मजबूर किया गया।

इस तरह की घटनाएँ साफ़ तौर पर दिखाती हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों तक की सुरक्षा और अधिकार भी खतरे में हैं।

12 साल में 14,000 लड़कियों की भयावह गिनती

पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण पर प्रशासन मौन: सिंध में पिछले 12 वर्षों में लगभग 14,000 हिंदू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्मांतरण और गैंगरेप की घटनाएँ दर्ज की गई हैं।

परिवार इस डर और पीड़ा से इतने हताश होते हैं कि कई बार पाकिस्तान छोड़ने या आत्महत्या करने जैसे फैसले लेने पर मजबूर हो जाते हैं।

सिंध में अल्पसंख्यक हिंदुओं की स्थिति इतनी भयावह है कि उनकी सुरक्षा, अधिकार और सामाजिक सम्मान लगातार खतरे में हैं।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय के लिए स्थिति न केवल खतरनाक बल्कि पूरी तरह मानवाधिकारों के उल्लंघन वाली बन चुकी है।

अपहरण, जबरन धर्मांतरण और मजबूरी में निकाह की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। प्रशासन और अदालतें अक्सर पीड़ितों के पक्ष में खड़ी नहीं होतीं, और सामाजिक सुरक्षा तंत्र भी कमजोर है।

यह समय की आवश्यकता है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन, पाकिस्तान की सरकार और स्थानीय प्रशासन मिलकर अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

यह सिर्फ एक धार्मिक या सामाजिक मुद्दा नहीं है, बल्कि मानवता और न्याय का सवाल है।

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Karnika Pandey
Karnika Pandeyhttps://reportbharathindi.com/
“This is Karnika Pandey, a Senior Journalist with over 3 years of experience in the media industry. She covers politics, lifestyle, entertainment, and compelling life stories with clarity and depth. Known for sharp analysis and impactful storytelling, she brings credibility, balance, and a strong editorial voice to every piece she writes.”
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