Enery
High Energy तो Success, Low Energy तो Stress
जिंदगी बदलने के लिए हर बार बाहर की दुनिया बदलना जरूरी नहीं होता। कई बार सबसे बड़ा बदलाव अपने भीतर करना पड़ता है। सीधा सा सिद्धांत है, High Energy Vibration का संबंध Success, Happiness और Peace से है, जबकि Low Energy Vibration तनाव, असफलता और बीमारियों से जोड़ी जाती है।
मान लीजिए कोई व्यक्ति बेहद थका हुआ, उदास और परेशान आपके पास आता है। वह कहता है कि हर उपाय कर लिया, पूजा पाठ भी कर लिया, लेकिन जिंदगी में कोई खास फर्क नहीं पड़ा। यहां असली सवाल बाहर का नहीं, बल्कि उसकी Energy की अवस्था का है।
तब बात आती है अपनी Energy Vibration बदलने की। स्वाभाविक सवाल उठता है कि क्या सिर्फ भीतर की ऊर्जा बदलने से असली समस्याएं भी बदल जाती हैं। क्या पैसे, रिश्ते, काम, तनाव और दूसरी वास्तविक परेशानियों का हल केवल Energy बदलने से मिल सकता है।
यह कोई जादू नहीं, पूरा खेल आपके Mind का है
यह बात न जादू है, न कोई रहस्य और न अंधविश्वास पैदा करने की कोशिश। असली बात यह समझना है कि आप किस मानसिक और भावनात्मक अवस्था में रहकर जिंदगी को देख रहे हैं। यही अवस्था तय करती है कि सामने की परिस्थिति आपको कैसी दिखाई देगी।
हर समय हमारे भीतर कोई न कोई मानसिक स्थिति चलती रहती है। मन थका हुआ है या शांत, शरीर तनाव में है या आराम में, Nervous System स्थिर है या बेचैन, इन सबका सीधा असर हमारी सोच और व्यवहार पर पड़ता है।
हमारी Energy का Level हमारे विचारों, फैसलों, आदतों और प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करता है। जब मन लगातार थका हुआ और तनाव में रहता है, तब इंसान हर समय किसी अनजान खतरे के लिए तैयार रहता है और उसे लगता है कि कुछ बुरा होने वाला है।
ऐसी हालत में छोटी बात भी बहुत बड़ी लगने लगती है। किसी की सामान्य बात चोट जैसी लग सकती है, किसी की चुप्पी दूरी लगने लगती है, छोटी असहमति लड़ाई बन सकती है और मामूली परेशानी पूरे जीवन पर भारी महसूस होने लगती है।
यही है Low Vibration, भूत प्रेत वाली बात नहीं
Low Vibration का मतलब यह नहीं कि आपके आसपास कोई अदृश्य नकारात्मक शक्ति, भूत प्रेत, टोना टोटका या जादू घूम रहा है। इसका सीधा मतलब है कि आपका मन हर चीज को डर, तनाव और खतरे के चश्मे से देखने लगा है।
अब इसी स्थिति को उल्टा करके देखिए। शरीर को पूरा आराम दीजिए, नींद पूरी कीजिए और मन को हर समय Future Danger Mode या Fight Or Flight वाली स्थिति में मत रखिए। धीरे धीरे वही परिस्थितियां आपको पहले से बिल्कुल अलग तरीके से दिखाई देने लगती हैं।
समस्या वही हो सकती है, लोग वही रह सकते हैं और हालात भी तुरंत नहीं बदलते। लेकिन आपका Response बदल जाता है, Reaction बदल जाती है और Perception बदल जाता है। कई बार सिर्फ यही बदलाव आधी समस्या को वहीं खत्म कर देता है।
बहुत सी Problems बाहर नहीं, हमारी Reaction से बनती हैं
हमारी बहुत सी परेशानियां वास्तव में घटनाएं नहीं होतीं, बल्कि उन घटनाओं पर हमारी प्रतिक्रिया होती हैं। थका हुआ व्यक्ति छोटी बात को इतना बढ़ा सकता है कि रिश्ता खराब हो जाए, गुस्से में फैसला कर दे या जरूरत से ज्यादा कठोर शब्द बोल दे।
