क्या बांग्लादेश में लौट पाएंगी शेख हसीना: बांग्लादेश की राजनीति में 2026 का आम चुनाव एक ऐतिहासिक मोड़ बनकर उभरा है। इस बार सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ राजनीतिक समीकरण भी पूरी तरह बदलते दिखाई दिए।
चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी सरकार बनाने जा रही है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि देश की जनता बदलाव चाहती थी।
दिलचस्प बात यह रही कि इस चुनाव में अवामी लीग को हिस्सा लेने की अनुमति नहीं थी, जिसके कारण मुकाबला लगभग एकतरफा होकर जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी के बीच सीमित हो गया।
बीएनपी ने 200 से ज्यादा सीटें जीती
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान का सत्ता में आना केवल व्यक्तिगत या पारिवारिक राजनीतिक वापसी नहीं,
बल्कि बांग्लादेश की सत्ता संरचना में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
चुनाव परिणामों में बीएनपी ने 200 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि जमात-ए-इस्लामी 74 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बन गई।
छोटे दलों का प्रदर्शन कमजोर रहा, जिससे साफ हुआ कि मतदाता इस बार बड़े दलों में ही विकल्प तलाश रहे थे।
मतदाताओं के बीच शेख हसीना के प्रति नाराजगी
इस चुनाव का सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि अब प्रतिबंधित अवामी लीग का भविष्य क्या होगा और क्या पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना दोबारा सक्रिय राजनीति में प्रभावी भूमिका निभा पाएंगी।
कई मतदाताओं की राय में पार्टी पर प्रतिबंध लोकतांत्रिक संतुलन के लिए सही नहीं है और भविष्य में उसे चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए।
मतदाताओं के बीच शेख हसीना के प्रति नाराजगी का कारण बीते चुनावों की पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल बताए जा रहे हैं।
कई लोगों का मानना था कि उन्हें पहले मतदान का वास्तविक अवसर नहीं मिलता था, इसलिए इस बार उन्होंने खुलकर वोट डाला।
यही कारण है कि अवामी लीग की अनुपस्थिति में उसके पारंपरिक समर्थकों का एक हिस्सा बीएनपी की ओर झुक गया,
क्योंकि वे किसी भी हाल में जमात-ए-इस्लामी को सत्ता में नहीं देखना चाहते थे।
जमात-ए-इस्लामी का उभार भी आने वाले समय में सत्ता संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
उसके विचारों को लेकर समाज के उदार और युवा वर्ग में आशंकाएँ हैं, जिससे राजनीतिक स्थिरता एक चुनौती बन सकती है।
कुल मिलाकर यह चुनाव केवल सरकार बदलने की घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की लोकतांत्रिक दिशा,
विपक्ष की भूमिका और भविष्य की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया अध्याय साबित हो सकता है।

