खामेनेई के गृह शहर पर अमेरिकी हमला: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है।
दोनों देशों के बीच लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई जारी हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।
अमेरिका ने ईरान के मशहद शहर में मौजूद दो अहम पुलों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया।
इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है और हालात पहले से अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं।
खामेनेई के गृह शहर में अमेरिकी स्ट्राइक
मशहद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई का गृह शहर माना जाता है। इसी शहर में उनके अंतिम संस्कार और दफन की तैयारियां चल रही हैं।
ऐसे समय में अमेरिका द्वारा शहर के दो महत्वपूर्ण पुलों पर हमला किए जाने को ईरान ने गंभीर उकसावे वाली कार्रवाई बताया है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक संवेदनशील धार्मिक और राष्ट्रीय अवसर को प्रभावित करने की कोशिश है।
उनका आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जानबूझकर ऐसे समय पर हमले कर रहे हैं ताकि खामेनेई के जनाजे और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर असर पड़े।
ईरान ने ट्रंप पर लगाए गंभीर आरोप
अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि अमेरिका का मकसद केवल सैन्य दबाव बनाना नहीं, बल्कि देश के लोगों के मनोबल को कमजोर करना भी है।
उनका कहना है कि इस तरह के हमले क्षेत्र में शांति की संभावनाओं को और कमजोर कर रहे हैं।
इस बीच मशहद शहर के एक होटल पर लगा एक बैनर भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिस पर अंग्रेजी में लिखा है, “We Will Kill Trump”।
यह बैनर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे ईरान में अमेरिका विरोधी माहौल का प्रतीक बताया जा रहा है।
अमेरिका पर ईरान का पलटवार
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही समय बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी नौसेना मुख्यालय के पास स्थित ठिकानों को निशाना बनाया।
इसके अलावा अन्य रणनीतिक स्थानों पर भी हमले किए गए। हालांकि, इन हमलों में हुए नुकसान को लेकर दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
लगातार हो रहे इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
जेडी वेंस की चेतावनी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान पर हालिया समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि ईरान ने एक बार फिर व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है।
वेंस ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने या बाधित करने की कोशिश की तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा।
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अमेरिका की प्राथमिकता है।
अमेरिका को भी उठाना पड़ा भारी नुकसान
युद्ध के दौरान केवल ईरान ही नहीं, बल्कि अमेरिका को भी नुकसान उठाना पड़ा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान अब तक अमेरिकी वायुसेना के 30 MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिरा चुका है।
MQ-9 रीपर ड्रोन अमेरिका की आधुनिक निगरानी और हमला करने वाली प्रमुख सैन्य तकनीकों में शामिल हैं।
इनका उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और सटीक हमले करने के लिए किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक MQ-9 रीपर ड्रोन की अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़ डॉलर (30 मिलियन डॉलर) है।
ऐसे में 30 ड्रोन का नुकसान अमेरिका के लिए आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टि से बड़ा झटका माना जा रहा है
बढ़ती चिंता, दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
लगातार हो रहे हमले, तीखी बयानबाजी और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने से क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाते हैं या संघर्ष और तेज होता है।