वह अनावश्यक आरोप लगा सकता है और अपनी ही प्रतिक्रिया से ऐसी नई समस्या पैदा कर सकता है, जो पहले मौजूद ही नहीं थी। यही कारण है कि Stress में लिया गया फैसला अक्सर बाद में भारी पड़ता है और छोटी बात बड़ी उलझन बन जाती है।
इसके उलट अगर व्यक्ति शांत है, तो वह तुरंत प्रतिक्रिया देने की बजाय रुकता है। सोचकर जवाब देता है। उसकी बात भी लोग बेहतर ढंग से सुनते और समझते हैं। यहीं से जीवन बदलने की शुरुआत होती है, क्योंकि प्रतिक्रिया का तरीका बदल जाता है।
इसलिए सबसे पहले बाहर की परिस्थितियां बदलने के पीछे मत भागिए। पहले अपने भीतर की मानसिक अवस्था बदलिए। जब भीतर का Balance बदलता है, तो बाहर की घटनाओं को संभालने की क्षमता बदलती है और यही Energy Vibration बदलने का वास्तविक अर्थ है।
Alarm Mode बंद होते ही Solutions दिखने लगते हैं
जब मन हर समय Alarm Mode में रहता है, तो वह समाधान नहीं खोजता। वह लगातार खतरे, नुकसान और बुरी Possibilities ढूंढता रहता है। लेकिन जब मन शांत, खुश और सुकून में होता है, तब उसे वे रास्ते दिखने लगते हैं जो पहले भी सामने थे।
इसके लिए केवल Positive Affirmation दोहराना काफी नहीं है। दिनभर कहते रहिए कि मैं शांत हूं, मैं शांत हूं, लेकिन शरीर तनाव में है और मन परेशान है, तो केवल शब्द काम नहीं करेंगे। शांति बोलने से नहीं आती, उसे जीवन में जगह देनी पड़ती है।
सबसे जरूरी है Rest लेना, नींद पूरी करना और Meditation शुरू करना। समय पर सोना भी उतना ही जरूरी है। शरीर को आराम मिलेगा तो मन भी धीरे धीरे शांत होगा और भीतर की बेचैनी कम होने लगेगी। यही Energy को ऊपर लाने की बुनियाद है।
सिर्फ 20 मिनट बैठना भी बदल सकता है आपका Mood
एक आसान अभ्यास कीजिए। दीवार का सहारा लेकर आंखें बंद कीजिए और बीस मिनट सिर्फ चुपचाप बैठिए। कुछ मत कीजिए, कुछ हासिल करने की कोशिश मत कीजिए। बस शरीर और मन को थोड़ी देर के लिए पूरी तरह रुकने का मौका दीजिए।
पंद्रह से बीस मिनट किसी Park, Garden या बगीचे में बैठिए। हरी घास देखिए, पेड़ पौधों को देखिए, छोटे बच्चों को खेलते देखिए और प्रकृति को महसूस कीजिए। कभी कभी इतनी सी चीज भी मन को गहरी राहत देने लगती है।
कभी अपनी रोज की परिस्थिति और रोज मिलने वाले लोगों से थोड़ी दूरी बनाकर खुद को समय दीजिए। लगातार उसी माहौल में रहने से मन Overloaded हो सकता है। थोड़ी दूरी और थोड़ी शांति वापस Balance लाने में बड़ी भूमिका निभाती है।
सनातन दिनचर्या में Energy Reset का पूरा तरीका है
भारतीय सनातन परंपरा में भी ऐसी कई दिनचर्याएं बताई गई हैं, जो मन और ऊर्जा को संतुलित करने से जुड़ी हैं। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना, भगवान का स्मरण करना और गुरुजनों को याद करना दिन की शुरुआत को अलग दिशा दे सकता है।
सुबह उठकर अपनी हथेलियां देखना, उनमें ईश्वरीय शक्ति का स्मरण करना और धरती माता को प्रणाम करना भी इसी परंपरा का हिस्सा है। आज जिसे Gratitude कहा जाता है, उसका अभ्यास हमारे यहां दिन शुरू होते ही कृतज्ञता के रूप में किया जाता रहा है।
इसके बाद Meditation, Pranayam और ध्यान किया जा सकता है। दान कीजिए, चींटियों को भोजन दीजिए, श्वान को भोजन दीजिए और गौ माता की सेवा कीजिए। फिर अपने काम पर ध्यान लगाइए और दिनभर जहां संभव हो, सेवा और भोजन दान करते रहिए।
शाम की 15 मिनट आरती बदल सकती है पूरा माहौल
शाम के समय किसी मंदिर में पंद्रह मिनट आरती में शामिल होने की आदत शुरू कीजिए। कोई बड़ा नियम जरूरी नहीं। बस वहां खड़े रहिए, आंखें बंद कीजिए और उस माहौल को महसूस कीजिए। नियमित अभ्यास से भीतर का अनुभव धीरे धीरे बदल सकता है।
मान्यता है कि लगातार पंद्रह से बीस दिनों तक शाम की आरती में जाने से व्यक्ति अपनी मानसिक और भावनात्मक अवस्था में फर्क महसूस कर सकता है। रोज की भागदौड़ से निकलकर कुछ मिनट भक्ति और शांति में खड़ा होना मन को Reset करता है।
आध्यात्मिक दृष्टि में आरती के स्पंदन को शरीर के हर कण, हर Cell और DNA तक Positive प्रभाव पहुंचाने वाला माना गया है। आंखें बंद करके उस ध्वनि, वातावरण और भावना को भीतर तक महसूस करना इस अनुभव को और गहरा कर सकता है।
रात में सोने से पहले भगवान को धन्यवाद दीजिए और Meditation करते हुए सोइए। बड़ी जिंदगी बदलने के लिए हमेशा बड़े फैसले जरूरी नहीं होते। कई बार रोज की छोटी आदतों में बदलाव ही मानसिक स्थिति बदल देता है और बहुत सी परेशानियां शांत होने लगती हैं।
जप, तप, दान और ध्यान ही High Energy का असली Formula
जप, तप, दान, भजन, ध्यान, कीर्तन, Positive Thinking और उसके अनुसार आचरण को High Energy Vibration का सार माना गया है। केवल अच्छा सोचना नहीं, बल्कि वैसा व्यवहार करना भी जरूरी है। सोच, वाणी और कर्म एक दिशा में आने चाहिए।
जब व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा ऊपर जाती है, तो उसका Confidence, Decision Making और Response भी बदलता है। इसी कारण High Energy को Success, Happiness और Peace से जोड़ा जाता है, जबकि Low Energy को Stress, Failure और Diseases से जोड़कर देखा जाता है।
इस आध्यात्मिक दृष्टिकोण में माना जाता है कि ऊर्जा का स्तर ऊंचा होने पर व्यक्ति अपने लक्ष्यों और इच्छाओं की दिशा में अधिक प्रभावी ढंग से बढ़ता है। इसी अवस्था के बाद ज्योतिष और वास्तु जैसे उपायों को भी ज्यादा असरदार माना जाता है।
जो बोलते हो, वही धीरे धीरे तुम्हारी Reality बनता है
सनातन मान्यता में सरस्वती केवल दिन में एक बार नहीं, बल्कि चौबीसों घंटे जिह्वा पर विराजमान मानी जाती हैं। इसलिए व्यक्ति क्या बोल रहा है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। बार बार बोले गए शब्द धीरे धीरे सोच, फैसलों और व्यवहार का हिस्सा बनने लगते हैं।
आप जो लगातार मानते हैं, उसी दिशा में खुद को बनाने लगते हैं। इसलिए स्वयं को जिस अवस्था में देखना चाहते हैं, उसी प्रकार बोलिए, सोचिए और मांगिए। अगर हर समय हार, डर और परेशानी की बात करेंगे, तो मन भी उसी Pattern में रहने लगेगा।
आध्यात्मिक मान्यता में परमात्मा का उत्तर एक शब्द माना गया है, तथास्तु। इसलिए अपनी सोच, वाणी, इच्छा और आचरण को उसी दिशा में रखिए, जिस जीवन को आप पाना चाहते हैं। छोटी छोटी चीजें बदलेंगी, तो धीरे धीरे पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकती है।

